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Fatehabad News: नशे के खिलाफ पंचायतों का दृढ़ संकल्प
Thu, 11 Jun 2026 12:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Thu, 11 Jun 2026 12:22 AM IST
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पत्रकारों से बातचीत करते सरपंच एसोसिएशन प्रदेशाध्यक्ष रणबीर गिल। संवाद
टोहाना। हरियाणा सरपंच एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष और समैन गांव के रणबीर गिल ने मुख्यमंत्री के नशा विरोधी अभियान को लेकर कहा कि नशे को जड़ से खत्म करना है तो सबसे पहले गली-गली में चल रहे अवैध शराब के खुर्दे बंद करने होंगे। बुधवार को अपने कार्यालय में प्रेस वार्ता में गिल ने कहा कि मुख्यमंत्री ने प्रदेश की पंचायतों को संबोधित कर नशे के खिलाफ सहयोग मांगा था। पंचायत सरकार के इस कदम के साथ हैं।
गिल ने कहा कि मुख्यमंत्री का यह निर्णय आने वाली पीढ़ी को बचाने वाला है। पंजाब के बाद अब हरियाणा का कोई गांव-शहर नशे से बचा नहीं है। 18-19 साल के बच्चे टीके लगाकर मर रहे हैं, घर खाली हो रहे हैं। रणबीर गिल ने दावा किया कि प्रदेश के करीब 7,000 गांवों में औसतन हर गांव में 10 लोग नशीले पदार्थ का कारोबार करते हैं। शहरों की गली-गली में शराब के खुर्दे खुले हैं। लगभग 2 लाख लोग इस काम से जुड़े हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदार मुनाफे के लिए गली-गली खुर्दे खुलवाते हैं। इन खुर्दों का कोई लाइसेंस नहीं। शराब की आड़ में चिट्टा, स्मैक, इंजेक्शन और नशीली दवाएं बेची जाती हैं। नशेड़ी घर के बर्तन तक गिरवी रख देते हैं।
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पंचायतों को सूची बनाने का अधिकार दें
गिल ने सरकार से मांग की कि हर पंचायत और वार्ड के पार्षद को पत्र भेजकर कहा जाए कि वे अपने क्षेत्र में नशे के कारोबारियों और अवैध खुर्दों की सूची बनाकर सरकार को दें। ग्राउंड लेवल पर पंचायतों और पार्षद को सबसे ज्यादा पता होता है कि नशीला पदार्थ कहां बिक रहा है। उन्होंने कहा कि पंचायतें शिकायत करती हैं पर रेड के समय शराब न मिलने पर कार्रवाई नहीं होती। सरकार ऐसा कानून बनाए कि चिन्हित कारोबारियों को नशा न मिलने पर भी 2-4 दिन हिरासत में रखा जाए। सूचना देने के लिए टोल फ्री नंबर जारी करने की मांग भी की गई।
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समाज को बचाना है तो साथ छोड़ना होगा
रणबीर गिल ने बताया कि उनकी पंचायत बनने के बाद गांव समैन में न अवैध ठेका चलने दिया न अवैध खुर्दा। पंचायत ने तय किया है कि नशा बेचने वाले या चोरी करने वाले की जमानत नहीं कराएगी। उन्होंने अन्य पंचायतों से भी अपील की कि समाज को बचाना है तो नशे के सौदागरों का साथ छोड़ना होगा। गिल के मुताबिक अगर अवैध खुर्दे बंद हो जाएं तो 70 फीसदी नशे पर काबू पाया जा सकता है। जो लोग जहर परोसते हैं, चुनाव में शराब बांटकर गलत लोगों को वोट दिलवाते हैं उनसे वोट का अधिकार छीन लेना चाहिए।
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गिल ने कहा कि मुख्यमंत्री का यह निर्णय आने वाली पीढ़ी को बचाने वाला है। पंजाब के बाद अब हरियाणा का कोई गांव-शहर नशे से बचा नहीं है। 18-19 साल के बच्चे टीके लगाकर मर रहे हैं, घर खाली हो रहे हैं। रणबीर गिल ने दावा किया कि प्रदेश के करीब 7,000 गांवों में औसतन हर गांव में 10 लोग नशीले पदार्थ का कारोबार करते हैं। शहरों की गली-गली में शराब के खुर्दे खुले हैं। लगभग 2 लाख लोग इस काम से जुड़े हैं।
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उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदार मुनाफे के लिए गली-गली खुर्दे खुलवाते हैं। इन खुर्दों का कोई लाइसेंस नहीं। शराब की आड़ में चिट्टा, स्मैक, इंजेक्शन और नशीली दवाएं बेची जाती हैं। नशेड़ी घर के बर्तन तक गिरवी रख देते हैं।
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पंचायतों को सूची बनाने का अधिकार दें
गिल ने सरकार से मांग की कि हर पंचायत और वार्ड के पार्षद को पत्र भेजकर कहा जाए कि वे अपने क्षेत्र में नशे के कारोबारियों और अवैध खुर्दों की सूची बनाकर सरकार को दें। ग्राउंड लेवल पर पंचायतों और पार्षद को सबसे ज्यादा पता होता है कि नशीला पदार्थ कहां बिक रहा है। उन्होंने कहा कि पंचायतें शिकायत करती हैं पर रेड के समय शराब न मिलने पर कार्रवाई नहीं होती। सरकार ऐसा कानून बनाए कि चिन्हित कारोबारियों को नशा न मिलने पर भी 2-4 दिन हिरासत में रखा जाए। सूचना देने के लिए टोल फ्री नंबर जारी करने की मांग भी की गई।
समाज को बचाना है तो साथ छोड़ना होगा
रणबीर गिल ने बताया कि उनकी पंचायत बनने के बाद गांव समैन में न अवैध ठेका चलने दिया न अवैध खुर्दा। पंचायत ने तय किया है कि नशा बेचने वाले या चोरी करने वाले की जमानत नहीं कराएगी। उन्होंने अन्य पंचायतों से भी अपील की कि समाज को बचाना है तो नशे के सौदागरों का साथ छोड़ना होगा। गिल के मुताबिक अगर अवैध खुर्दे बंद हो जाएं तो 70 फीसदी नशे पर काबू पाया जा सकता है। जो लोग जहर परोसते हैं, चुनाव में शराब बांटकर गलत लोगों को वोट दिलवाते हैं उनसे वोट का अधिकार छीन लेना चाहिए।