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Fatehabad News: ई-टेंडरिंग के खिलाफ फिर गरजे सरपंच
Tue, 02 May 2023 09:31 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Tue, 02 May 2023 09:31 PM IST
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फतेहाबाद में ई-टेंडरिंग के खिलाफ प्रदर्शन करते सरपंच
फतेहाबाद। ई-टेंडरिंग व राइट टू रिकॉल के खिलाफ मंगलवार को जिले के सरपंचों ने फतेहाबाद में जोरदार प्रदर्शन किया व लघु सचिवालय के सामने सरकार का पुतला फूंका। सभी सरपंच मंगलवार को पहले सरपंच एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष रणबीर सिंह गिल के नेतृत्व में फतेहाबाद के खंड विकास एवं पंचायत कार्यालय में एकत्रित हुए और यहां पर भी जोरदार नारेबाजी की। इसके बाद सभी पैदल मार्च करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे।
इस अवसर पर सरपंच एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष रणबीर सिंह गिल ने कहा कि देहात बचाओ आंदोलन चार माह से जारी है। मंगलवार को प्रदेशभर में सभी जिलों में पुतले फूंके जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी दो मुख्य मांगें हैं राइट-टू-रिकॉल कानून निरस्त किया जाए या विधायक-सांसदों पर भी यह लागू हो। ई-टेंडरिंग भी खत्म की जाए। उन्होंने कहा कि यह केवल मौजूदा सरपंचों की लड़ाई नहीं बल्कि पूरे गांव-देहात की है। क्योंकि आगे फिर कोई और भी सरपंच बनेंगे।
रणबीर गिल ने बताया कि सरकार पंचायती राज को समाप्त करने पर तुली हुई है। ई-टेंडरिंग के माध्यम से सरपंचों के हाथ बांधने का काम किया जा रहा है। सरकार अगर कहती है कि सरपंच उनके साथ हैं तो पूरे प्रदेश में 6226 ग्राम पंचायतें हैं, वह एक हजार सरपंच भी अपने साथ दिखा दें। उन्होंने कहा कि सरकार नहीं चाहती कि सरपंचों के हाथ से ग्रामीण विकास हो, बल्कि इसको अधिकारियों के हाथ में दे दिया गया है, जिससे लाजिमी है कि भ्रष्टाचार फैलेगा। गांव का प्रतिनिधि सरपंच होता है और उसे पता होता है कि कहां क्या परेशानी है और कितना रुपया खर्च होगा। अगर सरपंच के गांव में ग्रामीणों की मर्जी के अनुसार, काम नहीं होगा तो ग्रामीण सरपंच को आड़े हाथों लेंगे, ना कि सरकार व अधिकारियों को। उन्होंने बताया कि इसके विरोध में 30 मई को जींद में बड़ा सम्मेलन किया जाएगा। पहलवानों के धरने को लेकर उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर बैठे पहलवानों से वह मिलकर भी आए हैं और पहलवानों को जिस प्रकार की भी मदद चाहिए, पूरे प्रदेश के सरपंच उनके साथ खड़े हैं। वह जो भी निर्णय लेंगे, सरपंच उनका समर्थन करेंगे। इस दौरान जिलाभर के अनेक सरपंच मौजूद रहे।
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इस अवसर पर सरपंच एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष रणबीर सिंह गिल ने कहा कि देहात बचाओ आंदोलन चार माह से जारी है। मंगलवार को प्रदेशभर में सभी जिलों में पुतले फूंके जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी दो मुख्य मांगें हैं राइट-टू-रिकॉल कानून निरस्त किया जाए या विधायक-सांसदों पर भी यह लागू हो। ई-टेंडरिंग भी खत्म की जाए। उन्होंने कहा कि यह केवल मौजूदा सरपंचों की लड़ाई नहीं बल्कि पूरे गांव-देहात की है। क्योंकि आगे फिर कोई और भी सरपंच बनेंगे।
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रणबीर गिल ने बताया कि सरकार पंचायती राज को समाप्त करने पर तुली हुई है। ई-टेंडरिंग के माध्यम से सरपंचों के हाथ बांधने का काम किया जा रहा है। सरकार अगर कहती है कि सरपंच उनके साथ हैं तो पूरे प्रदेश में 6226 ग्राम पंचायतें हैं, वह एक हजार सरपंच भी अपने साथ दिखा दें। उन्होंने कहा कि सरकार नहीं चाहती कि सरपंचों के हाथ से ग्रामीण विकास हो, बल्कि इसको अधिकारियों के हाथ में दे दिया गया है, जिससे लाजिमी है कि भ्रष्टाचार फैलेगा। गांव का प्रतिनिधि सरपंच होता है और उसे पता होता है कि कहां क्या परेशानी है और कितना रुपया खर्च होगा। अगर सरपंच के गांव में ग्रामीणों की मर्जी के अनुसार, काम नहीं होगा तो ग्रामीण सरपंच को आड़े हाथों लेंगे, ना कि सरकार व अधिकारियों को। उन्होंने बताया कि इसके विरोध में 30 मई को जींद में बड़ा सम्मेलन किया जाएगा। पहलवानों के धरने को लेकर उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर बैठे पहलवानों से वह मिलकर भी आए हैं और पहलवानों को जिस प्रकार की भी मदद चाहिए, पूरे प्रदेश के सरपंच उनके साथ खड़े हैं। वह जो भी निर्णय लेंगे, सरपंच उनका समर्थन करेंगे। इस दौरान जिलाभर के अनेक सरपंच मौजूद रहे।
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