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फतेहाबाद: पंचायत मंत्री देवेंद्र बबली बोले-मैं राजनीति के लायक नहीं, ठोका दावा-अगला चुनाव टोहाना से ही लड़ूंगा
Thu, 14 Sep 2023 12:46 PM IST
निवेदिता वर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद (हरियाणा)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 14 Sep 2023 12:46 PM IST
सार
फतेहाबाद में मीडिया से बातचीत में बबली ने दावा किया कि वे हर हाल में आगामी विधानसभा चुनाव टोहाना से लड़ेंगे। अभी जेजेपी व भाजपा गठबंधन में है। टिकट को लेकर दोनों दलों की लीडरशिप तय कर लेगी। बबली ने कहा कि उन्हें खुशी है कि इतिहास में उनका भी नाम होगा कि वे विधायक बने, मंत्री बने और प्रदेश के विकास में अहम योगदान दिया।
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पंचायत मंत्री देवेंद्र बबली।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
विस्तार
हरियाणा के विकास एवं पंचायत मंत्री देवेंद्र सिंह बबली का कहना है कि वह राजनीति के लायक नहीं है। उन्हें नहीं पता था कि राजनीति ऐसी होती है। राजनीति में झूठ बोलना, ठगी करने का लोग काम करते हैं। उनकी भावना सिर्फ समाज की सेवा की रही है। साल 1997 से 2007 तक उन्होंने व्यवसाय को आगे बढ़ाकर परिवार को खुशहाल बनाया। फिर 2007 से समाजसेवा के साथ-साथ राजनीति में आए। आज उन्हें खुशी है कि इतिहास में उनका भी नाम होगा कि वे विधायक बने, मंत्री बने और प्रदेश के विकास में अहम योगदान दिया।
फतेहाबाद में मीडिया से बातचीत में बबली ने दावा किया कि वे हर हाल में आगामी विधानसभा चुनाव टोहाना से लड़ेंगे। अभी जेजेपी व भाजपा गठबंधन में है। टिकट को लेकर दोनों दलों की लीडरशिप तय कर लेगी। उन्होंने मुख्यमंत्री मनोहर लाल से नजदीकी के सवाल पर कहा कि मुख्यमंत्री को ईमानदार व काम करने वाला सहयोगी कैबिनेट में मिला है।
टोहाना के पूर्व मंत्री का परिवार था अंग्रेजों का गुलाम
बबली ने कहा कि पहले कांग्रेस की टिकट के लिफाफे पर एक ही परिवार का नाम जाता था, वो ऐसा परिवार था जो टोहाना ही नहीं देश का गद्दार था। कांग्रेस में और भी बहुत से युवा लोग आए हैं, पार्टी उन्हें मौका क्यों नहीं देती। क्या कोई बता सकता है कि आज तक किसको मुरब्बे जमीनें, राय साहब के खिताब ऐसे ही मिल गए हों, ऐसा क्या किया है देश के लिए जो यह सब मिला? पहले तो टोहाना में मंत्री का पता लगाने के लिए कोठी के बाहर खड़े व्यक्ति की जेब में 500 रुपये देने पड़ते थे, फिर मंत्री को खाने पर बुलाने के लिए पैसे देने पड़ते थे। इनके बाद वह आए और टोहाना की जनता ने उन्हें जिताया, क्योंकि वे जनता की पसंद थे।
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यह भी पढ़ें: दर्द की इंतहा: अगले माह छुट्टी पर आने वाले थे कर्नल मनप्रीत और मेजर आशीष... अब बस अंतहीन इंतजार
