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नियमों में सेंध लगा शैलर मालिक कर रहे करोड़ों का गोलमाल
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फतेहाबाद। क्या मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण के बावजूद फसलों की अवैध खरीद-फरोख्त हो सकती है? यदि व्यापारियों की मानें तो जिले में यही खेल चल रहा है। हालांकि शैलर मालिक इससे इनकार करते हैं। मगर मंडी के व्यापारी दावा करते हैं कि शैलर मालिक कागजों में फर्जीवाड़ा कर लाखों रुपये कमा रहे हैं और सरकार को टैक्स भी नहीं देते।
इससे नुकसान उनका होता है, जो शैलर मालिक साफ सुथरा काम करते हैं। कई आरटीआई कार्यकर्ता भी गड़बड़ी को कागजों में उजागर करना चाहते हैं, लेकिन गड़बड़ी पकड़ी नहीं जा रही। व्यापारियों का दावा है कि यह काम शैलर मालिक, आढ़ती, बड़े जमींदारों व अधिकारियों की साठगांठ के साथ होता है। जिले में 177 शैलर हैं। इनमें से करीब 20 शैलर ऐसे हैं, जो इसी तरह कमाई कर रहे हैं। संवाद
ऐसे होती है गड़बड़ी
व्यापारियों के मुताबिक समय हरियाणा में परमल धान का समर्थन मूल्य 1940 रुपये है। शैलर मालिक समर्थन मूल्य पर धान खरीद कर सरकार को 67 प्रतिशत चावल देते हैं। यानी 100 किलो धान लेकर 67 किलो चावल वापस लौटाएंगे। यूपी व बिहार जैसे कई राज्यों में धान सस्ता है। इसलिए वहां चावल भी सस्ता है। शैलर मालिक कागजों में डीलिंग लोकल जमींदारों के साथ करते हैं। मगर दूसरे राज्यों से सस्ता चावल खरीद लाते हैं। उसी चावल को आगे महंगे मूल्य पर सरकार को बेच दिया जाता है। इसमें मुनाफा ज्यादा है और मेहनत भी नहीं करनी पड़ती।
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इन केसों से समझिये, कैसे होता है फर्जीवाड़ा...
केस 1- सिलीगुड़ी से मंगवाया था चावल, हो गई ठगी
रतिया के एक शैलर मालिक से 8 लाख 73 हजार की ठगी हो गई। शैलर मालिक ने पुलिस में केस दर्ज करवाया है। बताया है कि उन्होंने फेसबुक पर सिलीगुड़ी की एक फर्म का विज्ञापन देखा था, जिसमें चावल बेचने का ऑफर था। विज्ञापन पर लिखे नंबर संपर्क किया। चावल खरीदने की डील हुई। 23 जून 2021 को उनका सौदा हो गया। 24 जून को उन लोगों ने एक ट्रक में 40 टन चावल लोड करवा कर उसकी वीडियोग्राफी की। वीडियो, बिल व अन्य दस्तावेज मोबाइल पर भेज दिए। यहां से व्यापारी ने उक्त फर्म के खाते में 8 लाख 73 हजार रुपये डाल दिए। लेकिन यहां पर चावल से भरा ट्रक नहीं पहुंचा।
केस 2- राइस मिल से धान गायब
यह मामला जून 2021 का है। खाद्य एवं पूर्ति विभाग ने रतिया की एक राइस मिल को 7029 मीट्रिक टन धान मिलिंग के लिए अलॉट किया था। जब विभाग की टीम ने निरीक्षण किया तो धान कम मिला। विभाग के इंस्पेक्टर सुखविंद्र सिंह की शिकायत पर मिल के मालिक व गारंटर्स पर मामला भी दर्ज करवाया गया। इंस्पेक्टर सुखविंद्र सिंह ने बताया कि वर्ष 2020-21 के दौरान जिला मिलिंग कमेटी द्वारा उक्त फर्म को सीएमआर के धान अलॉट किया था। 7029 मीट्रिक टन धान अलॉट किया गया। जांच के दौरान 16 मीट्रिक टन धान कम मिला।
कोट
शैलर मालिकों को कुछ धान सरकार अलॉट करती है। इसके अलावा हम खुद भी प्राइवेट खरीद करते हैं और चावल निकाल कर बेचते हैं। यह सब नियमानुसार होता है। पोर्टल पर फसल पंजीकरण किसानों व आढ़तियों का काम है। सारा धान अनाजमंडी में आता है। ऐसे में संभव नहीं है कि शैलर मालिक कोई हेराफेरी कर सकें।
-सुरेश जिंदल, जिला अध्यक्ष, राइस मिलर्स एसोसिएशन।
कोट
