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सरकार के खिलाफ 23 को सड़क पर उतरेंगे जन संगठन
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जनसंगठनों की बैठक में प्रदर्शन की तैयारियों को लेकर चर्चा करते पदाधिकारी।
- फोटो : Fatehabad
केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों के विरोध में अखिल भारतीय किसान सभा, सीटू व खेत मजदूर यूनियन 23 जुलाई को तहसील व ब्लाक स्तर पर प्रदर्शन करेंगे। यह निर्णय शनिवार को शहीद ऊधम सिंह भवन में तीनों संगठनों की संयुक्त बैठक में लिया गया। बैठक कह अध्यक्षता जिला पार्षद रामचंद्र सहनाल, रामस्वरूप ढ़ाणी गोपाल व ओमप्रकाश अनेजा ने संयुक्त तौर पर की वहीं संचालन संयोजक जगतार सिंह ने किया। मीटिंग में विष्णुदत्त शर्मा, सुरेन्द्र गोरखपुर, मुकेश डूल्ट, गगनदीप कौर ने भी भाग लिया।
किसान सभा के राज्य महासचिव व खेत मजदूर यूनियन के राज्य महासचिव रामकुमार बहबलपुरिया ने कहा कि आगामी 23 जुलाई को तीनों जनसंगठनों द्वारा सरकार की जन विरोधी नीतियों के खिलाफ व कोरोना महामारी के चलते जनता की समस्याओं के समाधान के मुद्दों को लेकर देशभर में ब्लॉक व तहसील स्तर पर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार को कोरोना से निपटने के लिए सभी राजनीतिक पार्टियों व जन संगठनों का सहयोग लेकर इससे मुकाबला करना चाहिए था। लेकिन रेलवे, बिजली, बैंक, बीमा, जहाज, आयुध उद्योग, तेल, गैस, कोयला खदान आदि सभी क्षेत्रों का निजीकरण करके पूंजी पतियों को लाभ पहुंचाने का काम किया जा रहा है, उनके कर्जे माफ किए जा रहे हैं जबकि देश में बेरोजगारी पिछले 45 साल में शिखर पर पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि सरकार की जनविरोधी नीतियों का पर्दाफाश करने और जल समस्याओं के समाधान के लिए 23 जुलाई के विरोध प्रदर्शनों की तैयारी के लिए ब्लॉक व तहसील सत्र पर कन्वेंशनें की जाएगी तथा गांव-गांव में पूरी तैयारी के साथ आंदोलन होगा। मीटिंग में दिन प्रतिदिन बढ़ रही गुंडागर्दी, लूट, हत्याएं, फिरौती की घटनाओं पर रोक लगाने तथा दफ्तरों में फैले भ्रष्टाचार पर रोक लगाने का प्रस्ताव पास किया गया।
ये हैं प्रमुख मांगेें
1. सरकारी विभागों को बेचने पर रोक
2. तेल की बढ़ाई कीमतें वापस लेने
3. सभी गरीब लोगों को प्रतिमाह 6 महीने 10 किलो राशन और 7500 रुपये
4. किसान-मजदूरों को कर्जा मुक्त करके नया कर्जा देने
5. कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने
6. श्रम कानूनों में बदलाव वापिस लेने
7. मनरेगा 200 दिन व दिहाड़ी बढ़ाई जाए
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किसान सभा के राज्य महासचिव व खेत मजदूर यूनियन के राज्य महासचिव रामकुमार बहबलपुरिया ने कहा कि आगामी 23 जुलाई को तीनों जनसंगठनों द्वारा सरकार की जन विरोधी नीतियों के खिलाफ व कोरोना महामारी के चलते जनता की समस्याओं के समाधान के मुद्दों को लेकर देशभर में ब्लॉक व तहसील स्तर पर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार को कोरोना से निपटने के लिए सभी राजनीतिक पार्टियों व जन संगठनों का सहयोग लेकर इससे मुकाबला करना चाहिए था। लेकिन रेलवे, बिजली, बैंक, बीमा, जहाज, आयुध उद्योग, तेल, गैस, कोयला खदान आदि सभी क्षेत्रों का निजीकरण करके पूंजी पतियों को लाभ पहुंचाने का काम किया जा रहा है, उनके कर्जे माफ किए जा रहे हैं जबकि देश में बेरोजगारी पिछले 45 साल में शिखर पर पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि सरकार की जनविरोधी नीतियों का पर्दाफाश करने और जल समस्याओं के समाधान के लिए 23 जुलाई के विरोध प्रदर्शनों की तैयारी के लिए ब्लॉक व तहसील सत्र पर कन्वेंशनें की जाएगी तथा गांव-गांव में पूरी तैयारी के साथ आंदोलन होगा। मीटिंग में दिन प्रतिदिन बढ़ रही गुंडागर्दी, लूट, हत्याएं, फिरौती की घटनाओं पर रोक लगाने तथा दफ्तरों में फैले भ्रष्टाचार पर रोक लगाने का प्रस्ताव पास किया गया।
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ये हैं प्रमुख मांगेें
1. सरकारी विभागों को बेचने पर रोक
2. तेल की बढ़ाई कीमतें वापस लेने
3. सभी गरीब लोगों को प्रतिमाह 6 महीने 10 किलो राशन और 7500 रुपये
4. किसान-मजदूरों को कर्जा मुक्त करके नया कर्जा देने
5. कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने
6. श्रम कानूनों में बदलाव वापिस लेने
7. मनरेगा 200 दिन व दिहाड़ी बढ़ाई जाए