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Fatehabad News: राजनीति की भेंट चढ़े पार्क, संस्थाओं के विरोध बाद डीएमसी ने रद्द किया ठेका, पपीहा और हुडा के पार्कों में शुरू हो चुका था काम
Tue, 06 Aug 2024 03:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Tue, 06 Aug 2024 03:36 AM IST
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फतेहाबाद में पार्को को बाहर की संस्थाओं को गोद दिए जाने के विरोध में एडीसी को शिकायत देकर आते
फतेहाबाद। नगर परिषद ने शहर के पार्कों और ग्रीन बेल्ट को ढाई माह बाद शुक्रवार को ही दो साल के लिए संस्थाओं को गोद दिया था लेकिन सोमवार को विरोध के चलते जिला नगर आयुक्त संजय बिश्नोई ने ठेके को रद्द कर दिया। पार्क गोद लेने के बाद पपीहा पार्क और हुडा सेक्टर के पार्कों की सफाई का संस्थाओं ने काम भी शुरू कर दिया था।
नगर परिषद प्रधान राजेंद्र सिंह खिंची का कहना है कि पार्क पहले भी स्थानीय संस्थाओं को गोद दिए गए थे लेकिन लगातार शिकायतें आती थीं और न ही संसाधन इनके पास थे। इसके चलते ही अनुभव वाली संस्थाओं को पार्क गोद दिए गए थे। वहीं पार्कों को लेकर राजनीति भी शुरू हो गई है। बताया जा रहा है कि इस मामले में राजनीतिक हस्तक्षेप भी हुआ है।
प्रधान पर लगाए गोलमाल करने के आरोप
सामाजिक कार्यकर्ता हरदीप सिंह के नेतृत्व में संस्थाओं का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को लघु सचिवालय में एडीसी राहुल मोदी से मिला। इस दौरान पार्क गोद दिए जाने के नियम के बारे में जानकारी प्रदान की। नप के अधिकारियों व प्रधान पर इस बार पार्क गोद दिए जाने के मामले में बड़ा गोलमाल किए जाने के आरोप भी जड़े। एडीसी राहुल मोदी ने तुरंत प्रभाव से जांच के आदेश दिए। साथ ही आरोपी अधिकारियों को भी लिखित में जवाब-तलब किया। लेकिन देर शाम को जिला नगर आयुक्त ने ठेका रद्द के आदेश जारी कर दिए।
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20 संस्थाओं ने पार्क गोद लेने के लिए किया था आवेदन
जिंदगी संस्था के अध्यक्ष हरदीप सिंह ने बताया कि नगर परिषद फतेहाबाद ने गुपचुप तरीके से शहर के करीब 20 प्रमुख पार्क झज्जर, रोहतक व सिरसा और हिसार की संस्थाओं को गोद दे दिए। इन पार्कों के रखरखाव के लिए इन संस्थाओं को लाखों रुपये का बजट भी नगर परिषद की तरफ से प्रति माह दिया जाएगा। दूसरे जिले की संस्थाओं को पार्क गोद दिए जाने की भनक शहर की विभिन्न संस्थाओं को लगी तो उनमें भारी रोष पनप गया। शहर की करीब 20 संस्थाओं ने पार्क गोद लेने के लिए आवेदन किया था। लेकिन इस बार नगर परिषद ने बिना किसी संस्था पदाधिकारी व पार्षदों को शामिल किए गुपचुप तरीके से दूसरे जिले की दो संस्थाओं को ही करीब 20 बड़े मुख्य पार्क गोद दे दिए।
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पार्षदों ने साधी चुप्पी
मामले को लेकर पार्षद चुप हैं। कोई भी पार्षद खुलकर सामने नहीं आया है। हालांकि कई पार्षदों का कहना है कि उन्हें इस बारे में जानकारी ही नहीं है। पार्षद रवि मेहता, चंद्रभान वधवा, निलांशी शर्मा का कहना है कि बिना सदन की जानकारी में लाए दूसरे जिले की संस्थाओं को पार्क गोद दे दिए।
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ये पार्क इन संस्थाओं को दिए थे गोद
पार्क संस्था
रानी लक्ष्मीबाई पार्क रानी लक्ष्मीबाई पार्क सोसायटी
शिवपुरी पार्क श्मशान भूमि सुधार सभा
एमसी कॉलोनी पार्क श्मशान भूमि सुधार सभा
पंडित दिनदयाल उपाध्याय पार्क दि प्रोगेसिव वेल्फेयर सोसायटी जगजीवनपुरा
संदूजा अस्पताल के सामने पार्क क्षेत्रीय राजपूत महासभा
अरोड़ा वैष्णो भोजनालय के सामने पार्क क्षेत्रीय राजपूत महासभा
डॉ. आंबेडकर पार्क डॉ.भीमराव आंबेडकर सभा
टैक्सी स्टैंड पार्क नीलकंठ महादेव मंदिर सोसायटी
उमेश अल्ट्रासाउंड के सामने पार्क दि भिरड़ाना कोऑपरेटिव सोसायटी
पपीहा पार्क व मॉडल टाउन के पार्क - ग्रामीण उत्थान समिति
हुडा सेक्टर तीन के पार्क व ग्रीन बेल्ट - जनकल्याण फाउंडेशन
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नगर परिषद करती है भुगतान
नगर परिषद पार्क व ग्रीन बेल्ट को आरडब्ल्यूए और एनजीओ को गोद देती है। इसको लेकर इन संस्थाओं को 4.20 रुपये प्रति स्कवेयर मीटर के हिसाब से भुगतान करती है।
