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प्रदेश में फिर शुरू होगी राइस सूट योजना
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फतेहाबाद के रतर्या के इंपीरियल गार्डन में किसानों से सीधा संवाद करते मुख्यमंत्री मनोहर लाल, साथ
- फोटो : Fatehabad
प्रदेश में पिछले 12 साल में भूमिगत जलस्तर दोगुनी गहराई पर जा चुका है, जो गंभीर विषय है। कई क्षेत्रों में तो पानी 200 फीट से भी नीचे चला गया है। यदि समय रहते इस स्थिति को नियंत्रित नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी। प्रदेश में राइस सूट योजना फिर शुरू की जाएगी। इसके तहत बरसाती मौसम में 20 एकड़ वाले किसान को नहर से स्पेशल मोगा दिया जाता है। आवेदन करने वाले सभी किसानों को इस योजना का लाभ दिया जाएगा। यह बात मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने रतिया में मेरा पानी-मेरी विरासत योजना के अंतर्गत प्रगतिशील किसानों से सीधा संवाद करते हुए कही।
एक लाख हेक्टेयर भूमि पर वैकल्पिक खेती का लक्ष्य, अब तक 55 हजार हेक्टेयर पर किसानों ने दी स्वीकृति
इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने प्रदेश के उन क्षेत्रों में 1 लाख हेक्टेयर जमीन पर धान के स्थान पर मक्का, कपास, दलहनी फसलें, बाजरा व फल सब्जी आदि की फसलें उगाने का लक्ष्य रखा है जहां भूमिगत जल का इस्तेमाल करते हुए धान की फसल ली जाती है। अब तक प्रदेश में 42 हजार किसानों द्वारा 55 हजार हेक्टेयर जमीन पर धान न बोने के लिए अपना पंजीकरण करवाया है। सरकार ने मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1760 से बढ़ाकर 1850 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है। इसके चलते मक्का बोने वाले किसानों को प्रति एकड़ कम से कम 10500 रुपये का फायदा होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जो किसान धान के स्थान पर मक्का बोएगा उसकी फसल को खरीदने की गारंटी सरकार लेगी।
रतिया, शाहबाद और गुहला में सरकार करवाएगी सौ-सौ रिचार्ज बोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा प्रदेश के तीन खंडों, रतिया, शाहबाद व गुहला में 100-100 रिचार्ज बोर करवाए जाएंगे। इनके माध्यम से बरसाती पानी को भूमिगत किया जाएगा। इसमें 10 इंच का बोर किया जाता है जिसमें 9 इंच का पाइप डाला जाता है। प्रत्येक बोर पर डेढ़ लाख रुपये का खर्च आता है। एक बोर से लगभग 10 एकड़ भूमि के जलस्तर में सुधार होता है। किसान अपने स्तर पर भी अपने खेत में रिचार्ज बोर करवा सकते हैं, इसके लिए सरकार किसानों को अनुदान देगी। अगले एक-दो दिन में इस योजना की विस्तृत घोषणा कर दी जाएगी।
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भूमिगत पानी का इस्तेमाल न हो तो धान की खेती से भी दिक्कत नहीं
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि यदि किसान धान की फसल के लिए भूमिगत जल न लेना तय करें और केवल बरसाती अथवा नहरी पानी से धान की फसल ले सकें तो सरकार को इसमें कोई आपत्ति नहीं है। जिन क्षेत्रों में ऊपरी पानी की कमी नहीं है और किसान धान की फसल लेना चाहते हैं वे डीएसआर प्रणाली (सीधी बिजाई) से धान की बिजाई करें, इससे भी 25 से 30 प्रतिशत पानी की बचत होती है। इसके साथ ही इसमें लेबर की भी बचत होती है। उन्होंने कहा कि किसान अधिक पानी खपत वाली किस्मों के स्थान पर कम पानी वाली फसलों की बिजाई को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि जिन जमीनों में कोई खेती नहीं होती उनके सुधार के लिए भी सरकार मदद करेगी। इस दौरान सांसद सुनीता दुग्गल, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला, जजपा प्रदेशाध्यक्ष निशान सिंह, विधायक चौधरी दुड़ाराम, एडवोकेट लक्ष्मण नापा, देवेंद्र सिंह बबली, उपायुक्त डॉ. नरहरि सिंह बांगड़ व एसपी राजेश कुमार भी मौजूद रहे।
किसानों ने दिए ढैंचा पर रिव्यू करने, बागवानी-सब्जियों के लिए योजना बनाने के सुझाव
सीएम मनोहर लाल से संवाद के दौरान दो-तीन किसानों ने भी अपनी बात रखी। इनमें एक किसान ने ढैंचा की खेती पर भी रिव्यू करने का सुझाव दिया। इसके अलावा किसानों ने बागवानी-सब्जियों आदि के लिए भी योजनाएं बनाने की मांग भी रखी। किसानों ने इस बारे में अधिकारियों से किसानों के सुझाव नोट करके विस्तृत रिपोर्ट भेजने को कहा।