प्रदर्शनकारी किसानों को लेकर सांसद दुग्गल के बयान का किया समर्थन
बाढ़ मुआवजे की मांग को लेकर आंदोलनरत किसानों को लेकर पंचायत मंत्री ने कहा कि सरकार बाढ़ पीड़ितों को हर संभव सहायता देने के लिए लगी हुई है। सांसद सुनीता दुग्गल द्वारा किसान संगठनों को विपक्षी दलों के लोग बताने पर उन्होंने कहा कि कहीं न कहीं हर चीज के पीछे यह राजनीति हो रही है, यह सही नहीं है। यह राजनीति प्रदेश के विकास में बाधा पहुंचाने का काम करती है। सरकार को जगाना या चेताना हर नागरिक का हक है, लेकिन राजनीति नहीं होनी चाहिए।
सरपंच मनरेगा मजदूरों को बहला कर करवाते थे प्रदर्शन
विरोधी सरपंचों पर देवेंद्र बबली ने कहा कि सरपंचों की नाराजगी भी राजनीति से प्रेरित है। अपने जिले में भी दो-तीन लोग हैं, जो फोटो सेशन के लिए आते हैं, मनरेगा के लोगों को बहला फुसलाकर इकट्ठे करते हैं और नारेबाजी करते हैं। अब इनके गांवों की जनता को भी इनका पता चल गया है।
अब पंचायत विभाग की रफ्तार और बढ़ेगी
उन्होंने कहा कि प्रदेश के पंचायती विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों की बड़े स्तर पर भर्ती पहली बार अब हो रही है। इससे विभाग की स्ट्रेंथ बढ़ रही है और विकास की रफ्तार अब बढ़ेगी। अब व्यवस्था परिवर्तन हो रहा है, ग्राम दर्शन पोर्टल के माध्यम से अंतिम छोर तक के लाभार्थी को लाभ दिया जाएगा। कहीं कहीं कोई तकनीकी खामियां आ रही हैं, उन्हें दूर किया जा रहा है। बिचौलिया प्रथा दूर की गई है। पोर्टल का लाभ यह है कि अब बाढ़ प्रभावित हर क्षेत्र का डेटा सरकार के पास है और प्रभावित किसान की क्षतिपूर्ति की जा रही है। बीपीएल कार्ड, बुढापा पेंशन आदि में अड़चनें, त्रुटियां आई हैं, लेकिन सरकार इन्हें दूर कर रही है। सरकार चाहती है कि जिस स्कीम का जो भी हकदार हो, उसे उसका हक मिले।
मेरा लहजा सख्त, भावना नहीं
अधिकारियों पर सख्ती के सवाल पर उन्होंने कहा कि वे देशभक्त परिवार में पैदा हुए। उनमें ऐसी भावना है कि जब वे कोई अधिकारी अपनी कुर्सी से न्याय नहीं करता तो वे सख्त भाषा का इस्तेमाल कर जाते हैं। वह खुशी के लिए यह नहीं करते, इसलिए करते हैं ताकि अधिकारी को यह याद रहे कि उस कुर्सी की गरिमा क्या है।
ईमानदारी से काम करें पंचायत व जिला परिषद प्रतिनिधि
जिला परिषद में ढीली कार्यप्रणाली पर बबली ने कहा कि इसका कारण आपसी राजनीतिक खींचतान है, ई टेंडरिंग सरकार लाई तो लोगों को तकलीफ हुई, जिस गति से पैसा खर्च होना चाहिए, वह गति अभी नहीं है, उनका प्रयास जारी है। अब अधिकारी कर्मचारियों का नजरिया भी बदल रहा है। अब हर महीने चुने हुए प्रतिनिधियों से संवाद होगा। 1966 से हरियाणा बना और अब तक पंचायत विभाग का बजट राजनीतिक मैनेजमेंट में प्रयोग होता रहा। पांच साल भी विभाग का बजट ढंग से लग जाए तो गांवों की दिशा और दशा बदल जाएगी। नालियों, गलियों की जरूरत है, लेकिन क्या 50 साल बाद भी इसी पर ही बात क्यों करते रहे?
