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Fatehabad News: प्रेरणा बनी संगीता, झुग्गियों के बच्चों को पढ़ाया, महिलाओं को दी आत्मनिर्भरता की उड़ान
Thu, 04 Sep 2025 11:45 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Thu, 04 Sep 2025 11:45 PM IST
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फतेहाबाद में बच्चों को पढ़ाती हुई शिक्षिका संगीता प्रणामीस्त्रोत संगीता
फतेहाबाद। कहते हैं, बदलाव की शुरुआत एक व्यक्ति से होती है। फतेहाबाद की संगीता प्रणामी ने यह बात सच कर दिखाई है। संगीता, जो पेशे से एक निजी स्कूल में शिक्षिका हैं, पिछले 6 वर्षों से स्लम क्षेत्रों में जाकर उन बच्चों को पढ़ा रही हैं, जो कभी किताब और स्कूल के नाम तक से अनजान थे।
स्कूल जाते समय जब उन्होंने सेक्टर स्थित झुग्गियों में छोटे-छोटे बच्चों को सड़कों पर भटकते देखा, तो उनसे बात की। पता चला कि इन बच्चों ने कभी स्कूल का मुंह तक नहीं देखा। यह जानकर संगीता का मन व्यथित हो उठा। उसी दिन उन्होंने तय किया कि शाम को इन बच्चों को पढ़ाएंगी।
धीरे-धीरे संगीता की यह मुहिम आकार लेने लगी। बच्चों में पढ़ाई के प्रति उत्सुकता बढ़ी और संगीता ने कई बच्चों का स्कूल में दाखिला भी करवा दिया। उनकी लगन देखकर स्थानीय लोग भी आगे आए और शैक्षणिक सामग्री, किताबें व अन्य आवश्यक सहयोग प्रदान करने लगे।
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महिलाओं के सपनों को दे रही है उड़ान
सिर्फ बच्चों के लिए ही नहीं, संगीता अब महिलाओं के जीवन में भी नई रोशनी लेकर आई हैं। पिछले तीन महीनों से वह सुबह और शाम के समय महिलाओं को स्कूटी चलाना भी सिखा रही हैं। अब तक करीब 40 महिलाएं स्कूटी चलाना सीख चुकी हैं, जो पहले दुपहिया वाहन होने के बावजूद दूसरों पर निर्भर थीं। इन महिलाओं का कहना है कि अब वे बाजार जाना हो या बच्चों को स्कूल छोड़ना हर काम खुद कर लेती हैं। संगीता का कहना है, जब महिलाओं ने अपनी परेशानी बताई तो लगा कि उन्हें केवल थोड़ा आत्मविश्वास और सहयोग चाहिए। मैंने बस शुरुआत की, अब वे खुद उड़ान भर रही हैं।
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स्कूल जाते समय जब उन्होंने सेक्टर स्थित झुग्गियों में छोटे-छोटे बच्चों को सड़कों पर भटकते देखा, तो उनसे बात की। पता चला कि इन बच्चों ने कभी स्कूल का मुंह तक नहीं देखा। यह जानकर संगीता का मन व्यथित हो उठा। उसी दिन उन्होंने तय किया कि शाम को इन बच्चों को पढ़ाएंगी।
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धीरे-धीरे संगीता की यह मुहिम आकार लेने लगी। बच्चों में पढ़ाई के प्रति उत्सुकता बढ़ी और संगीता ने कई बच्चों का स्कूल में दाखिला भी करवा दिया। उनकी लगन देखकर स्थानीय लोग भी आगे आए और शैक्षणिक सामग्री, किताबें व अन्य आवश्यक सहयोग प्रदान करने लगे।
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महिलाओं के सपनों को दे रही है उड़ान
सिर्फ बच्चों के लिए ही नहीं, संगीता अब महिलाओं के जीवन में भी नई रोशनी लेकर आई हैं। पिछले तीन महीनों से वह सुबह और शाम के समय महिलाओं को स्कूटी चलाना भी सिखा रही हैं। अब तक करीब 40 महिलाएं स्कूटी चलाना सीख चुकी हैं, जो पहले दुपहिया वाहन होने के बावजूद दूसरों पर निर्भर थीं। इन महिलाओं का कहना है कि अब वे बाजार जाना हो या बच्चों को स्कूल छोड़ना हर काम खुद कर लेती हैं। संगीता का कहना है, जब महिलाओं ने अपनी परेशानी बताई तो लगा कि उन्हें केवल थोड़ा आत्मविश्वास और सहयोग चाहिए। मैंने बस शुरुआत की, अब वे खुद उड़ान भर रही हैं।