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Fatehabad News: पेटांक ट्रांसप्लांट चैंपियनशिप में सतबीर ने जीते दो पदक
Wed, 06 May 2026 11:41 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Wed, 06 May 2026 11:41 PM IST
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बैकॉक में आयोजित प्रतियोगिता में पदक जीतने पर जिले के गांव किरढान निवासी सतबीर को सम्मानित करते
फतेहाबाद। गांव सिरढ़ान के सतबीर गिजरोइया ने संघर्ष और हौंसले की मिसाल पेश करते हुए थाइलैंड में आयोजित पेटांक ट्रांसप्लांट एशियन ओपन चैंपियनशिप में दो कांस्य पदक जीते हैं। ये चैंपियनशिप 29 अप्रैल से 3 मई तक बैंकॉक में आयोजित हुई। इसमें 9 देशों के 85 खिलाड़ियों ने भाग लिया।
प्रतियोगिता में भारत की ओर से 14 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया और कुल 6 पदक जीते। सतबीर ने मेन्स सिंगल्स के नेशन्स ग्रुप और एशियन ग्रुप में कांस्य पदक अपने नाम किए। इससे पहले भी वह थाइलैंड और जर्मनी में अच्छा प्रदर्शन कर चुके हैं। सतबीर गांव में सीएससी चलाते हैं और नियमित रूप से सुबह-शाम अभ्यास करते हैं।
सतबीर के बड़े भाई सुनील गिजरोइया के अनुसार सात साल पहले गंभीर बीमारी से जूझ रहे सतबीर की दोनों किडनियां जवाब दे चुकी थीं लेकिन पिता के जीवनदान और अपने जज्बे के दम पर उन्होंने नई पहचान बनाई। 2019 में बीमारी सामने आने के बाद डॉक्टरों ने किडनी ट्रांसप्लांट ही एकमात्र विकल्प बताया। ऐसे समय में पिता रणजीत सिंह ने अपनी किडनी देकर बेटे को नई जिंदगी दी।
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जयपुर में सफल ऑपरेशन के बाद धीरे-धीरे सतबीर के स्वास्थ्य में सुधार हुआ। स्वास्थ्य बेहतर होने के बाद सतबीर जयपुर में ही ऐसे लोगों के संपर्क में आए जिन्होंने ट्रांसप्लांट के बाद खेलों में भाग लिया था। यहीं से उन्हें प्रेरणा मिली और उन्होंने पेटांक खेल अपनाया और एशियन ओपन चैंपियनशिप में दो कांस्य पदक जीते हैं।
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प्रतियोगिता में भारत की ओर से 14 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया और कुल 6 पदक जीते। सतबीर ने मेन्स सिंगल्स के नेशन्स ग्रुप और एशियन ग्रुप में कांस्य पदक अपने नाम किए। इससे पहले भी वह थाइलैंड और जर्मनी में अच्छा प्रदर्शन कर चुके हैं। सतबीर गांव में सीएससी चलाते हैं और नियमित रूप से सुबह-शाम अभ्यास करते हैं।
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सतबीर के बड़े भाई सुनील गिजरोइया के अनुसार सात साल पहले गंभीर बीमारी से जूझ रहे सतबीर की दोनों किडनियां जवाब दे चुकी थीं लेकिन पिता के जीवनदान और अपने जज्बे के दम पर उन्होंने नई पहचान बनाई। 2019 में बीमारी सामने आने के बाद डॉक्टरों ने किडनी ट्रांसप्लांट ही एकमात्र विकल्प बताया। ऐसे समय में पिता रणजीत सिंह ने अपनी किडनी देकर बेटे को नई जिंदगी दी।
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जयपुर में सफल ऑपरेशन के बाद धीरे-धीरे सतबीर के स्वास्थ्य में सुधार हुआ। स्वास्थ्य बेहतर होने के बाद सतबीर जयपुर में ही ऐसे लोगों के संपर्क में आए जिन्होंने ट्रांसप्लांट के बाद खेलों में भाग लिया था। यहीं से उन्हें प्रेरणा मिली और उन्होंने पेटांक खेल अपनाया और एशियन ओपन चैंपियनशिप में दो कांस्य पदक जीते हैं।