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फतेहाबाद में मीडिया से बातचीत में बबली ने दावा किया कि वे हर हाल में आगामी विधानसभा चुनाव टोहाना से लड़ेंगे। अभी जेजेपी व भाजपा गठबंधन में है। टिकट को लेकर दोनों दलों की लीडरशिप तय कर लेगी। उन्होंने मुख्यमंत्री मनोहर लाल से नजदीकी के सवाल पर कहा कि मुख्यमंत्री को ईमानदार व काम करने वाला सहयोगी कैबिनेट में मिला है।
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टोहाना के पूर्व मंत्री का परिवार था अंग्रेजों का गुलाम
बबली ने कहा कि पहले कांग्रेस की टिकट के लिफाफे पर एक ही परिवार का नाम जाता था, वो ऐसा परिवार था जो टोहाना ही नहीं देश का गद्दार था। कांग्रेस में और भी बहुत से युवा लोग आए हैं, पार्टी उन्हें मौका क्यों नहीं देती। क्या कोई बता सकता है कि आज तक किसको मुरब्बे जमीनें, राय साहब के खिताब ऐसे ही मिल गए हों, ऐसा क्या किया है देश के लिए जो यह सब मिला? पहले तो टोहाना में मंत्री का पता लगाने के लिए कोठी के बाहर खड़े व्यक्ति की जेब में 500 रुपये देने पड़ते थे, फिर मंत्री को खाने पर बुलाने के लिए पैसे देने पड़ते थे। इनके बाद वह आए और टोहाना की जनता ने उन्हें जिताया, क्योंकि वे जनता की पसंद थे।
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प्रदर्शनकारी किसानों को लेकर सांसद दुग्गल के बयान का किया समर्थन
बाढ़ मुआवजे की मांग को लेकर आंदोलनरत किसानों को लेकर पंचायत मंत्री ने कहा कि सरकार बाढ़ पीड़ितों को हर संभव सहायता देने के लिए लगी हुई है। सांसद सुनीता दुग्गल द्वारा किसान संगठनों को विपक्षी दलों के लोग बताने पर उन्होंने कहा कि कहीं न कहीं हर चीज के पीछे यह राजनीति हो रही है, यह सही नहीं है। यह राजनीति प्रदेश के विकास में बाधा पहुंचाने का काम करती है। सरकार को जगाना या चेताना हर नागरिक का हक है, लेकिन राजनीति नहीं होनी चाहिए।
सरपंच मनरेगा मजदूरों को बहला कर करवाते थे प्रदर्शन
विरोधी सरपंचों पर देवेंद्र बबली ने कहा कि सरपंचों की नाराजगी भी राजनीति से प्रेरित है। अपने जिले में भी दो-तीन लोग हैं, जो फोटो सेशन के लिए आते हैं, मनरेगा के लोगों को बहला फुसलाकर इकट्ठे करते हैं और नारेबाजी करते हैं। अब इनके गांवों की जनता को भी इनका पता चल गया है।
अब पंचायत विभाग की रफ्तार और बढ़ेगी
उन्होंने कहा कि प्रदेश के पंचायती विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों की बड़े स्तर पर भर्ती पहली बार अब हो रही है। इससे विभाग की स्ट्रेंथ बढ़ रही है और विकास की रफ्तार अब बढ़ेगी। अब व्यवस्था परिवर्तन हो रहा है, ग्राम दर्शन पोर्टल के माध्यम से अंतिम छोर तक के लाभार्थी को लाभ दिया जाएगा। कहीं कहीं कोई तकनीकी खामियां आ रही हैं, उन्हें दूर किया जा रहा है। बिचौलिया प्रथा दूर की गई है। पोर्टल का लाभ यह है कि अब बाढ़ प्रभावित हर क्षेत्र का डेटा सरकार के पास है और प्रभावित किसान की क्षतिपूर्ति की जा रही है। बीपीएल कार्ड, बुढापा पेंशन आदि में अड़चनें, त्रुटियां आई हैं, लेकिन सरकार इन्हें दूर कर रही है। सरकार चाहती है कि जिस स्कीम का जो भी हकदार हो, उसे उसका हक मिले।
मेरा लहजा सख्त, भावना नहीं
अधिकारियों पर सख्ती के सवाल पर उन्होंने कहा कि वे देशभक्त परिवार में पैदा हुए। उनमें ऐसी भावना है कि जब वे कोई अधिकारी अपनी कुर्सी से न्याय नहीं करता तो वे सख्त भाषा का इस्तेमाल कर जाते हैं। वह खुशी के लिए यह नहीं करते, इसलिए करते हैं ताकि अधिकारी को यह याद रहे कि उस कुर्सी की गरिमा क्या है।
ईमानदारी से काम करें पंचायत व जिला परिषद प्रतिनिधि
जिला परिषद में ढीली कार्यप्रणाली पर बबली ने कहा कि इसका कारण आपसी राजनीतिक खींचतान है, ई टेंडरिंग सरकार लाई तो लोगों को तकलीफ हुई, जिस गति से पैसा खर्च होना चाहिए, वह गति अभी नहीं है, उनका प्रयास जारी है। अब अधिकारी कर्मचारियों का नजरिया भी बदल रहा है। अब हर महीने चुने हुए प्रतिनिधियों से संवाद होगा। 1966 से हरियाणा बना और अब तक पंचायत विभाग का बजट राजनीतिक मैनेजमेंट में प्रयोग होता रहा। पांच साल भी विभाग का बजट ढंग से लग जाए तो गांवों की दिशा और दशा बदल जाएगी। नालियों, गलियों की जरूरत है, लेकिन क्या 50 साल बाद भी इसी पर ही बात क्यों करते रहे?