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Fatehabad News: स्कूल भवनों की हर साल कराई जाए ऑडिट

Thu, 07 Aug 2025 11:22 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Thu, 07 Aug 2025 11:22 PM IST
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School buildings should be audited every year
फतेहाबाद में कैसी है पाठशाला के तहत संवाद कार्यक्रम में चर्चा करते हुए स्कूल मु​खिया, ​शिक्षक औ
फतेहाबाद। जिले के प्रत्येक सरकारी स्कूल में भवन की हालत अच्छी नहीं है। कहीं ज्यादा हालत खराब है तो कहीं हल्की मरम्मत की जरूरत है। लेकिन सरकार घटना से पहले नहीं जागती है। जब कोई हादसा हो जाता है तो सुध ली जाती है। अगर हर साल भवनों का ऑडिट हो और फिजिकल वेरिफिकेशन करवाई जाए तो सुधार हो सकता है।
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ये बात संवाद न्यूज कार्यालय में वीरवार को आयोजित संवाद कार्यक्रम में स्कूल मुखियाओं, शिक्षकों व समाजसेवी व पार्षदों ने कही। स्कूलों की जर्जर हालत के अलावा शिक्षकों की कमी, परिवहन सुविधा, खेल सुविधाएं न होने के मुद्दों को भी उठाया और कहा कि शिक्षा विभाग इनकी तरफ भी ध्यान देना चाहिए। अगर ये मूलभूत सुविधाएं जब तक नहीं होंगी तब तक स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या नहीं बढ़ेगी।
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संवाद कार्यक्रम में स्कूल मुखिया रामेश्वर वर्मा, शिक्षक राकेश रेल्हन, अशोक भिखानी, राज्य शिक्षक पुरस्कार विजेता राजकुमार सलेमगढ़, सेवा सिंह मुवाल, विकास टुटेजा, सतीश सैनी, शमशेर राणा, पार्षद मोहन लाल नारंग आदि मौजूद रहे।
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स्कूल भवनों का हर साल ऑडिट होना चाहिए। कहने को तो हर साल यू डाइस के जरिए रिपोर्ट ली जाती है लेकिन वह मात्र औपचारिकता है। फिजिकल वेरिफिकेशन होगी तो जो माइनर टूट-फूट है तो उसकी समय रहते मरम्मत होगी तो भवन जर्जर नहीं होगा। संभाल न होने के कारण ही भवन समय से पहले जर्जर हो रहे है। माइनर मरम्मत के नाम पर विभाग राशि जारी करता है जबकि इसके इस्तेमाल से शिक्षक डरते है, वजह ये है कि रिकॉर्ड संभालना मुश्किल हो जाता है। विभाग को इसको सरल करना चाहिए।

- रामेश्वर वर्मा, स्कूल मुखिया, राजकीय कन्या हाई स्कूल, बस्ती भीमां

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स्कूलों से भवन को लेकर जो समय-समय पर रिपोर्ट मांगी जाती है उसकी तरफ ध्यान देना चाहिए। हालात ये है कि रिपोर्ट मांग ली जाती है लेकिन वह दबकर रह जाती है। जो रिपोर्ट मांगी गई है उस पर विभाग की टीम को मौके का निरीक्षण करना चाहिए।

अशोक भिखानी, शिक्षक, राजकीय प्राथमिक पाठशाला, खान मोहम्मद

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शिक्षा विभाग शिक्षकों पर ही हर काम न थोपें। शिक्षकों का काम सिर्फ पढ़ाना होता है लेकिन मरम्मत जैसे काम भी करवाए जा रहे है। विभाग स्कूल भवनों में जो संसाधनों की कमी है उसको लेकर गंभीरता बरतें, तभी सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ पाएगी।

- राकेश रेल्हन, शिक्षक, भोडिया खेड़ा

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स्कूलों में तैनात प्रत्येक शिक्षक चाहता है कि उनका स्कूल सबसे सुंदर होना चाहिए। वह इसके लिए प्रयास भी करना चाहता है लेकिन विभाग की नीतियों के कारण आगे नहीं बढ़ पाता है। स्कूलों जो भी कार्य है, शिक्षकों की राय लेकर करवाने चाहिए। लेकिन इस तरह से स्कूल मुखियाओं को सीधा फंड देकर जिम्मेदारी न थोपें। भवनों के निर्माण को लेकर तकनीकी ज्ञान शिक्षकों को नहीं होता है और छोटी कमियों पर इन्हें ही घेर लिया जाता है। ऐसे में इस तरह के काम ग्राम पंचायत, लोक निर्माण विभाग, समग्र शिक्षा विभाग से ही करवाने चाहिए।

सेवा सिंह मुवाल, स्कूल इंचार्ज, राजकीय प्राथमिक पाठशाला, धिड़

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स्कूल स्टाफ की जिम्मेदारी बनती है कि बारिशों के दिनों में छत पर साफ-सफाई समय पर होनी चाहिए। अगर पानी रूक रहा है तो उसके निकासी का प्रबंध होना चाहिए। ये छोटी-छोटी लापरवाही बाद में भारी पड़ जाती है।

- राजकुमार सलेमगढ़, राज्य शिक्षक पुरस्कार विजेता

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स्कूल भवनों के समय पर संभाल न होने के कारण जर्जर हो जाते है और गिरने तक का खतरा हो जाता है। अगर अधिकारी और यहां तक शिक्षकों के खुद के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़े तो जो हालात आज है वह नही होंगे। शिक्षा विभाग को गंभीरता बरतनी चाहिए और खासकर बारिश के दिनों में टीमें भेजकर निरीक्षण करवाना चाहिए, इससे पता चल पाएगा कि भवन की स्थिति कैसे है।

- विकास टुटेजा, शिक्षक, एवं पूर्व जिला प्रधान, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ

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अधिकतर सरकारी विद्यालयों की इमारतें पुरानी हो चुकी हैं। पीडब्लूडी, बीएंडआर विभाग या पंचायतीराज विभाग द्वारा सर्वेक्षण होना चाहिए और जर्जर हो चुके भवनों को जल्द कंडम घोषित किया जाए। जर्जर भवनों में कक्षाएं न लगाई जाएं। विद्यालय अध्यापकों को विद्यालय भवनों की मरम्मत एवं भवनों के निर्माण कार्यों से मुक्त करना चाहिए। भवनों के मरम्मत व निर्माण कार्य बीएंडआर विभाग या पंचायती राज विभाग से करवाना उचित होगा। विद्यालयों में स्कूल मैनेजमेंट कमेटी की मीटिंग हर माह होनी चाहिए। अध्यापकों से पढ़ाई के अलावा अन्य कार्य नहीं करवाए जाने चाहिए। विद्यालयों में खेल मैदान जरूरी होने चाहिए। बच्चों से आर्ट एंड क्राफ्ट व अन्य वैज्ञानिक गतिविधियों में शामिल किया जाना चाहिए। हर स्कूल में पुस्तकालयों का संचालन भी जरूरी होना चाहिए ताकि बच्चों में साहित्य पढऩे की आदत विकसित हो और व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त हो सके।

- मोहन लाल नारंग, पार्षद

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स्कूलों के भवनों के प्रति विभाग को गंभीर होना पड़ेगा। कई भवनों के हालात ऐसे है कि वह 50 साल पुराने हो चुके है, छतों से पानी टपकता है। लेकिन फिर भी उनमें कक्षाएं लग रही है। विभाग को ऐसे स्कूलों के भवनों की सुध लेनी चाहिए। ऐसा न करें कि जब कोई घटना हो जाती है तो ही सुध लेनी है।


- शमशेर राणा, शिक्षक

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प्राइमरी स्कूलों में खेल सुविधाओं का अभाव है। खेल प्रतियोगिताओं के नाम पर औपचारिकता न की जाए। विद्यार्थियों को संसाधन उपलब्ध करवाए जाएं। छोटे बच्चों को परिवहन सुविधा उपलब्ध करवाई जाए तो स्कूलों में संख्या बढ़ सकती है।

- सतीश सैनी, शिक्षक, राजकीय प्राइमरी स्कूल धिड़
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