{"_id":"60edd1ec8ebc3e9cda786dc6","slug":"protest-over-disputed-land-fatehabad-news-rtk617523194","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाईकोर्ट द्वारा यथास्थिति के आदेश के बाद भी जमीन की रजिस्ट्री होने पर खफा शहरवासियों ने लगाया जाम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाईकोर्ट द्वारा यथास्थिति के आदेश के बाद भी जमीन की रजिस्ट्री होने पर खफा शहरवासियों ने लगाया जाम
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शहर की एक विवादित जमीन पर हाईकोर्ट द्वारा यथास्थिति के आदेश होने के बावजूद रजिस्ट्री कर देने से खफा शहरवासियों ने पहले एसडीएम कार्यालय के आगे धरना दिया। वहीं रतिया-फतेहाबाद मार्ग पर जाम लगा दिया। एसडीएम कार्यालय में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। धरना दे रहे लोगों ने एसडीएम, तहसीलदार व एसएचओ पर भी गंभीर आरोप लगाए। जब थाना प्रभारी उन्हें समझाने आए तो शहरवासियों ने उन्हें स्पष्ट कहा कि जब तक एसडीएम खुद आकर अपना स्पष्टीकरण नहीं देंगे तब तक धरना जारी रहेगा। एसडीएम के फतेहाबाद में बैठक में होने की बात कही गई तो शहरवासियों ने तहसीलदार भजनलाल से अपना पक्ष रखने को कहा गया। मगर तहसीलदार भजनलाल कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए।
शहरवासी वीरभान बंसल, अशोक गर्ग, नरेश धनोलेवाला, ओमप्रकाश गर्ग आदि का आरोप था कि हाईकोर्ट द्वारा यथास्थिति के आदेश के बावजूद थानेसर निवासी विकास मिश्रा के नाम रजिस्ट्री हुई है जो रतिया एसडीएम का रिश्तेदार है। करीब पौने घंटे तक जाम लगा रहने के बाद एसडीएम भारतभूषण कौशिक मौके पर पहुंचे। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मामले की जांच की जाएगी और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने जाम लगाकर बैठे लोगों के शिष्टमंडल को कार्यालय में आकर बातचीत करने को कहा। कार्यालय में एसडीएम ने आश्वासन दिया कि उनको एक दिन का समय दिया जाए, इस मामले की पूरी जांच की जाएगी। गलत हुआ है तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में उनके एक रिश्तेदार का नाम आने पर उन्होंने कहा कि उनका कोई रिश्तेदार नहीं है, वह पूरे मामले की जांच करेंगे और दूध का दूध और पानी का पानी कर देंगे।
वहीं, जब लोग जाम लगाकर बैठे थे तो एक निहंग तलवार लहराता वहां आ गया और जाम लगाकर बैठे लोगों को हटने के लिए कहने लगा। इससे एकबारगी लोगों में खलबली मच गई। मगर लोगों ने सूझबूझ से निहंग को काबू करके पुलिस के हवाले कर दिया।
विज्ञापन
