फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Fatehabad News ›   Now on the pretext of Zilla Parishad, the battle for supremacy of political parties begins

जिला परिषद के बहाने अब राजनीतिक दलों के वर्चस्व की जंग शुरू

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 29 Oct 2022 11:46 PM IST
विज्ञापन
Now on the pretext of Zilla Parishad, the battle for supremacy of political parties begins
फतेहाबाद। जिले में पंचायत चुनाव की जंग शुरू हो गई है। जिला परिषद के बहाने राजनीतिक दल अपना वर्चस्व बढ़ाने की कोशिश करेंगे। पिछली बार अपना चेयरमैन बनाने में कामयाब रही सत्ताधारी पार्टी भाजपा के लिए इस बार राह आसान नहीं होगी। इस बार इनेलो और कांग्रेस भी कड़ी टक्कर देने के मूड में है। हालांकि, जिला परिषद चुनाव में नए समीकरणों का सामना सभी राजनीतिक पार्टियों को करना होगा। मगर यह तय है कि जिला परिषद चुनाव के नतीजे आगामी विधानसभा चुनाव का रुख जरूर तय करेंगे।
विज्ञापन

गौरतलब है कि जिले में जिला परिषद के 18 वार्ड हैं। इन वार्डों में प्रत्याशियों के सामने आने का सिलसिला शुरू हो चुका है। नामांकन के समय तक सरगर्मियां चरम पर पहुंचेंगी।
विज्ञापन

फतेहाबाद में रैली के बाद इनेलो कार्यकर्ता हो चुके सक्रिय
इस बार जिला परिषद चुनाव में भाजपा-जजपा गठबंधन के बाद सबसे अधिक जोर इनेलो लगाएगी। पूर्व उप प्रधानमंत्री ताऊ देवीलाल की जयंती पर फतेहाबाद में प्रदेश स्तरीय रैली के बाद यहां के इनेलो कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ा हुआ है। रैली के समय से ही इनेलो के प्रधान महासचिव अभय चौटाला ने कार्यकर्ताओं को जिला परिषद चुनाव के लिए कड़ी मेहनत में जुट जाने का संदेश दे दिया था। कभी फतेहाबाद व रतिया विधानसभा सीट पर जीतने वाली इनेलो अब जिला परिषद के जरिये कमबैक की तैयारी में हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

जजपा भी जताएगी दावेदारी
उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के गृह क्षेत्र सिरसा के साथ लगता जिला होने के कारण फतेहाबाद जननायक जनता पार्टी के लिए भी महत्वपूर्ण जिला है। जजपा जिला परिषद चुनाव में यहां दावेदारी मजबूत रखेगी। फिलहाल जिले की तीन विधानसभा सीटों में से टोहाना से जजपा के ही विधायक देवेंद्र सिंह बबली हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि जिला परिषद चुनाव में जजपा सक्रियता से भागीदारी करते हुए चेयरमैन व वाइस चेयरमैन पद पर काबिज होने की कोशिश करेगी।
समर्थक कार्यकर्ताओं के सहारे कांग्रेस
कांग्रेस जिला परिषद के चुनाव पार्टी सिंबल पर लड़ने से इनकार कर चुकी है। ऐसे में कांग्रेस को समर्थक कार्यकर्ताओं के सहारे ही जमीन तलाशनी पड़ेगी। कांग्रेस के जिला स्तर के नेता अपने समर्थकों को वार्डों में प्रत्याशी बनाकर उनकी जीत के लिए प्रयास करेंगे।
पिछली बार के मुकाबले इस बार यह हैं बदले हुए समीकरण
दरअसल, पिछला चुनाव साल 2016 में हुआ था। उस समय हरियाणा में पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ भाजपा की सरकार बन चुकी थी। लोग लगातार भाजपा से जुड़ रहे थे। मगर अब किसान आंदोलन, बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई, डीएपी-यूरिया के दामों में वृद्धि जैसे मुद्दे सत्ताधारी पार्टी के नेताओं को झेलने पड़ेंगे।

जिला परिषद के चुनाव में राजनीतिक पार्टियों के वर्चस्व की जंग होती है। सरपंच व ब्लॉक समिति के चुनाव तो भाईचारे के मान लिए जाते हैं, लेकिन हर पार्टी अपने जिला पार्षद अधिक से अधिक बनवाना चाहेगी। बाद में इन्हीं पार्षदों के सहारे चेयरमैन व वाइस चेयरमैन पद हासिल किया जाएगा। इसलिए राजनीतिक दलों के लिए जिला परिषद का चुनाव बेहद महत्वपूर्ण है।
- हरदीप सिंह, राजनीतिक विश्लेषक
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed