फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Fatehabad News ›   OPD in private wards, patient porch

निजी वार्डों में ओपीडी, मरीज बरामदे में

Fri, 13 Jun 2014 11:30 PM IST
fatehabad
fatehabad Updated Fri, 13 Jun 2014 11:30 PM IST
विज्ञापन

फतेहाबाद में करीब 30 वर्ष पूर्व 1983 में उपमंडल स्तर पर 50 बिस्तराें के अस्पताल का निर्माण किया गया। उस समय फतेहाबाद की आबादी करीब 40 हजार की थी, लेकिन अब यह अस्पताल एक लाख की आबादी को बर्दाश्त कर रहा है। 2010 में कागजाें में 100 बेड के हिसाब से यहां चिकित्सकाें के पद स्वीकृत हो गए। हालांकि सही मायनाें में यहां पर अभी भी 65 बेड हैं।

विज्ञापन


यहां प्रतिदिन 400 से 450 मरीज अपना उपचार करवाने के लिए आते हैं। बीमारी फैलने की अवस्था में एक-एक बेड पर दो-दो मरीज लेटा दिए जाते हैं। बढ़ती आबादी को देखकर अस्पताल का भवन छोटा पड़ने लग गया है। नेत्र, स्कीन और स्त्री रोग विशेषज्ञ आदि कई डॉक्टराें को निजी वार्डों में ओपीडी देनी पड़ रही है। निजी वार्डों के बाहर मरीजाें की कतारें देखी जा सकती हैं। निजी वार्डों में डाक्टराें के जमने से अस्पताल में अब निजी वार्ड ही नहीं है।
विज्ञापन


सामान्य अस्पताल में यहां 42 चिकित्सकाें के पद स्वीकृत हैं। इनमें हड्डी रोग विशेषज्ञ, सर्जन, एनेस्थीसिया, रेडियोलॉजिस्ट और महिला सर्जन सहित 18 चिकित्सकों के पद वर्षों से खाली पड़े हैं। इनसे संबंधित मरीजाें को निजी अस्पतालाें की ओर रुख करना पड़ता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


कांट्रेक्ट बेस पर चल रहा है काम  
अस्पताल में सफाई व्यवस्था, सिक्योरिटी, वार्ड सर्वेंट, टेस्टिंग लैब इत्यादि आधारभूत और बुनियादी ढांचे का काम ऑॅउटसोर्सिंग के सहारे करवाया जा रहा है। यहां पर 13 सफाई कर्मचारी, सुरक्षा में लगे 12 और 40 जनरल ड्यूटी अटैंडेंट के अलावा 27 स्टाफ नर्स, 2 फार्मासिस्ट और 3 एमबीबीएस चिकित्सक अनुबंध पर काम कर रहे हैं।

नहीं है सिटी स्कैन और एमआरआई
फतेहाबाद के अस्पताल में सिटी स्कैन और एमआरआई की खासी जरूरत महसूस की जा रही है। चुनाव के समय नेताआें ने दावे किए लेकिन वे पूरे नहीं हुए। सिटी स्कैन और एमआरआई के लिए अभी भी जिले के लोग हिसार और सिरसा जाते हैं।
    
यहां उपचार करवाने आए गांव दरियापुर के संजय ने बताया कि वह अपनी मां अमरो देवी की कमर में दर्द रहता है, लेकिन यहां आकर पता चला कि डॉक्टर नहीं है। इसी तरह भूना से यहां आए किसान देवी सिंह ने बताया कि उसके जोड़ाें में दर्द है, लेकिन यहां डॉक्टर ही नहीं है। इसलिए उसे निजी अस्पताल में जाना पड़ेगा। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर यहां खाली पदाें पर चिकित्सक आते हैं तो उनको जनरल वार्ड में कैबिन बनाकर बैठाना पड़ेगा। ऐसे में मरीज कहां जाएंगे। यह एक गंभीर सवाल उठता है। अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक तो हैं, लेकिन अस्पताल छोटा होने से यहां स्पेशल वार्ड नहीं बनाए जा सकते।

   
अपनी स्थापना के समय से अस्पताल में सुविधा अनुसार न तो डॉक्टर मिला और न ही स्पेशलिस्ट। वर्ष 2005 के बाद इस अस्पताल की दशा सुधारने का मुद्दा जोरशोर से उठा तो प्रशासन ने इसकी सुध लेनी शुरू की। 2008 में मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने फतेहाबाद में इस अस्पताल का दर्जा बढ़ाकर 100 बेड करने की घोषणा की, लेकिन यह भी अभी तक कागजाें में हो पाई है।


कोट
अस्पताल में जगह की कमी है। अस्पताल का विस्तार किया जाना अतिआवश्यक है। हिसार रोड पर सेक्टर 9 में 14 एकड़ में नए अस्पताल का निर्माण किया जाना है।
- डॉ. सूरजभान कंबोज, सीएमओ, फतेहाबाद

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed