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Fatehabad News: सहकारी बैंक में ऋण घोटाले में आरोपी ऑपरेटर और वकील काबू

Wed, 30 Jul 2025 10:56 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Wed, 30 Jul 2025 10:56 PM IST
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Operator and lawyer accused in loan scam in cooperative bank arrested
फतेहाबाद। सहकारी बैंक सर्कल में जनवरी 2016 से 31 मार्च 2018 तक हुए करोड़ों रुपये के ऋण घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने वकील गगन ग्रोवर व अयाल्की सहकारी बैंक के डाटा ऑपरेटर शेषकरण को गिरफ्तार किया है।
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विजिलेंस के डीएसपी जुगल किशोर ने बताया कि गैर कृषि ऋण को कृषि ऋण दिखाकर फर्जीवाड़ा किया गया। 4 मार्च 2019 को शहर पुलिस ने सहकारी बैंक के जनरल मैनेजर रमेश पूनिया की शिकायत पर घोटाले के समय कार्यरत जीएम समेत बैंक के कई अधिकारियों व कर्मचारियों, ऋणी व लाभार्थियों के विरुद्ध धोखाधड़ी व भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज किया था।
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आरोप था कि सहकारी बैंक कार्यालय ने जनवरी 2016 से 31 मार्च 2018 तक 74 करोड़ 92 लाख रुपये के ऋण वितरित किए गए थे। इसमें 90 फीसदी फर्जी पाए गए थे। महाप्रबंधक रमेश पुनिया द्वारा की गई शिकायत में कहा गया था कि जीएम नरसी राम ने ऋण मंजूर करने वाले प्रपोजल कमेटी को की जगह लोन इंचार्ज महेन्द्र भादू द्वारा प्रस्तुत केसों को मंजूरी दी थी। जांच में 150 मंजूरशुदा लोन के ऐसे केस सामने आए थे जिसमें मुख्यालय से मंजूरी मिलना तो दूर, केस ही नहीं भेजा गया था। बताया जा रहा है कि ऐसे इन केसों में मुख्यालय के फर्जी नंबर चढ़ाए गए थे। जांच में जीएम के हस्ताक्षर युक्त खाली सेक्शन लेटर भी बरामद हुए थे। कई केस ऐसे सामने आए थे जिसमें शाखा प्रबंधक ने तो केस बाद में भेजा जबकि ऋण की मंजूरी का लेटर पहले ही जारी हो गया था।
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कई मामलों में शाखा प्रबंधक ने कपड़े की दुकान के ऋण का केस भेजा था और जीएम ने शैटरिंग की दुकान के ऋण को मंजूरी दी गई। जबकि तहसील में एग्रीकल्चर लोन दिखाकर रजिस्टरी करवाई गई थी। 17 केस ऐसे मिले जो जिले के बाहर के निवासी थे। इन सबके पते व आधार कार्ड फर्जी पाए गए थे। विशेष बात यह है कि 74 करोड़ के ऋण से 60 करोड़ का ऋण ऐसा पाया गया जो प्रयोग ही नहीं हुआ यानी जिस काम के लिए ऋण लिया गया था उस काम पर पैसा खर्च ही नहीं हुआ।

एसीबी के अधिकारियों की मानें तो पकड़े गए आरोपियों पर आरोप है कि उन्होंने ऋण लेने वाले लाभार्थियों की फर्जी सर्च रिपोर्ट तैयार की और लाभार्थियों से फीस वसूल की। आरोपी डाटा ऑपरेटर ने बिचौलिए की भूमिका निभाई थी। इस घोटाले में एसीबी अब तक 12 आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।


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मामले में आरोपी वकील गगन और ऑपरेटर को गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर आरोप है कि गैर कृषि ऋण को कृषि ऋण दिखाकर फर्जीवाड़ा किया। इस मामले में आरोपी जीएम, मैनेजर समेत कई आरोपी अधिकारी पकड़े जा चुके हैं।

- जुगल किशोर, डीएसपी, एसीबी
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