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Fatehabad News: मौके पर न पहुंच सकें अधिकारी, इसलिए शाम को जला रहे पराली

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 18 Oct 2023 11:52 PM IST
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Officials could not reach the spot, hence burning stubble in the evening
गांव जांडली में खेत में लगाई गई आग बुझाने में जुटे एसडीओ भीम सिंह व उनका सहयोगी कर्मचारी।
फतेहाबाद। जिले के प्रदेश में पराली जलाने के मामले में पहले नंबर पर पहुंचने के पीछे सरकारी तंत्र भी जिम्मेदार हैं। कृषि विभाग के मैनेजमेंट सिस्टम को और सुधार की जरूरत है। फिलहाल किसानों को समय पर बेलर नहीं मिल रहे हैं। अगर किसान गांठ बनवा दें तो एक-एक महीने तक खेत से उठाई नहीं जाती है। किसान को गेहूं और सब्जियों की बिजाई तत्काल करनी होती है, इसलिए इंतजार करने के बजाय वो पराली को आग लगा देते हैं। आग लगाने की ज्यादातर घटनाएं शाम 5 बजे बाद अंजाम दी जाती हैं, ताकि ड्यूटी पूरी करके जा चुके अधिकारी बुझाने या जुर्माना करने समय पर न पहुंच सके।जिले में बुधवार को दो और फायर लोकेशन हरसैक की ओर से भेजी गई है। पहली लोकेशन रतिया क्षेत्र व दूसरी टोहाना क्षेत्र की रही। वहीं, अब तक कृषि विभाग पराली जलाने के आरोप में 49 किसानों को एक लाख सैंतीस हजार 500 रुपये का जुर्माना लगा चुका है। जिले में अब तक पराली जलाने के 90 मामले आ चुके हैं। फसल अवशेष जलाने से संबंधित रोकथाम में लापरवाही बरतने पर दो कर्मचारी निलंबित हो चुके हैं जबकि तीन कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा हो चुकी है। बता दें कि जिले में 162 गांव रेड व येलो जोन में शामिल हैं। इनमें से 69 गांव रेड जोन में हैं जबकि 93 गांव येलो जोन में हैं। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार जिले में बेलर सिर्फ 305 हैं। बेलर से ही पराली की गांठें बनाई जाती है। इस समय किसानों के लिए बेलरों की संख्या पर्याप्त साबित नहीं हो रही है। संवाद
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कागजों में गांव नन्हेड़ी में 3 बेलर, धरातल पर एक भी नहीं
कृषि विभाग से अनुदान लेते समय बेलरों को चलाने का जो स्थान भरा जाता है, अक्सर वहां बेलर होते ही नहीं हैं। कृषि विभाग के कागजों में गांव नन्हेड़ी में 3 बेलर दिए हुए हैं। मगर धरातल पर एक भी नहीं है। नाम न छापने की शर्त पर कुछ किसानों ने बताया कि बेलर अनुदान पर ले लिए जाते हैं। मगर बाद में उन्हें आगे बेच दिया जाता है। इसी तरह गांव भिरड़ाना के बेलर कैथल जिले में चल रहे हैं। वहां पहले धान की फसल कटाई शुरू हो गई, इसलिए यहां के बेलर वहां भेज दिए गए। अब यहां आएंगे, तब तक काफी क्षेत्र में पराली जलाने की घटनाएं हो चुकी होंगी।
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गेहूं की बिजाई के लिए तत्काल खाली करना होता है खेत
गांव भिरड़ाना के किसान विजय कुमार व दीपक सिंह बताते हैं कि किसान को धान की फसल के बाद गेहूं की बिजाई के लिए तत्काल खेत खाली करना होता है। पराली के प्रबंधन के लिए जब बेलर संचालक को फोन करते हैं, तो वह कभी दो दिन तो कभी एक सप्ताह में आने की कहता है। इतने दिन किसान इंतजार नहीं करता है। मजबूरन वह पराली में आग लगाने के विकल्प को चुन लेता है।
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सख्ती के बाद अधिकारी पहुंच रहे गांवों में
एक दिन पहले ही पर्यावरण विभाग के निदेशक प्रदीप कुमार और उससे पहले मुख्य सचिव संजीव कौशल की नाराजगी झेलने के बाद प्रशासन सख्ती के मूड में आ गया है। डीसी अजय तोमर ने सभी एसडीएम को अपने-अपने क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद से अधिकारियों ने फील्ड में निकलना शुरू कर दिया है। रतिया के एसडीएम जगदीश चंद्र के निर्देश पर बुधवार को नायब तहसीलदार अचिन कालता ने गांव खुंडन, हड़ौली व आसपास के एरिया का दौरा कर किसानों को पराली नहीं जलाने के लिए जागरूक किया। इस दौरान कानूनगो जग्गा सिंह, पटवारी ईश्वर सिंह, शेर सिंह भी उनके साथ रहे।


जिले में साल दर साल पराली जलाने के मामले
साल 2020 - 880
साल 2021 - 1479
साल 2022 - 767
साल 2023 - 88 अब तक
कोट
किसानों को मांग के अनुसार कृषि यंत्र उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। कुछ दिन पहले ही यंत्रों के लिए आवेदन करने वालों को मशीनें खरीदने के अनुमति पत्र जारी किए गए हैं। पराली जलाने वाले 49 किसानों पर 137500 रुपये जुर्माना भी लगाया गया है। मॉनिटरिंग में लापरवाही बरतने वालों पर जिला प्रशासन कार्रवाई भी कर रहा है। -डॉ. राजेश सिहाग, उपनिदेशक, कृषि विभाग फतेहाबाद
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