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Fatehabad News: डूबते सूरज को दिया अर्घ्य, आज उगते सूर्य की करेंगी उपासना
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फतेहाबाद के भट्टू रोड पर छठ पूजा करतीं महिलाएं।
फतेहाबाद/भट्टू कलां। छठ का महापर्व रविवार को जिलेभर में धूमधाम से मनाया गया। रविवार को व्रती महिलाओं ने घाटों पर बेदी बनाकर छठ मैया की पूजा की और पानी में उतर का डूबते सूर्यदेव को अर्घ्य दिया। सोमवार को व्रती महिलाएं उगते हुए सूर्य की उपासना करेंगी और अर्घ्य देने के साथ व्रत संपन्न हो जाएगा।जिले में छठ महापर्व पर नहरों और तालाबों के घाटों को सुंदर ढंग से सजाया गया था। फतेहाबाद के भट्टू रोड पर पूर्वांचल के लोगों ने बड़ा पंडाल बनाया हुआ था यहां पर सैकड़ों व्रती महिलाओं ने बेदी बनाकर छठ मैया की पूजा की और डूबते सूर्यदेव को अर्घ्य दिया। यहां पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। वहीं भट्टूमंडी के पंचायत भवन में पूर्वांचल भारत से आए लोगों ने मां शक्ति युवा क्लब के सौजन्य से छठ पूजा का पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया। कार्यक्रम में वाइस चेयरमैन बंसीलाल भिगासरा, सरपंच प्रतिनिधी आशिष सिंगला, आशु गोयल ने बतौर मुख्यातिथि भाग लिया। इस दौरान कलाकारों द्वारा मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया।
चार दिनों तक चलने वाले सूर्योपासना के पर्व छठ के तीसरे दिन रविवार सायं को छठ व्रतियों ने डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया और परिवार की सुख- शांति और समृद्धि की कामना की। भट्टूमंडी के पंचायत भवन में ही तालाब के रूप में ईंट सीमेंट से पक्का जल स्रोत बनाया गया। मुख्यातिथियों ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि ऐसे पर्व के मनाने से लोगों में आपसी भाईचारा व प्रेम भाव बढ़ाता है। इस दौरान मां शक्ति युवा क्लब के प्रधान अनिल कुमार, पांडव सिंह, गौरेलाल, राजेंद्र गुप्ता, सीताराम यादव, किशन बारदाना, संजय कुमार, दीपक मुखिया, राहुल कुमार ने आए हुए अतिथियों का स्वागत किया।
दिवाली के बाद होती है महापर्व की शुरूआत
बिहार, झारखंड, पूर्वांचल भारतीयों का प्रमुख त्योहार छठ महापर्व की शुरुआत दिवाली के बाद से होती है। चार दिन तक चलने वाला छठ महापर्व के पहले दिन को नहाय खाय कहते है। नहाय खाय से इसकी शुरूआत होती है। दूसरे दिन व्रती शाम में खरना करती हैं और प्रसाद खाने के बाद उनका 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो जाता है। तीसरे दिन डूबते हुए भगवान सूर्य को व्रती अर्घ्य देती हैं। चौथे और अंतिम दिन उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ महापर्व संपन्न हो जाता है।
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चार दिनों तक चलने वाले सूर्योपासना के पर्व छठ के तीसरे दिन रविवार सायं को छठ व्रतियों ने डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया और परिवार की सुख- शांति और समृद्धि की कामना की। भट्टूमंडी के पंचायत भवन में ही तालाब के रूप में ईंट सीमेंट से पक्का जल स्रोत बनाया गया। मुख्यातिथियों ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि ऐसे पर्व के मनाने से लोगों में आपसी भाईचारा व प्रेम भाव बढ़ाता है। इस दौरान मां शक्ति युवा क्लब के प्रधान अनिल कुमार, पांडव सिंह, गौरेलाल, राजेंद्र गुप्ता, सीताराम यादव, किशन बारदाना, संजय कुमार, दीपक मुखिया, राहुल कुमार ने आए हुए अतिथियों का स्वागत किया।
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दिवाली के बाद होती है महापर्व की शुरूआत
बिहार, झारखंड, पूर्वांचल भारतीयों का प्रमुख त्योहार छठ महापर्व की शुरुआत दिवाली के बाद से होती है। चार दिन तक चलने वाला छठ महापर्व के पहले दिन को नहाय खाय कहते है। नहाय खाय से इसकी शुरूआत होती है। दूसरे दिन व्रती शाम में खरना करती हैं और प्रसाद खाने के बाद उनका 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो जाता है। तीसरे दिन डूबते हुए भगवान सूर्य को व्रती अर्घ्य देती हैं। चौथे और अंतिम दिन उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ महापर्व संपन्न हो जाता है।
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