वीरभान बंसल ने बताया कि उसने अपनी पत्नी राजरानी तथा उसकी चाची ने 10 कनाल जमीन गुरुदेव कौर व हरदेव सिंह से खरीदी थी। 6 कनाल 10 मरले भूमि जोगिंद्र सिंह व नछत्तर सिंह से 1997 में खरीदी थी। इस जमीन का इंतकाल भी उसकी पत्नी व चाची के नाम दर्ज हो चुका है। बाद में मलकीत सिंह के वारिसों ने उपरोक्त तबादले को दीवानी न्यायालय में 2004 में चैलेंज किया था। दीवानी न्यायालय ने वर्ष 2009 में परमजीत आदि के पक्ष में फैसला कर दिया। इसकी अपील सेशन कोर्ट ने 2012 में खारिज कर दी। सेशन कोर्ट में केस खारिज होने के बाद अब हाईकोर्ट ने यथास्थिति के आदेश दिए हुए हैं मगर 17 जुलाई को अंदर खाते एक ही दिन में रजिस्ट्री कर दी गई और उसका इंतकाल भी चढ़ा दिया गया। इस मौके पर अग्रवाल सभा अध्यक्ष अशोक गर्ग, व्यापार मंडल अध्यक्ष अमन जैन, शैलर एसोसिएशन अध्यक्ष सुरेश जिंदल, अमृतपाल काका, ओमप्रकाश खाई, दर्शनलाल, पाल कुमार, मदन सिंगला, सुखविंद्र गोयल, उमाकांत, पवन कुमार, सुशील कुमार, मदनलाल, डॉ. नरेश जिंदल, प्रवीण जग्गा सहित कई लोग उपस्थित रहे।
विज्ञापन
शहरवासी वीरभान बंसल, अशोक गर्ग, नरेश धनोलेवाला, ओमप्रकाश गर्ग आदि का आरोप था कि हाईकोर्ट द्वारा यथास्थिति के आदेश के बावजूद थानेसर निवासी विकास मिश्रा के नाम रजिस्ट्री हुई है जो रतिया एसडीएम का रिश्तेदार है। करीब पौने घंटे तक जाम लगा रहने के बाद एसडीएम भारतभूषण कौशिक मौके पर पहुंचे। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मामले की जांच की जाएगी और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने जाम लगाकर बैठे लोगों के शिष्टमंडल को कार्यालय में आकर बातचीत करने को कहा। कार्यालय में एसडीएम ने आश्वासन दिया कि उनको एक दिन का समय दिया जाए, इस मामले की पूरी जांच की जाएगी। गलत हुआ है तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में उनके एक रिश्तेदार का नाम आने पर उन्होंने कहा कि उनका कोई रिश्तेदार नहीं है, वह पूरे मामले की जांच करेंगे और दूध का दूध और पानी का पानी कर देंगे।
विज्ञापन
वहीं, जब लोग जाम लगाकर बैठे थे तो एक निहंग तलवार लहराता वहां आ गया और जाम लगाकर बैठे लोगों को हटने के लिए कहने लगा। इससे एकबारगी लोगों में खलबली मच गई। मगर लोगों ने सूझबूझ से निहंग को काबू करके पुलिस के हवाले कर दिया।
विज्ञापन
वीरभान बंसल ने बताया कि उसने अपनी पत्नी राजरानी तथा उसकी चाची ने 10 कनाल जमीन गुरुदेव कौर व हरदेव सिंह से खरीदी थी। 6 कनाल 10 मरले भूमि जोगिंद्र सिंह व नछत्तर सिंह से 1997 में खरीदी थी। इस जमीन का इंतकाल भी उसकी पत्नी व चाची के नाम दर्ज हो चुका है। बाद में मलकीत सिंह के वारिसों ने उपरोक्त तबादले को दीवानी न्यायालय में 2004 में चैलेंज किया था। दीवानी न्यायालय ने वर्ष 2009 में परमजीत आदि के पक्ष में फैसला कर दिया। इसकी अपील सेशन कोर्ट ने 2012 में खारिज कर दी। सेशन कोर्ट में केस खारिज होने के बाद अब हाईकोर्ट ने यथास्थिति के आदेश दिए हुए हैं मगर 17 जुलाई को अंदर खाते एक ही दिन में रजिस्ट्री कर दी गई और उसका इंतकाल भी चढ़ा दिया गया। इस मौके पर अग्रवाल सभा अध्यक्ष अशोक गर्ग, व्यापार मंडल अध्यक्ष अमन जैन, शैलर एसोसिएशन अध्यक्ष सुरेश जिंदल, अमृतपाल काका, ओमप्रकाश खाई, दर्शनलाल, पाल कुमार, मदन सिंगला, सुखविंद्र गोयल, उमाकांत, पवन कुमार, सुशील कुमार, मदनलाल, डॉ. नरेश जिंदल, प्रवीण जग्गा सहित कई लोग उपस्थित रहे।