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म्हारे गांव को गंदा नहीं अब अजीतनगर कहिए

Thu, 05 Jan 2017 12:12 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, फतेहाबाद
ब्यूरो/ अमर उजाला, फतेहाबाद Updated Thu, 05 Jan 2017 12:12 AM IST
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इसी स्कूल में पढ़ती है पीएम मोदी को पत्र लिखने वाली हरप्रीत कौर। - फोटो : fatehabad
आखिरकार, रतिया के गांव ‘गंदा’ का नाम बदलने का सरकारी फरमान आ ही गया। गांव ‘गंदा’ को अब अजीतनगर के नाम से जाना जाएगा। प्रदेश सरकार ने इस प्रस्ताव को औपचारिक रूप से मंजूरी दे दी है। गुरु गोबिंद सिंह जयंती से महज एक दिन पहले गंदा गांव के नाम को गुरु गोबिंद सिंह जी के बेटे अजीत के नाम पर बदलने के प्रस्ताव को सीएम ने सहमति दे दी है। अब इस प्रस्ताव को प्रदेश सरकार की ओर से केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास भेजा जाएगा, जिसकी सहमति मिलते ही इस बारे में सूचना जारी कर दी जाएगी। हालांकि, जिला प्रशासन के अधिकारी अभी इस बारे में कोई औपचारिक जानकारी होने से इंकार कर रहे हैं।
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आठवीं कक्षा की छात्रा ने लिखा था पीएम मोदी को खत
गांव ‘गंदा’ के सरकारी स्कूल में आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली छात्रा हरप्रीत कौर ने अपने गांव का नाम बदलने के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खत पिछले साल की शुरुआत में आठ जनवरी को लिखा था। लगभग चार माह बाद पीएम मोदी के दफ्तर से इस बाबत एक जवाबी खत जिला और रतिया प्रशासन के नाम आया, जिसमें गांव से संबंधित समस्याओं का निदान करने के निर्देश दिए गए थे।
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1989 में भी हो चुका प्रयास, नहीं चढ़ा था सिरे
गांव का नाम बदलने के लिए गांव की पंचायत एवं ग्रामीणों ने कई प्रयास किए, लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिली। इसके बाद ग्रामीणों ने आपस में सहमति कर आम बोलचाल में गांव का नाम अजीतनगर कर दिया, लेकिन सरकारी रिकार्ड में इसे अभी तक गंदा गांव के नाम से ही जाना जाता था। सबसे पहले 4 मार्च 1989 को ग्राम पंचायत ने प्रस्ताव पास कर गांव का नाम अजीतनगर रखने की सिफारिश की थी। लेकिन उस वक्त राजस्व विभाग की औपचारिकताएं पूरी ना होने से गांव के नाम को बदलने की प्रक्रिया पर अमल नहीं हो सका था।
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अन्य जिलों से भी उठी थी गांवों के नाम बदलने की मांग
फतेहाबाद में ‘गंदा’ गांव के साथ-साथ नकटा गांव का नाम बदलने के लिए गांव की पंचायत ने प्रस्ताव पारित कर प्रशासन को भेजा था। फतेहाबाद के ‘गंदा’ गांव का मसला जब मीडिया की सुर्खियों में आया तो कई जिलों के ऐसे अजीब नाम वाले गांवों ने भी इस दिशा में आवाज बुलंद की। सिरसा के गांव कुतागढ़, हिसार का गांव चोरमार आदि ने भी अपने गांव का नाम बदलने के लिए प्रस्ताव प्रदेश सरकार को भेजे थे, लेकिन अभी तक प्रदेश सरकार की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया है।

अमर उजाला ने लगातार उठाया था इस मुद्दे को, ढिलाई पर भी प्रकाशित की थी खबर
अमर उजाला शुरू से गांव ‘गंदा’ के मसले को लगातार उठाता आया है। गांव की स्थितियां, नाम बदलने के मामले में लगातार हो रही ढिलाई पर भी लगातार खबरें प्रकाशित की थी। इसके बाद जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार के बीच लगातार पत्र व्यवहार हुआ और आखिरकार इसे मंजूरी दे दी गई।

पीएम को भेजे खत में ये लिखा था आठवीं की छात्रा हरप्रीत कौर ने
आदरणीय प्रधानमंत्री जी, 
भारत सरकार, नई दिल्ली
सविनय निवेदन ये है कि हमारे गांव का नाम ‘गंदा’ है। हम जहां भी जाते हैं, लोग हमारी बेइज्जती करते हैं हमारे गांव का नाम लेकर। प्लीज, इसे बदल दीजिए। समस्याएं और भी हैं। स्कूली चारदीवारी नहीं है। स्कूल टाइम में आवारा पशु अंदर घुस जाते हैं और हमें पढ़ाई में दिक्कत होती है। छोटे बच्चे तो अपने घर चले जाते हैं। हमारे स्कूल और साथ लगते पशु अस्पताल में तकरीबन 100 पौधे लगे हुए हैं लेकिन चारदीवारी नहीं होने से उनकी भी सुरक्षा नहीं होती। स्कूल और अस्पताल की जमीन पर अवैध कब्जे कर भेड़ों का बाड़ा बना दिया गया है। इन समस्याओं से भी निजात दिलवाएं।


क्या कहते हैं सरपंच
गांव गंदा के सरपंच लखविंद्र सिंह ने कहा कि गांव का नाम अजीतनगर रखना प्रत्येक ग्रामीण का सपना है। अभी सरकार की ओर से इस बारे में फाइल गृह मंत्रालय को भेजी गई है। पूरे गांव की ओर से सीएम से उनकी गुजारिश है कि केंद्र में भी इस मामले की जल्द से जल्द पैरवी करें, ताकि गांव का नाम औपचारिक रूप से अजीतनगर हो जाए।
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