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Fatehabad News: पार्क फिर हुए बेसहारा, हटाए कर्मचारी, प्रशासन 15 दिन बाद भी नहीं कर पाया गोद देने का फैसला

Tue, 05 Nov 2024 03:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Tue, 05 Nov 2024 03:01 AM IST
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Park became destitute again
फतेहाबाद। शहर के पार्कों को संस्थाओं को गोद देने को लेकर नगर परिषद प्रशासन 15 दिन बाद भी कोई फैसला नहीं कर पाया है। यहां तक नगर परिषद ने दो माह के लिए अनुबंध पर पार्कों में 20 कर्मचारी लगाए थे इनका कार्यकाल खत्म होने के चलते हटा दिया गया है।
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ऐसे में पार्क एक बार फिर से बेसहारा हो गया है। ये कर्मचारी पिछले दो माह से इन पार्कों की साफ-सफाई कर रहे थे। हालात ये है कि पार्क गोद लेने के लिए 23 संस्थाएं आगे आ चुकी हैं लेकिन इसको को लेकर राजनीति जारी है। नगर परिषद हाउस में सहमति नहीं बन रही है। प्रधान राजेंद्र सिंह खिंची श्मशान भूमि सुधार सभा को पार्क गोद देने की अनुशंसा कर चुके हैं।
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वहीं कई पार्षद मांग कर रहे है कि उनकी राय के बाद ही पार्कों को गोद दिया जाए। दूसरी तरफ उपप्रधान सविता टुटेजा का कहना है कि संस्थाओं की सूची उपायुक्त को भेजी जा चुकी है। हालात ये है कि मॉडल टाउन और हुडा सेक्टर तीन में सबसे ज्यादा पार्क और ग्रीन बेल्ट है। पर इन्ही की सही तरीके से संभाल नहीं हो पा रही है।
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- जुलाई में गोद दिए थे पार्क, फिर करना पड़ा था रद्द
नगर परिषद द्वारा पिछले साल भी पार्कों को गोद दिया गया था। अप्रैल माह में इनका कार्यकाल खत्म हो गया। इसके बाद जुलाई माह में दोबारा से इन पार्कों को गोद दिया गया, लेकिन दूसरे जिले की संस्थाओं को मुख्य पार्क गोद देने पर स्थानीय संस्थाओं ने विरोध कर दिया था। इस वजह से नगर परिषद ने ठेका रद्द कर दिया और दो माह के लिए अनुबंध पर 20 कर्मचारी रखे थे।
- पार्क गोद लेने के लिए ये संस्थाएं कर चुकी हैं आवेदन
- पुनीता भारतीय मानव अधिकार एसोसिएशन
- डॉ. भीमराव आंबेडकर सभा
- दि बनावाली आदर्श कॉपरेटिव लेबर एवं कंस्ट्रक्शन सोसायटी
- रजत सिंह, फतेहाबाद
- क्षेत्रीय राजपूत महासभा फतेहाबाद
- मां पाथरी सेवा ट्रस्ट
- भगवान वाल्मीकि आश्रम सेवा ट्रस्ट
- संत सज्जन चैरिटेबल ट्रस्ट
- राष्ट्रीय जनकल्याण मंच
- रानी लक्ष्मीबाई पार्क सोसायटी
- दि एपी कॉपरेटिव लेबर एवं कंस्ट्रक्शन
- दि भट्टूकलां लक्ष्मी कॉपरेटिव लेबर एवं कंस्ट्रक्शन सोसायटी
- जिंदगी वेल्फेयर सोयायटी फतेहाबाद
- पवन शर्मा मेमोरियल ट्रस्ट
- नवकल्याण संस्था
- कॉपरेटिव लेबर एवं कंस्ट्रक्शन सोसायटी
- श्री श्मशान भूमि सुधार सभा
- हिंद्र कॉपरेटिव लेबर एवं कंस्ट्रक्शन सोसायटी
- पंख फाउंडेशन
- प्रोग्रेसिव प्रेसिडेंट वेल्फेयर एसोसिएशन जगजीवनपुरा
- सेक्टर तीन रेजिडेंट वेलफेयर सोसायटी
- जीव सेवा जीवन सेवा समिति चेरिटेबल ट्रस्ट
- सुखदेव बंसल, फतेहाबाद
- मॉडल टाउन में बड़े पार्क
शहर के मॉडल टाउन में करीब 10 और हुडा सेक्टर तीन में 8 पार्क है। जो कि बड़े पार्कों में शामिल है। पार्क गोद लेकर साफ-सफाई और देखरेख करने वाली संस्था या आरडब्ल्यूए को नगर परिषद चार रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से भुगतान करता है। शहर में रानी लक्ष्मीबाई पार्क, शिवपुरी पार्क, एमसी कॉलोनी पार्क, पंडित दीनदयाल उपाध्याय पार्क, मॉडल टाउन में पपीहा समेत 10 पार्क, ग्रीन बेल्ट, एचएसवीपी सेक्टर तीन में पार्क, कन्हैया पार्क लघु सचिवालय, डॉ. भीमराव आंबेडकर पार्क, अरोड़ा होटल के सामने, संदूजा अस्पताल के सामने, टैक्सी स्टैंड पार्क आदि शामिल हैं।
- एचएसवीपी सेक्टर में आठ पार्क और ग्रीन बेल्ट है, लेकिन इनकी संभाल नहीं हो पा रही है। नगर परिषद जल्द से जल्द इन पार्कों को आरडब्ल्यूए को गोद दे ताकि इन्हें साफ-सुधरा रखा जा सके। आरडब्ल्यूए पार्कों की अच्छे से संभाल कर सकती है। इसको लेकर मंगलवार को कार्यकारी अभियंता से मिला जाएगा। - ज्योति मेहता, पार्षद, वार्ड 10
- पार्कों को संस्थाओं को गोद देने की प्रक्रिया को जानबूझकर लटकाया जा रहा है। विधायक बयान दे रहे हैं कि पार्क गोद लेने के लिए कई ठेकेदार किस्म के लोग संस्था रजिस्टर्ड करवाकर ठेके पर लेंगे। विधायक सभी संस्थाओं को एक बराबर न समझें। कई संस्थाएं ऐसी हैं जो निस्वार्थ पार्क गोद लेकर उसे साफ-सुधरा रखना चाहती हैं।
- हरदीप सिंह, अध्यक्ष, जिंदगी संस्था
- उपायुक्त को पार्कों की सूची भेज दी गई थी। इसके बाद त्योहारों की छुट्टियों होने के कारण प्रक्रिया रुक गई है। मंगलवार को इस संबंध में जानकारी ली जाएगी।

- सविता टुटेजा, उपप्रधान, नगर परिषद, फतेहाबाद।
- पार्कों को श्मशान भूमि सुधार सभा को गोद देने की सिफारिश की जा चुकी है। क्योंकि उनके पास संसाधन और कर्मचारी हैं। अधिकारियों से मंगलवार को रिपोर्ट ली जाएगी और पूछा जाएगा कि गोद देने की प्रक्रिया में देरी क्यों हो रही है।
- राजेंद्र सिंह खिंची, प्रधान, नगर परिषद, फतेहाबाद।
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