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Fatehabad News: बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार के खिलाफ संगठनों ने किया प्रदर्शन
Wed, 11 Dec 2024 10:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Wed, 11 Dec 2024 10:19 AM IST
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फतेहाबाद में प्रदर्शन करते विभिन्न संगठनों के सदस्य।
फतेहाबाद। बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों विशेषकर हिंदू समुदाय पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ समस्त हिंदू समाज के नेतृत्व में विभिन्न समाजसेवी संगठनों ने मंगलवार को शहर में रोष प्रदर्शन किया।
इसके बाद राष्ट्रपति के नाम एसडीएम डाॅ. जयवीर यादव को ज्ञापन सौंपा। हिंदूवादी संगठनों ने ज्ञापन की एक प्रति प्रधानमंत्री, संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव, मानवाधिकार आयोग और बांग्लादेश दूतावास को भी भेजी।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए स्वामी विज्ञान प्रेमानंद ने कहा कि सरेआम दिनदहाड़े बांग्लादेश में मठ, मंदिर तोड़े जा रहे हैं। हिंदू, सिख, बौद्ध आदि वहां के सभी अल्पसंख्यक समुदायों पर हमले हो रहे हैं। महिलाओं की इज्जत लूटी जा रही है और धर्म परिवर्तन करवाया जा रहा है। जितनी मारकाट बांग्लादेश में अब हो रही है, उतनी तो 1947 के विभाजन के समय भी नहीं हुई थी। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ को अपनी शांति सेना बांग्लादेश में भेजनी चाहिए। वहां की सरकारें कुछ नहीं कर रही, ऐसे में संयुक्त राष्ट्र संघ को इस दिशा में कदम उठाने होंगे। अल्पसंख्यकों विशेषकर हिंदुओं पर हो रहे हमलों से उनकी धार्मिक स्वतंत्रता और मौलिक अधिकार खतरे में हैं।
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प्रदर्शनकारियों ने मांग रखी कि भारत सरकार इस मामले को अंतरराष्ट्रीय मंच पर जल्द से जल्द उठाएं और हिंदुओं सहित सभी अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को सुनिश्चित करें। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र संघ और मानवाधिकार आयोग इस विषय में तत्काल हस्तक्षेप करें और बांग्लादेश पर अंतरराष्ट्रीय दबाव डालें।
भारत में आने वाले सभी अल्पसंख्यकों व हिंदू शरणार्थियों को सुरक्षा और पुनर्वास प्रदान करने के प्रयास किए जाएं और इस्काॅन मंदिर के प्रमुख संत चिन्मय कृष्ण दास को शीघ्र रिहा किया जाए।
प्रदर्शन में राष्ट्रीय एकता मंच, पंचनद स्मारक ट्रस्ट, भारत विकास परिषद, हिंदू जागरण मंच, जीव सेवा जीवन सेवा, वीर सावरकर ग्रुप, भारतीय किसान संघ, आरोग्य भारती, विश्व हिंदू परिषद, अधिवक्ता परिषद, लायंस क्लब फतेहाबाद राॅयल, ऑटो यूनियन, कैमिस्ट एवं ड्रगिस्ट एसोसिएशन, परशुराम ब्राह्मण सेना, श्रीब्राह्मण सभा, अखिल भारतवर्षीय श्रीगुर्जर गौड़ ब्राह्मण युवक संघ, स्वदेशी जागरण मंच, लघु उद्योग भारती, भारतीय मजदूर संघ,अखिल भारतीय धर्मसभा, एबीवीपी, स्वर्णकार सभा, गाड़ी लोहार कल्याण संघ, विप्र सेना, अखंड भारत सेवा दल एवं सेवा भारती के पदाधिकारी शामिल हुए।
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इसके बाद राष्ट्रपति के नाम एसडीएम डाॅ. जयवीर यादव को ज्ञापन सौंपा। हिंदूवादी संगठनों ने ज्ञापन की एक प्रति प्रधानमंत्री, संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव, मानवाधिकार आयोग और बांग्लादेश दूतावास को भी भेजी।
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प्रदर्शन को संबोधित करते हुए स्वामी विज्ञान प्रेमानंद ने कहा कि सरेआम दिनदहाड़े बांग्लादेश में मठ, मंदिर तोड़े जा रहे हैं। हिंदू, सिख, बौद्ध आदि वहां के सभी अल्पसंख्यक समुदायों पर हमले हो रहे हैं। महिलाओं की इज्जत लूटी जा रही है और धर्म परिवर्तन करवाया जा रहा है। जितनी मारकाट बांग्लादेश में अब हो रही है, उतनी तो 1947 के विभाजन के समय भी नहीं हुई थी। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ को अपनी शांति सेना बांग्लादेश में भेजनी चाहिए। वहां की सरकारें कुछ नहीं कर रही, ऐसे में संयुक्त राष्ट्र संघ को इस दिशा में कदम उठाने होंगे। अल्पसंख्यकों विशेषकर हिंदुओं पर हो रहे हमलों से उनकी धार्मिक स्वतंत्रता और मौलिक अधिकार खतरे में हैं।
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प्रदर्शनकारियों ने मांग रखी कि भारत सरकार इस मामले को अंतरराष्ट्रीय मंच पर जल्द से जल्द उठाएं और हिंदुओं सहित सभी अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को सुनिश्चित करें। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र संघ और मानवाधिकार आयोग इस विषय में तत्काल हस्तक्षेप करें और बांग्लादेश पर अंतरराष्ट्रीय दबाव डालें।
भारत में आने वाले सभी अल्पसंख्यकों व हिंदू शरणार्थियों को सुरक्षा और पुनर्वास प्रदान करने के प्रयास किए जाएं और इस्काॅन मंदिर के प्रमुख संत चिन्मय कृष्ण दास को शीघ्र रिहा किया जाए।
प्रदर्शन में राष्ट्रीय एकता मंच, पंचनद स्मारक ट्रस्ट, भारत विकास परिषद, हिंदू जागरण मंच, जीव सेवा जीवन सेवा, वीर सावरकर ग्रुप, भारतीय किसान संघ, आरोग्य भारती, विश्व हिंदू परिषद, अधिवक्ता परिषद, लायंस क्लब फतेहाबाद राॅयल, ऑटो यूनियन, कैमिस्ट एवं ड्रगिस्ट एसोसिएशन, परशुराम ब्राह्मण सेना, श्रीब्राह्मण सभा, अखिल भारतवर्षीय श्रीगुर्जर गौड़ ब्राह्मण युवक संघ, स्वदेशी जागरण मंच, लघु उद्योग भारती, भारतीय मजदूर संघ,अखिल भारतीय धर्मसभा, एबीवीपी, स्वर्णकार सभा, गाड़ी लोहार कल्याण संघ, विप्र सेना, अखंड भारत सेवा दल एवं सेवा भारती के पदाधिकारी शामिल हुए।