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पार्कों को उन्हीं संस्थाओं को गोद दिया गया है जिनके पास अनुभव है और संसाधन है। पिछले साल पार्क गोद दिए गए थे, कई संस्थाएं रुपये ले जाती रही लेकिन काम नहीं किया गया।
- राजेंद्र सिंह खिंची, प्रधान नगर परिषद
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पार्कों व ग्रीन बेल्ट को संस्थाओं को गोद दिया था लेकिन किन्हीं कारणों से रद्द कर दिया गया है।
- संजय बिश्नोई, जिला नगर आयुक्त
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नगर परिषद प्रधान राजेंद्र सिंह खिंची का कहना है कि पार्क पहले भी स्थानीय संस्थाओं को गोद दिए गए थे लेकिन लगातार शिकायतें आती थीं और न ही संसाधन इनके पास थे। इसके चलते ही अनुभव वाली संस्थाओं को पार्क गोद दिए गए थे। वहीं पार्कों को लेकर राजनीति भी शुरू हो गई है। बताया जा रहा है कि इस मामले में राजनीतिक हस्तक्षेप भी हुआ है।
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प्रधान पर लगाए गोलमाल करने के आरोप
सामाजिक कार्यकर्ता हरदीप सिंह के नेतृत्व में संस्थाओं का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को लघु सचिवालय में एडीसी राहुल मोदी से मिला। इस दौरान पार्क गोद दिए जाने के नियम के बारे में जानकारी प्रदान की। नप के अधिकारियों व प्रधान पर इस बार पार्क गोद दिए जाने के मामले में बड़ा गोलमाल किए जाने के आरोप भी जड़े। एडीसी राहुल मोदी ने तुरंत प्रभाव से जांच के आदेश दिए। साथ ही आरोपी अधिकारियों को भी लिखित में जवाब-तलब किया। लेकिन देर शाम को जिला नगर आयुक्त ने ठेका रद्द के आदेश जारी कर दिए।
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20 संस्थाओं ने पार्क गोद लेने के लिए किया था आवेदन
जिंदगी संस्था के अध्यक्ष हरदीप सिंह ने बताया कि नगर परिषद फतेहाबाद ने गुपचुप तरीके से शहर के करीब 20 प्रमुख पार्क झज्जर, रोहतक व सिरसा और हिसार की संस्थाओं को गोद दे दिए। इन पार्कों के रखरखाव के लिए इन संस्थाओं को लाखों रुपये का बजट भी नगर परिषद की तरफ से प्रति माह दिया जाएगा। दूसरे जिले की संस्थाओं को पार्क गोद दिए जाने की भनक शहर की विभिन्न संस्थाओं को लगी तो उनमें भारी रोष पनप गया। शहर की करीब 20 संस्थाओं ने पार्क गोद लेने के लिए आवेदन किया था। लेकिन इस बार नगर परिषद ने बिना किसी संस्था पदाधिकारी व पार्षदों को शामिल किए गुपचुप तरीके से दूसरे जिले की दो संस्थाओं को ही करीब 20 बड़े मुख्य पार्क गोद दे दिए।
पार्षदों ने साधी चुप्पी
मामले को लेकर पार्षद चुप हैं। कोई भी पार्षद खुलकर सामने नहीं आया है। हालांकि कई पार्षदों का कहना है कि उन्हें इस बारे में जानकारी ही नहीं है। पार्षद रवि मेहता, चंद्रभान वधवा, निलांशी शर्मा का कहना है कि बिना सदन की जानकारी में लाए दूसरे जिले की संस्थाओं को पार्क गोद दे दिए।
ये पार्क इन संस्थाओं को दिए थे गोद
पार्क संस्था
रानी लक्ष्मीबाई पार्क रानी लक्ष्मीबाई पार्क सोसायटी
शिवपुरी पार्क श्मशान भूमि सुधार सभा
एमसी कॉलोनी पार्क श्मशान भूमि सुधार सभा
पंडित दिनदयाल उपाध्याय पार्क दि प्रोगेसिव वेल्फेयर सोसायटी जगजीवनपुरा
संदूजा अस्पताल के सामने पार्क क्षेत्रीय राजपूत महासभा
अरोड़ा वैष्णो भोजनालय के सामने पार्क क्षेत्रीय राजपूत महासभा
डॉ. आंबेडकर पार्क डॉ.भीमराव आंबेडकर सभा
टैक्सी स्टैंड पार्क नीलकंठ महादेव मंदिर सोसायटी
उमेश अल्ट्रासाउंड के सामने पार्क दि भिरड़ाना कोऑपरेटिव सोसायटी
पपीहा पार्क व मॉडल टाउन के पार्क - ग्रामीण उत्थान समिति
हुडा सेक्टर तीन के पार्क व ग्रीन बेल्ट - जनकल्याण फाउंडेशन
नगर परिषद करती है भुगतान
नगर परिषद पार्क व ग्रीन बेल्ट को आरडब्ल्यूए और एनजीओ को गोद देती है। इसको लेकर इन संस्थाओं को 4.20 रुपये प्रति स्कवेयर मीटर के हिसाब से भुगतान करती है।
पार्कों को उन्हीं संस्थाओं को गोद दिया गया है जिनके पास अनुभव है और संसाधन है। पिछले साल पार्क गोद दिए गए थे, कई संस्थाएं रुपये ले जाती रही लेकिन काम नहीं किया गया।
- राजेंद्र सिंह खिंची, प्रधान नगर परिषद
पार्कों व ग्रीन बेल्ट को संस्थाओं को गोद दिया था लेकिन किन्हीं कारणों से रद्द कर दिया गया है।
- संजय बिश्नोई, जिला नगर आयुक्त