पोर्टल पर पंजीकरण से लेकर मंडी में खरीद तक की प्रक्रिया ऑनलाइन है। सारी प्रक्रिया पारदर्शी है। ऐसे में यकीन नहीं होता कि शैलर मालिक कोई गड़बड़ी कर सकते हैं। फिर भी ऐसी कोई बात है तो जांच करवाई जाएगी।
-विनित जैन, खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक, फतेहाबाद।
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इससे नुकसान उनका होता है, जो शैलर मालिक साफ सुथरा काम करते हैं। कई आरटीआई कार्यकर्ता भी गड़बड़ी को कागजों में उजागर करना चाहते हैं, लेकिन गड़बड़ी पकड़ी नहीं जा रही। व्यापारियों का दावा है कि यह काम शैलर मालिक, आढ़ती, बड़े जमींदारों व अधिकारियों की साठगांठ के साथ होता है। जिले में 177 शैलर हैं। इनमें से करीब 20 शैलर ऐसे हैं, जो इसी तरह कमाई कर रहे हैं। संवाद
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ऐसे होती है गड़बड़ी
व्यापारियों के मुताबिक समय हरियाणा में परमल धान का समर्थन मूल्य 1940 रुपये है। शैलर मालिक समर्थन मूल्य पर धान खरीद कर सरकार को 67 प्रतिशत चावल देते हैं। यानी 100 किलो धान लेकर 67 किलो चावल वापस लौटाएंगे। यूपी व बिहार जैसे कई राज्यों में धान सस्ता है। इसलिए वहां चावल भी सस्ता है। शैलर मालिक कागजों में डीलिंग लोकल जमींदारों के साथ करते हैं। मगर दूसरे राज्यों से सस्ता चावल खरीद लाते हैं। उसी चावल को आगे महंगे मूल्य पर सरकार को बेच दिया जाता है। इसमें मुनाफा ज्यादा है और मेहनत भी नहीं करनी पड़ती।
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इन केसों से समझिये, कैसे होता है फर्जीवाड़ा...
केस 1- सिलीगुड़ी से मंगवाया था चावल, हो गई ठगी
रतिया के एक शैलर मालिक से 8 लाख 73 हजार की ठगी हो गई। शैलर मालिक ने पुलिस में केस दर्ज करवाया है। बताया है कि उन्होंने फेसबुक पर सिलीगुड़ी की एक फर्म का विज्ञापन देखा था, जिसमें चावल बेचने का ऑफर था। विज्ञापन पर लिखे नंबर संपर्क किया। चावल खरीदने की डील हुई। 23 जून 2021 को उनका सौदा हो गया। 24 जून को उन लोगों ने एक ट्रक में 40 टन चावल लोड करवा कर उसकी वीडियोग्राफी की। वीडियो, बिल व अन्य दस्तावेज मोबाइल पर भेज दिए। यहां से व्यापारी ने उक्त फर्म के खाते में 8 लाख 73 हजार रुपये डाल दिए। लेकिन यहां पर चावल से भरा ट्रक नहीं पहुंचा।
केस 2- राइस मिल से धान गायब
यह मामला जून 2021 का है। खाद्य एवं पूर्ति विभाग ने रतिया की एक राइस मिल को 7029 मीट्रिक टन धान मिलिंग के लिए अलॉट किया था। जब विभाग की टीम ने निरीक्षण किया तो धान कम मिला। विभाग के इंस्पेक्टर सुखविंद्र सिंह की शिकायत पर मिल के मालिक व गारंटर्स पर मामला भी दर्ज करवाया गया। इंस्पेक्टर सुखविंद्र सिंह ने बताया कि वर्ष 2020-21 के दौरान जिला मिलिंग कमेटी द्वारा उक्त फर्म को सीएमआर के धान अलॉट किया था। 7029 मीट्रिक टन धान अलॉट किया गया। जांच के दौरान 16 मीट्रिक टन धान कम मिला।
कोट
शैलर मालिकों को कुछ धान सरकार अलॉट करती है। इसके अलावा हम खुद भी प्राइवेट खरीद करते हैं और चावल निकाल कर बेचते हैं। यह सब नियमानुसार होता है। पोर्टल पर फसल पंजीकरण किसानों व आढ़तियों का काम है। सारा धान अनाजमंडी में आता है। ऐसे में संभव नहीं है कि शैलर मालिक कोई हेराफेरी कर सकें।
-सुरेश जिंदल, जिला अध्यक्ष, राइस मिलर्स एसोसिएशन।
कोट
पोर्टल पर पंजीकरण से लेकर मंडी में खरीद तक की प्रक्रिया ऑनलाइन है। सारी प्रक्रिया पारदर्शी है। ऐसे में यकीन नहीं होता कि शैलर मालिक कोई गड़बड़ी कर सकते हैं। फिर भी ऐसी कोई बात है तो जांच करवाई जाएगी।
-विनित जैन, खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक, फतेहाबाद।