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Fatehabad News: किसानों से पराली खरीदकर पर्यावरण प्रहरी बने प्रवीण
Sat, 25 Oct 2025 11:38 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sat, 25 Oct 2025 11:38 PM IST
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पराली का किया गया स्टॉक। संवाद
टोहाना। चंडीगढ़ रोड स्थित चौधरी सॉल्वेक्स प्लांट में हर वर्ष हजारों क्विंटल धान से निकलने वाली पराली की खरीद की जा रही है ताकि किसान पराली को आग न लगाएं। इस प्लांट में पराली को बॉयलर में जलाकर प्रबंधन किया जा रहा है। प्लांट में चावल से तेल निकालने के लिए पिछले पांच साल से पराली की खरीद की जा रही है जिसे बॉयलर के प्रयोग में लाया जा रहा है।
प्लांट में पिछले पांच साल में दो लाख क्विंटल पराली की खरीद की जा चुकी है। प्लांट के प्रबंधक प्रवीण चौधरी ने बताया कि पहले साल 5 हजार क्विंटल, दूसरे साल 25 हजार क्विंटल, पिछले साल 40 हजार क्विंटल पराली की खरीद की थी। इसे अब बढ़ाकर 50 हजार क्विंटल तक करने का लक्ष्य रखा हुआ है। पराली जलाने के अलग से मशीनें लगाई गई हैं जिसकी लागत करीब 30 लाख रुपये है। प्रवीण ने प्रदेश सरकार से मांग रखी है कि ऐसे प्रोजेक्ट को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी मिलनी चाहिए ताकि अन्य प्लांट धारक भी इस दिशा में कार्य कर सकें। उन्होंने बताया कि उनकी चिमनी करीब 110 फुट पर लगी हुई है। पराली की राख को लोग जमीन में भरत के लिए ले जाते हैं।
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सरकार मदद करे तो जड़ से समाप्त होगी समस्या
प्रवीण चौधरी ने कहा कि धान से निकलने वाली पराली सरकार के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। क्योंकि पराली में आग लगने से जहां पर्यावरण दूषित हो रहा है, वही मिट्टी की उर्वरक क्षमता कम होती है। यदि सरकार हमारी तरह पराली खरीदने वाले प्लांट धारकों की मदद करे तो अन्य करीबन उद्योगपति भी इससे प्रेरणा लेंगे। सरकार किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए मशीनें उपलब्ध करवाने में आर्थिक सहयोग के साथ अनुदान राशि भी देती है लेकिन व्यापारी को मदद नहीं की जाती है। उन्होंने कहा कि वे करीब पांच साल से पराली की खरीद कर रहे हैं लेकिन उन्हें सरकार से आर्थिक मदद नहीं मिली है।
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पराली जलने का रहता है रिस्क, सरकार को ध्यान देना चाहिए
प्रवीण चौधरी ने बताया कि पराली को एक साल के लिए स्टॉक करना पड़ता है। पराली ज्वलनशील होने के चलते इसमें हर समय आग लगने का खतरा बने रहता है। उन्हें स्वयं अपने खर्चे पर बीमा करवाना पड़ता है। सरकार को इसके लिए भी प्रीमियम में सहयोग का प्रावधान करना चाहिए।
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ऐसे उद्योग से लोगों को मिल रहा रोजगार
प्रवीण ने बताया कि इस प्लांट को लगाने के लिए अलग से सुपरवाइजर एवं कर्मचारियों को तैनात किया गया है जो पराली प्रबंधन की देखरेख करते हैं। पराली को कन्वेयर के माध्यम से भट्टी तक ले जाया जाता है जिसके बाद पराली की राख अलग हो जाती है। भाप से चावल का तेल निकाला जाता है। क्षेत्र में करीब 70 ऐसे उद्योग हैं। यदि सरकार मदद करे तो सभी व्यापारी पराली की खरीद करेंगे। इससे क्षेत्र के हर गांव की पराली यहीं बिक जाएगी और आग लगाने की समस्या समाप्त हो जाएगी। इससे लोगों को रोजगार भी मिल रहा है।
