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Fatehabad News: धारसूल क्षेत्र में धान की सरकारी खरीद पर फिर उठ रहे सवाल
Sun, 21 Sep 2025 11:30 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sun, 21 Sep 2025 11:30 PM IST
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मार्केट कमेटी कार्यालय धारसूल ।
कुलां। धारसूल मार्केट कमेटी के अंतर्गत क्षेत्र में सरकारी धान खरीद में धांधली को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। पगड़ी संभाल जट्टा किसान संघर्ष समिति हरियाणा के अध्यक्ष मनदीप नथवान का आरोप है कि क्षेत्र में आढ़ती, राइस मिलर्स मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल को चकमा देकर किसानों की भूमि का फर्जी पंजीयन करवाकर, सरकार को राजस्व का चूना लगा रहे हैं।
आरोप है कि पोर्टल पर कई ऐसे किसानों की भूमि के फर्जी पंजीकरण करा दिए जाते हैं, जो स्वयं जमीन के मालिक नहीं होते है या फिर वहां वास्तव में धान की पैदावार ही नहीं होती है, बल्कि वहां दूसरी फसल उगाई होती है। मनदीप का आरोप है कि धान का फर्जी पंजीकरण कर, मिलीभगत के खेल से कागजों में धान आवक दर्शा दी जाती है।
उसके बाद राइस मिल संचालकों द्वारा बाहरी राज्यों से सस्ते दाम पर धान खरीदकर यहां समर्थन मूल्य पर बेच दी जाती है या फिर कागजों में दर्शाई गई धान खरीद के बदले में बाहर से सस्ता व घटिया चावल लाकर सरकारी गोदामों में खपा दिया जाता है। ऐसा कर राइस मिल संचालकों द्वारा सरकार को करोड़ों रुपये राजस्व की चपत लगाकर मोटा मुनाफा कमाया जाता है। यह फर्जीवाड़ा हर वर्ष जिम्मेदार अधिकारियों के संरक्षण में किया जाता है।
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मनदीप ने कहा कि क्षेत्र में धान खरीद में घोटाला करने का बड़ा गिरोह सक्रिय है। उनका कहना है कि धान खरीद कार्य के हर पहलू की निष्पक्ष जांच हो तो फर्जीवाड़ा करने वाले आढ़ती व राइस मिल संचालकों सहित अधिकारी भी कानूनी शिकंजे में फंस सकते हैं। उन्होंने बताया कि किसान संगठन द्वारा 30 सितंबर को ये मुद्दा डीसी के समक्ष भी प्रमुखता से उठाया जाएगा।
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आरोप है कि पोर्टल पर कई ऐसे किसानों की भूमि के फर्जी पंजीकरण करा दिए जाते हैं, जो स्वयं जमीन के मालिक नहीं होते है या फिर वहां वास्तव में धान की पैदावार ही नहीं होती है, बल्कि वहां दूसरी फसल उगाई होती है। मनदीप का आरोप है कि धान का फर्जी पंजीकरण कर, मिलीभगत के खेल से कागजों में धान आवक दर्शा दी जाती है।
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उसके बाद राइस मिल संचालकों द्वारा बाहरी राज्यों से सस्ते दाम पर धान खरीदकर यहां समर्थन मूल्य पर बेच दी जाती है या फिर कागजों में दर्शाई गई धान खरीद के बदले में बाहर से सस्ता व घटिया चावल लाकर सरकारी गोदामों में खपा दिया जाता है। ऐसा कर राइस मिल संचालकों द्वारा सरकार को करोड़ों रुपये राजस्व की चपत लगाकर मोटा मुनाफा कमाया जाता है। यह फर्जीवाड़ा हर वर्ष जिम्मेदार अधिकारियों के संरक्षण में किया जाता है।
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मनदीप ने कहा कि क्षेत्र में धान खरीद में घोटाला करने का बड़ा गिरोह सक्रिय है। उनका कहना है कि धान खरीद कार्य के हर पहलू की निष्पक्ष जांच हो तो फर्जीवाड़ा करने वाले आढ़ती व राइस मिल संचालकों सहित अधिकारी भी कानूनी शिकंजे में फंस सकते हैं। उन्होंने बताया कि किसान संगठन द्वारा 30 सितंबर को ये मुद्दा डीसी के समक्ष भी प्रमुखता से उठाया जाएगा।