मुख्यमंत्री ने कृषि उपनिदेशक, बागवानी अधिकारी व अन्य संबंधित अधिकारियों को बाढ़ प्रभावित (डाकर) जमीन में डेमोस्ट्रेशन पार्क विकसित करवाने, नहरी पानी की चोरी रोकने, पानी का समान वितरण सुनिश्चित करने तथा योजना के संबंध में अधिक से अधिक किसानों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए।
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एक लाख हेक्टेयर भूमि पर वैकल्पिक खेती का लक्ष्य, अब तक 55 हजार हेक्टेयर पर किसानों ने दी स्वीकृति
इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने प्रदेश के उन क्षेत्रों में 1 लाख हेक्टेयर जमीन पर धान के स्थान पर मक्का, कपास, दलहनी फसलें, बाजरा व फल सब्जी आदि की फसलें उगाने का लक्ष्य रखा है जहां भूमिगत जल का इस्तेमाल करते हुए धान की फसल ली जाती है। अब तक प्रदेश में 42 हजार किसानों द्वारा 55 हजार हेक्टेयर जमीन पर धान न बोने के लिए अपना पंजीकरण करवाया है। सरकार ने मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1760 से बढ़ाकर 1850 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है। इसके चलते मक्का बोने वाले किसानों को प्रति एकड़ कम से कम 10500 रुपये का फायदा होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जो किसान धान के स्थान पर मक्का बोएगा उसकी फसल को खरीदने की गारंटी सरकार लेगी।
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रतिया, शाहबाद और गुहला में सरकार करवाएगी सौ-सौ रिचार्ज बोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा प्रदेश के तीन खंडों, रतिया, शाहबाद व गुहला में 100-100 रिचार्ज बोर करवाए जाएंगे। इनके माध्यम से बरसाती पानी को भूमिगत किया जाएगा। इसमें 10 इंच का बोर किया जाता है जिसमें 9 इंच का पाइप डाला जाता है। प्रत्येक बोर पर डेढ़ लाख रुपये का खर्च आता है। एक बोर से लगभग 10 एकड़ भूमि के जलस्तर में सुधार होता है। किसान अपने स्तर पर भी अपने खेत में रिचार्ज बोर करवा सकते हैं, इसके लिए सरकार किसानों को अनुदान देगी। अगले एक-दो दिन में इस योजना की विस्तृत घोषणा कर दी जाएगी।
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भूमिगत पानी का इस्तेमाल न हो तो धान की खेती से भी दिक्कत नहीं
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि यदि किसान धान की फसल के लिए भूमिगत जल न लेना तय करें और केवल बरसाती अथवा नहरी पानी से धान की फसल ले सकें तो सरकार को इसमें कोई आपत्ति नहीं है। जिन क्षेत्रों में ऊपरी पानी की कमी नहीं है और किसान धान की फसल लेना चाहते हैं वे डीएसआर प्रणाली (सीधी बिजाई) से धान की बिजाई करें, इससे भी 25 से 30 प्रतिशत पानी की बचत होती है। इसके साथ ही इसमें लेबर की भी बचत होती है। उन्होंने कहा कि किसान अधिक पानी खपत वाली किस्मों के स्थान पर कम पानी वाली फसलों की बिजाई को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि जिन जमीनों में कोई खेती नहीं होती उनके सुधार के लिए भी सरकार मदद करेगी। इस दौरान सांसद सुनीता दुग्गल, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला, जजपा प्रदेशाध्यक्ष निशान सिंह, विधायक चौधरी दुड़ाराम, एडवोकेट लक्ष्मण नापा, देवेंद्र सिंह बबली, उपायुक्त डॉ. नरहरि सिंह बांगड़ व एसपी राजेश कुमार भी मौजूद रहे।
किसानों ने दिए ढैंचा पर रिव्यू करने, बागवानी-सब्जियों के लिए योजना बनाने के सुझाव
सीएम मनोहर लाल से संवाद के दौरान दो-तीन किसानों ने भी अपनी बात रखी। इनमें एक किसान ने ढैंचा की खेती पर भी रिव्यू करने का सुझाव दिया। इसके अलावा किसानों ने बागवानी-सब्जियों आदि के लिए भी योजनाएं बनाने की मांग भी रखी। किसानों ने इस बारे में अधिकारियों से किसानों के सुझाव नोट करके विस्तृत रिपोर्ट भेजने को कहा।
मुख्यमंत्री ने कृषि उपनिदेशक, बागवानी अधिकारी व अन्य संबंधित अधिकारियों को बाढ़ प्रभावित (डाकर) जमीन में डेमोस्ट्रेशन पार्क विकसित करवाने, नहरी पानी की चोरी रोकने, पानी का समान वितरण सुनिश्चित करने तथा योजना के संबंध में अधिक से अधिक किसानों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए।