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Fatehabad News: कंडम घोषित दुकानों में 6 वर्षों से बिना किराया दिए दुकानदार कर रहे कारोबार
Wed, 11 Dec 2024 02:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Wed, 11 Dec 2024 02:11 AM IST
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फतेहाबाद के मुख्य मार्ग पर बीडीपीओ कार्यालय की कंडम हो चुकी दुकानें।
फतेहाबाद। बीडीपीओ कार्यालय की 18 दुकानों को जर्जर हुए छह साल से अधिक समय बीत गया लेकिन इन दुकानों को प्रशासनिक अधिकारी खाली नहीं करवा पा रहे हैं। दुकानदार भी साल 2019 से किराया दिए बिना कारोबार कर रहे हैं।
एसडीएम और डीआरओ की कोर्ट में भी सुनवाई की जा रही है। इससे पहले जिला राजस्व अधिकारी की कोर्ट में तीन साल तक मामला चला जबकि न्यायिक कोर्ट की व्यवस्था के अनुसार अदालत में तीन साल पुराने मामले फास्ट ट्रैक में आ जाते हैं।
18 के बजाय बननी थीं 36 दुकानें
बीडीपीओ कार्यालय की जर्जर हो चुकी 18 दुकानों को तोड़कर वहां पर बरामदे के साथ दोमंजिले पर 36 दुकानें बननी थी। इसके लिए उस दौरान सवा करोड़ रुपये नाबार्ड ने जारी भी किए थे लेकिन जब पंचायत विभाग ने दुकानों को तोड़ने की कार्रवाई की तो दुकानदारों ने एक राजनेता के पास गुहार लगाई। राजनेता ने कार्रवाई को रुकवा दिया। इसके बाद दुकानदार सरकार को देय किराया राशि एकत्रित करके कानूनी कार्रवाई में खर्च कर रहे हैं।
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जर्जर हो चुकी दुकानों की छत से कई बार गिर चुका मलबा
बीडीपीओ कार्यालय की 18 दुकानों को मार्च 2019 में लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) ने जर्जर घोषित कर दिया था। तब से इन्हें किराये पर देने पर रोक लगा दी थी। उसके बाद 14 दुकान संचालित होती रहीं लेकिन अब 10 दुकानें संचालित हैं। छत से मलबा गिरने के कारण बाकी किरायेदार दुकान बंद करके दूसरी जगह चले गए।
मामला एसडीएम कोर्ट में विचाराधीन है। जिस पर जल्द अंतिम फैसला आएगा। उसके आधार पर आगामी कार्रवाई की जाएगी। विभाग साल 2019 से जर्जर घोषित दुकानों का किराया नहीं ले रहा है। वहां हादसा होने पर दुकानदार खुद जिम्मेदार होंगे। इसके लिए उनको नोटिस दिया जा चुका है।
- अनिल कुमार, बीडीपीओ, फतेहाबाद।
दुकानें खाली करवाने का मामला मेरे संज्ञान में है। इस मामले में सुनवाई जारी है। जल्द ही फैसला आ जाएगा।
- डाॅ. जयवीर यादव, एसडीएम, फतेहाबाद।
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एसडीएम और डीआरओ की कोर्ट में भी सुनवाई की जा रही है। इससे पहले जिला राजस्व अधिकारी की कोर्ट में तीन साल तक मामला चला जबकि न्यायिक कोर्ट की व्यवस्था के अनुसार अदालत में तीन साल पुराने मामले फास्ट ट्रैक में आ जाते हैं।
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18 के बजाय बननी थीं 36 दुकानें
बीडीपीओ कार्यालय की जर्जर हो चुकी 18 दुकानों को तोड़कर वहां पर बरामदे के साथ दोमंजिले पर 36 दुकानें बननी थी। इसके लिए उस दौरान सवा करोड़ रुपये नाबार्ड ने जारी भी किए थे लेकिन जब पंचायत विभाग ने दुकानों को तोड़ने की कार्रवाई की तो दुकानदारों ने एक राजनेता के पास गुहार लगाई। राजनेता ने कार्रवाई को रुकवा दिया। इसके बाद दुकानदार सरकार को देय किराया राशि एकत्रित करके कानूनी कार्रवाई में खर्च कर रहे हैं।
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जर्जर हो चुकी दुकानों की छत से कई बार गिर चुका मलबा
बीडीपीओ कार्यालय की 18 दुकानों को मार्च 2019 में लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) ने जर्जर घोषित कर दिया था। तब से इन्हें किराये पर देने पर रोक लगा दी थी। उसके बाद 14 दुकान संचालित होती रहीं लेकिन अब 10 दुकानें संचालित हैं। छत से मलबा गिरने के कारण बाकी किरायेदार दुकान बंद करके दूसरी जगह चले गए।
मामला एसडीएम कोर्ट में विचाराधीन है। जिस पर जल्द अंतिम फैसला आएगा। उसके आधार पर आगामी कार्रवाई की जाएगी। विभाग साल 2019 से जर्जर घोषित दुकानों का किराया नहीं ले रहा है। वहां हादसा होने पर दुकानदार खुद जिम्मेदार होंगे। इसके लिए उनको नोटिस दिया जा चुका है।
- अनिल कुमार, बीडीपीओ, फतेहाबाद।
दुकानें खाली करवाने का मामला मेरे संज्ञान में है। इस मामले में सुनवाई जारी है। जल्द ही फैसला आ जाएगा।
- डाॅ. जयवीर यादव, एसडीएम, फतेहाबाद।