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चौधरी सॉल्वेक्स प्लांट पराली की खरीद करके किसानों को आग न लगाने बारे जागरूक करने के साथ-साथ उन्हें आर्थिक लाभ पहुंचा रही है। यह सराहनीय कार्य है।
-आकाश शर्मा, एसडीएम, टोहाना।
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प्लांट में पिछले पांच साल में दो लाख क्विंटल पराली की खरीद की जा चुकी है। प्लांट के प्रबंधक प्रवीण चौधरी ने बताया कि पहले साल 5 हजार क्विंटल, दूसरे साल 25 हजार क्विंटल, पिछले साल 40 हजार क्विंटल पराली की खरीद की थी। इसे अब बढ़ाकर 50 हजार क्विंटल तक करने का लक्ष्य रखा हुआ है। पराली जलाने के अलग से मशीनें लगाई गई हैं जिसकी लागत करीब 30 लाख रुपये है। प्रवीण ने प्रदेश सरकार से मांग रखी है कि ऐसे प्रोजेक्ट को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी मिलनी चाहिए ताकि अन्य प्लांट धारक भी इस दिशा में कार्य कर सकें। उन्होंने बताया कि उनकी चिमनी करीब 110 फुट पर लगी हुई है। पराली की राख को लोग जमीन में भरत के लिए ले जाते हैं।
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सरकार मदद करे तो जड़ से समाप्त होगी समस्या
प्रवीण चौधरी ने कहा कि धान से निकलने वाली पराली सरकार के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। क्योंकि पराली में आग लगने से जहां पर्यावरण दूषित हो रहा है, वही मिट्टी की उर्वरक क्षमता कम होती है। यदि सरकार हमारी तरह पराली खरीदने वाले प्लांट धारकों की मदद करे तो अन्य करीबन उद्योगपति भी इससे प्रेरणा लेंगे। सरकार किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए मशीनें उपलब्ध करवाने में आर्थिक सहयोग के साथ अनुदान राशि भी देती है लेकिन व्यापारी को मदद नहीं की जाती है। उन्होंने कहा कि वे करीब पांच साल से पराली की खरीद कर रहे हैं लेकिन उन्हें सरकार से आर्थिक मदद नहीं मिली है।
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पराली जलने का रहता है रिस्क, सरकार को ध्यान देना चाहिए
प्रवीण चौधरी ने बताया कि पराली को एक साल के लिए स्टॉक करना पड़ता है। पराली ज्वलनशील होने के चलते इसमें हर समय आग लगने का खतरा बने रहता है। उन्हें स्वयं अपने खर्चे पर बीमा करवाना पड़ता है। सरकार को इसके लिए भी प्रीमियम में सहयोग का प्रावधान करना चाहिए।
ऐसे उद्योग से लोगों को मिल रहा रोजगार
प्रवीण ने बताया कि इस प्लांट को लगाने के लिए अलग से सुपरवाइजर एवं कर्मचारियों को तैनात किया गया है जो पराली प्रबंधन की देखरेख करते हैं। पराली को कन्वेयर के माध्यम से भट्टी तक ले जाया जाता है जिसके बाद पराली की राख अलग हो जाती है। भाप से चावल का तेल निकाला जाता है। क्षेत्र में करीब 70 ऐसे उद्योग हैं। यदि सरकार मदद करे तो सभी व्यापारी पराली की खरीद करेंगे। इससे क्षेत्र के हर गांव की पराली यहीं बिक जाएगी और आग लगाने की समस्या समाप्त हो जाएगी। इससे लोगों को रोजगार भी मिल रहा है।
चौधरी सॉल्वेक्स प्लांट पराली की खरीद करके किसानों को आग न लगाने बारे जागरूक करने के साथ-साथ उन्हें आर्थिक लाभ पहुंचा रही है। यह सराहनीय कार्य है।
-आकाश शर्मा, एसडीएम, टोहाना।