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सिर्फ 699 घरों में नहीं है पेयजल कनेक्शन : सर्वे
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ग्रामीण क्षेत्र में जिले में सिर्फ 699 ही घर पेयजल कनेक्शन से वंचित हैं। हालांकि वास्तविक आंकड़ा 17 हजार से ज्यादा है, लेकिन जनस्वास्थ्य की पॉलिसी के मुताबिक ढाणियों में बसे लोग लाभ पात्र नहीं हैं। जनस्वास्थ्य विभाग ने हाल ही में एक सर्वे किया है। इस सर्वे के मुताबिक जिले में सिर्फ 699 ही घर हैं, जिन्हें पेयजल कनेक्शन की जरूरत है। इन घरों को कनेक्शन देने की कवायद भी जल्द शुरू की जाएगी।
विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक जिले में 17596 परिवार गांव की फिरनी से बाहर खेतों में रहते हैं। उन्हें स्तर पर ही पानी की व्यवस्था करनी पड़ती है। मगर विभाग उन्हें लाभ पात्रों की श्रेणी में नहीं रखना चाहता। दरअसल, ये घर गांवों से दूर ढाणियों में रहते हैं। विभाग की पॉलिसी के मुताबिक ढाणियों को पेयजल कनेक्शन नहीं दिया जा सकता। इसलिए उन्हें वंचितों की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।
फिरनी से बाहर नहीं कनेक्शन की सुविधा
विभाग मानता है जो घर गांव की फिरनी के भीतर बसे हैं, वे ही लोग कनेक्शन हकदार हैं। क्योंकि गांवों में फिरनी के भीतर ही पेयजल पाइप लाइन बिछी हुई है। यदि गांव पाइप लाइन को ढाणियों तक ले जाया जाता है तो पाइप से लेकर लेबर तक पर लाखों रुपये खर्च होता है। इसलिए 17596 ढाणियों तक पानी पहुंचाने में विभाग असमर्थ है।
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ढाणियों में पेयजल की स्थिति
जिले में 17596 ढाणियों में लगभग 1 लाख 6 हजार लोग निवास करते हैं। इन लोगों के पास ट्यूबवेल ही मात्र विकल्प है। ढाणियों में बसे लोग नहरी पानी नहीं पीते, क्योंकि वह शुद्ध नहीं किया होता। जगह-जगह लोग नहरों में कपड़े व वाहन धोने, पशुओं को नहलाने जैसे काम करते हैं। कई लोग नहरों में गंदा पानी भी डालते हैं। इसलिए ढाणियों में लोग चौबीस घंटे में एक बार ट्यूबवेल चलाते हैं। हौद या टंकी में स्टोर करके चौबीस घंटे काम चलाते हैं।
खेतों तक पाइप लाइन बिछाना मुश्किल : शर्मा चंद लाली
जनस्वास्थ्य विभाग सिर्फ वहां तक पानी मुहैया करवा रहा है, जहां तक रिहायशी इलाका है। दूर खेतों तक पाइप लाइन बिछाना बेहद कठिन व खर्चीला कार्य है। कई घर गांव से कई किलोमीटर दूर बसे हैं, वहां तक पाइप लाइन बिछाना बेहद कठिन कार्य है। ज्यादातर ढाणियों के पास ट्यूबवेल की सुविधा है। 599 घर गांवों में बसे हैं, जिनके पास कनेक्शन नहीं है। उन्हें पेयजल कनेक्शन जल्द दिया जाएगा।
-शर्माचंद लाली, जल संरक्षण अधिकारी, फतेहाबाद।
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विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक जिले में 17596 परिवार गांव की फिरनी से बाहर खेतों में रहते हैं। उन्हें स्तर पर ही पानी की व्यवस्था करनी पड़ती है। मगर विभाग उन्हें लाभ पात्रों की श्रेणी में नहीं रखना चाहता। दरअसल, ये घर गांवों से दूर ढाणियों में रहते हैं। विभाग की पॉलिसी के मुताबिक ढाणियों को पेयजल कनेक्शन नहीं दिया जा सकता। इसलिए उन्हें वंचितों की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।
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फिरनी से बाहर नहीं कनेक्शन की सुविधा
विभाग मानता है जो घर गांव की फिरनी के भीतर बसे हैं, वे ही लोग कनेक्शन हकदार हैं। क्योंकि गांवों में फिरनी के भीतर ही पेयजल पाइप लाइन बिछी हुई है। यदि गांव पाइप लाइन को ढाणियों तक ले जाया जाता है तो पाइप से लेकर लेबर तक पर लाखों रुपये खर्च होता है। इसलिए 17596 ढाणियों तक पानी पहुंचाने में विभाग असमर्थ है।
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ढाणियों में पेयजल की स्थिति
जिले में 17596 ढाणियों में लगभग 1 लाख 6 हजार लोग निवास करते हैं। इन लोगों के पास ट्यूबवेल ही मात्र विकल्प है। ढाणियों में बसे लोग नहरी पानी नहीं पीते, क्योंकि वह शुद्ध नहीं किया होता। जगह-जगह लोग नहरों में कपड़े व वाहन धोने, पशुओं को नहलाने जैसे काम करते हैं। कई लोग नहरों में गंदा पानी भी डालते हैं। इसलिए ढाणियों में लोग चौबीस घंटे में एक बार ट्यूबवेल चलाते हैं। हौद या टंकी में स्टोर करके चौबीस घंटे काम चलाते हैं।
खेतों तक पाइप लाइन बिछाना मुश्किल : शर्मा चंद लाली
जनस्वास्थ्य विभाग सिर्फ वहां तक पानी मुहैया करवा रहा है, जहां तक रिहायशी इलाका है। दूर खेतों तक पाइप लाइन बिछाना बेहद कठिन व खर्चीला कार्य है। कई घर गांव से कई किलोमीटर दूर बसे हैं, वहां तक पाइप लाइन बिछाना बेहद कठिन कार्य है। ज्यादातर ढाणियों के पास ट्यूबवेल की सुविधा है। 599 घर गांवों में बसे हैं, जिनके पास कनेक्शन नहीं है। उन्हें पेयजल कनेक्शन जल्द दिया जाएगा।
-शर्माचंद लाली, जल संरक्षण अधिकारी, फतेहाबाद।