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इस बिल के विरोध में निजी चिकित्सकों ने की हड़ताल, मरीज हुए परेशान
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केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा में पारित किए नेशनल मेडिकल बिल एवं मेडिकल कौंसिल को भंग करने के विरोध में जिले के सभी निजी अस्पतालों में हड़ताल रखी। आईएमए के आह्वान पर की हड़ताल के चलते अस्पताल में निजी चिकित्सकों ने ओपीडी सेवाएं तो ठप रखी ही, साथ ही आपातकालीन सेवाएं भी बंद ही रही। निजी अस्पतालों में मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। निजी चिकित्सकों ने बुधवार रात आठ बजे से दोबारा उपचार शुरू कर दिया।
आईएमए ने एनएमसी बिल को बताया गरीब विरोधी : मंगलवार रात को आईएमए की बैठक आईएमए के प्रधान डॉ. पवन मेहता की अध्यक्षता में की गई । इस बारे में आईएमए प्रधान डॉ. पवन मेहता ने बताया कि मौजूदा केंद्र सरकार द्वारा पारित किया एनएमसी बिल अलोकतांत्रिक, गरीब विरोधी और निजी मेडिकल कॉलेज प्रबंधकों को लाभ पहुंचाने वाला है। इस एक्ट को पारित कर सरकार ने मेडिकल कॉलेज प्रबंधन कमेटी के सदस्यों को फीस निर्धारण करने का अधिकार दिया है। इस कारण कॉलेज प्रबंधन सीटों को लाखों रुपये में बेचने का काम करेगी तथा जरूरतमंद परिवार के प्रतिभावान विद्यार्थी दाखिला लेने से वंचित रह जाऐंगे। इससे सबसे बड़ा नुकसान ये होगा कि पैसे के दम पर लोग मेडिकल की सीट हासिल कर लेंगे। डॉ. मेहता ने कहा कि सरकार डॉक्टरों को सुरक्षा तो मुहैया करवा नहीं रही बल्कि इस प्रकार के एक्ट पारित कर डॉक्टर समुदाय को तंग करने का काम कर रही है।
एनएमसी बिल के प्रावधान, जिन पर आईएमए को सबसे अधिक ऐतराज
-मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को भंग करना
-मेडिकल कालेज प्रबंधन को 50 फीसदी सीटों पर फीस निर्धारण का हक देना
-एमबीबीएस के अंतिम वर्ष में प्राप्त अंक के आधार पर पीजी कोर्स में दाखिला
-चिकित्सकों और अस्पतालों की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कानून ना होना
-आरएमपी चिकित्सकों को छह माह के कोर्स के बाद ग्रामीण क्षेत्र का लाइसेंस जारी करना
अधिकतर अस्पतालों के गेट पर चस्पा नोटिस, खाली पड़ी रही ओपीडी।
मंगलवार रात ही आईएमए की बैठक में तय हो गया था कि बुधवार सुबह से चिकित्सक हड़ताल पर रहेंगे। इसके चलते बुधवार सुबह ही अधिकतर प्राइवेट अस्पतालों के गेट पर ही हड़ताल का नोटिस चस्पा कर दिया गया। इसके चलते ऐसे मरीज जिनको हड़ताल की सूचना नहीं मिल सकी, वो उपचार के लिए अस्पताल पहुंचे तो जरूर लेकिन हड़ताल होने के कारण उन्हें चिकित्सक नहीं मिले। इसके चलते कई मरीजों को पुरानी पर्ची के आधार पर ही दवाई लेकर जाना पड़ा।
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इलाज के लिए आए मरीजों का कहना
मंगलवार रात को कमर के पास थोड़ी दिक्कत महसूस हुई तो बुधवार सुबह ही उपचार के लिए पास के एक निजी अस्पताल में पहुंच गया। लेकिन वहां पहुंचते ही कर्मचारियों ने कहा कि आज हड़ताल है और डाक्टर साहब नहीं आएंगे। मजबूरी वश पेनकिलर खानी पड़ी। अब वीरवार को फिर अस्पताल जाऊंगा। -हैप्पी, निवासी फतेहाबाद ।
चिकित्सकों की लड़ाई सरकार के साथ है तो उन्हें संघर्ष का दूसरा रास्ता अपनाना चाहिए। इस तरह अचानक से हड़ताल पर जाने से किसी की जान पर भी बन सकती है। मुझे तेज बुखार था लेकिन केमिस्ट से पुरानी पर्ची के आधार पर दवाई लेनी पड़ी। - रामकुमार, निवासी मताना गांव।
किसी नए कानून के चलते अगर चिकित्सा का स्तर गिरता है तो इससे कहीं ना कहीं लोगों को भी समस्या होगी। सरकार को इस मामले में चिकित्सकों की राय के बाद ही कोई कदम उठाना चाहिए। दूसरा ऐसे अचानक हड़ताल करने से भी सिर्फ आम जनता ही प्रभावित होती है। चिकित्सकों को ऐसी अचानक हड़ताल से बचना चाहिए था। -खेमचंद, निवासी फतेहाबाद ।
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आईएमए ने एनएमसी बिल को बताया गरीब विरोधी : मंगलवार रात को आईएमए की बैठक आईएमए के प्रधान डॉ. पवन मेहता की अध्यक्षता में की गई । इस बारे में आईएमए प्रधान डॉ. पवन मेहता ने बताया कि मौजूदा केंद्र सरकार द्वारा पारित किया एनएमसी बिल अलोकतांत्रिक, गरीब विरोधी और निजी मेडिकल कॉलेज प्रबंधकों को लाभ पहुंचाने वाला है। इस एक्ट को पारित कर सरकार ने मेडिकल कॉलेज प्रबंधन कमेटी के सदस्यों को फीस निर्धारण करने का अधिकार दिया है। इस कारण कॉलेज प्रबंधन सीटों को लाखों रुपये में बेचने का काम करेगी तथा जरूरतमंद परिवार के प्रतिभावान विद्यार्थी दाखिला लेने से वंचित रह जाऐंगे। इससे सबसे बड़ा नुकसान ये होगा कि पैसे के दम पर लोग मेडिकल की सीट हासिल कर लेंगे। डॉ. मेहता ने कहा कि सरकार डॉक्टरों को सुरक्षा तो मुहैया करवा नहीं रही बल्कि इस प्रकार के एक्ट पारित कर डॉक्टर समुदाय को तंग करने का काम कर रही है।
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एनएमसी बिल के प्रावधान, जिन पर आईएमए को सबसे अधिक ऐतराज
-मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को भंग करना
-मेडिकल कालेज प्रबंधन को 50 फीसदी सीटों पर फीस निर्धारण का हक देना
-एमबीबीएस के अंतिम वर्ष में प्राप्त अंक के आधार पर पीजी कोर्स में दाखिला
-चिकित्सकों और अस्पतालों की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कानून ना होना
-आरएमपी चिकित्सकों को छह माह के कोर्स के बाद ग्रामीण क्षेत्र का लाइसेंस जारी करना
अधिकतर अस्पतालों के गेट पर चस्पा नोटिस, खाली पड़ी रही ओपीडी।
मंगलवार रात ही आईएमए की बैठक में तय हो गया था कि बुधवार सुबह से चिकित्सक हड़ताल पर रहेंगे। इसके चलते बुधवार सुबह ही अधिकतर प्राइवेट अस्पतालों के गेट पर ही हड़ताल का नोटिस चस्पा कर दिया गया। इसके चलते ऐसे मरीज जिनको हड़ताल की सूचना नहीं मिल सकी, वो उपचार के लिए अस्पताल पहुंचे तो जरूर लेकिन हड़ताल होने के कारण उन्हें चिकित्सक नहीं मिले। इसके चलते कई मरीजों को पुरानी पर्ची के आधार पर ही दवाई लेकर जाना पड़ा।
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इलाज के लिए आए मरीजों का कहना
मंगलवार रात को कमर के पास थोड़ी दिक्कत महसूस हुई तो बुधवार सुबह ही उपचार के लिए पास के एक निजी अस्पताल में पहुंच गया। लेकिन वहां पहुंचते ही कर्मचारियों ने कहा कि आज हड़ताल है और डाक्टर साहब नहीं आएंगे। मजबूरी वश पेनकिलर खानी पड़ी। अब वीरवार को फिर अस्पताल जाऊंगा। -हैप्पी, निवासी फतेहाबाद ।
चिकित्सकों की लड़ाई सरकार के साथ है तो उन्हें संघर्ष का दूसरा रास्ता अपनाना चाहिए। इस तरह अचानक से हड़ताल पर जाने से किसी की जान पर भी बन सकती है। मुझे तेज बुखार था लेकिन केमिस्ट से पुरानी पर्ची के आधार पर दवाई लेनी पड़ी। - रामकुमार, निवासी मताना गांव।
किसी नए कानून के चलते अगर चिकित्सा का स्तर गिरता है तो इससे कहीं ना कहीं लोगों को भी समस्या होगी। सरकार को इस मामले में चिकित्सकों की राय के बाद ही कोई कदम उठाना चाहिए। दूसरा ऐसे अचानक हड़ताल करने से भी सिर्फ आम जनता ही प्रभावित होती है। चिकित्सकों को ऐसी अचानक हड़ताल से बचना चाहिए था। -खेमचंद, निवासी फतेहाबाद ।