{"_id":"635d6de6dc79bd55b36f0d97","slug":"now-on-the-pretext-of-zilla-parishad-the-battle-for-supremacy-of-political-parties-begins-fatehabad-news-hsr645800088","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिला परिषद के बहाने अब राजनीतिक दलों के वर्चस्व की जंग शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिला परिषद के बहाने अब राजनीतिक दलों के वर्चस्व की जंग शुरू
विज्ञापन
फतेहाबाद। जिले में पंचायत चुनाव की जंग शुरू हो गई है। जिला परिषद के बहाने राजनीतिक दल अपना वर्चस्व बढ़ाने की कोशिश करेंगे। पिछली बार अपना चेयरमैन बनाने में कामयाब रही सत्ताधारी पार्टी भाजपा के लिए इस बार राह आसान नहीं होगी। इस बार इनेलो और कांग्रेस भी कड़ी टक्कर देने के मूड में है। हालांकि, जिला परिषद चुनाव में नए समीकरणों का सामना सभी राजनीतिक पार्टियों को करना होगा। मगर यह तय है कि जिला परिषद चुनाव के नतीजे आगामी विधानसभा चुनाव का रुख जरूर तय करेंगे।
गौरतलब है कि जिले में जिला परिषद के 18 वार्ड हैं। इन वार्डों में प्रत्याशियों के सामने आने का सिलसिला शुरू हो चुका है। नामांकन के समय तक सरगर्मियां चरम पर पहुंचेंगी।
फतेहाबाद में रैली के बाद इनेलो कार्यकर्ता हो चुके सक्रिय
इस बार जिला परिषद चुनाव में भाजपा-जजपा गठबंधन के बाद सबसे अधिक जोर इनेलो लगाएगी। पूर्व उप प्रधानमंत्री ताऊ देवीलाल की जयंती पर फतेहाबाद में प्रदेश स्तरीय रैली के बाद यहां के इनेलो कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ा हुआ है। रैली के समय से ही इनेलो के प्रधान महासचिव अभय चौटाला ने कार्यकर्ताओं को जिला परिषद चुनाव के लिए कड़ी मेहनत में जुट जाने का संदेश दे दिया था। कभी फतेहाबाद व रतिया विधानसभा सीट पर जीतने वाली इनेलो अब जिला परिषद के जरिये कमबैक की तैयारी में हैं।
विज्ञापन
जजपा भी जताएगी दावेदारी
उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के गृह क्षेत्र सिरसा के साथ लगता जिला होने के कारण फतेहाबाद जननायक जनता पार्टी के लिए भी महत्वपूर्ण जिला है। जजपा जिला परिषद चुनाव में यहां दावेदारी मजबूत रखेगी। फिलहाल जिले की तीन विधानसभा सीटों में से टोहाना से जजपा के ही विधायक देवेंद्र सिंह बबली हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि जिला परिषद चुनाव में जजपा सक्रियता से भागीदारी करते हुए चेयरमैन व वाइस चेयरमैन पद पर काबिज होने की कोशिश करेगी।
समर्थक कार्यकर्ताओं के सहारे कांग्रेस
कांग्रेस जिला परिषद के चुनाव पार्टी सिंबल पर लड़ने से इनकार कर चुकी है। ऐसे में कांग्रेस को समर्थक कार्यकर्ताओं के सहारे ही जमीन तलाशनी पड़ेगी। कांग्रेस के जिला स्तर के नेता अपने समर्थकों को वार्डों में प्रत्याशी बनाकर उनकी जीत के लिए प्रयास करेंगे।
पिछली बार के मुकाबले इस बार यह हैं बदले हुए समीकरण
दरअसल, पिछला चुनाव साल 2016 में हुआ था। उस समय हरियाणा में पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ भाजपा की सरकार बन चुकी थी। लोग लगातार भाजपा से जुड़ रहे थे। मगर अब किसान आंदोलन, बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई, डीएपी-यूरिया के दामों में वृद्धि जैसे मुद्दे सत्ताधारी पार्टी के नेताओं को झेलने पड़ेंगे।
जिला परिषद के चुनाव में राजनीतिक पार्टियों के वर्चस्व की जंग होती है। सरपंच व ब्लॉक समिति के चुनाव तो भाईचारे के मान लिए जाते हैं, लेकिन हर पार्टी अपने जिला पार्षद अधिक से अधिक बनवाना चाहेगी। बाद में इन्हीं पार्षदों के सहारे चेयरमैन व वाइस चेयरमैन पद हासिल किया जाएगा। इसलिए राजनीतिक दलों के लिए जिला परिषद का चुनाव बेहद महत्वपूर्ण है।
- हरदीप सिंह, राजनीतिक विश्लेषक
विज्ञापन
गौरतलब है कि जिले में जिला परिषद के 18 वार्ड हैं। इन वार्डों में प्रत्याशियों के सामने आने का सिलसिला शुरू हो चुका है। नामांकन के समय तक सरगर्मियां चरम पर पहुंचेंगी।
विज्ञापन
फतेहाबाद में रैली के बाद इनेलो कार्यकर्ता हो चुके सक्रिय
इस बार जिला परिषद चुनाव में भाजपा-जजपा गठबंधन के बाद सबसे अधिक जोर इनेलो लगाएगी। पूर्व उप प्रधानमंत्री ताऊ देवीलाल की जयंती पर फतेहाबाद में प्रदेश स्तरीय रैली के बाद यहां के इनेलो कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ा हुआ है। रैली के समय से ही इनेलो के प्रधान महासचिव अभय चौटाला ने कार्यकर्ताओं को जिला परिषद चुनाव के लिए कड़ी मेहनत में जुट जाने का संदेश दे दिया था। कभी फतेहाबाद व रतिया विधानसभा सीट पर जीतने वाली इनेलो अब जिला परिषद के जरिये कमबैक की तैयारी में हैं।
विज्ञापन
जजपा भी जताएगी दावेदारी
उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के गृह क्षेत्र सिरसा के साथ लगता जिला होने के कारण फतेहाबाद जननायक जनता पार्टी के लिए भी महत्वपूर्ण जिला है। जजपा जिला परिषद चुनाव में यहां दावेदारी मजबूत रखेगी। फिलहाल जिले की तीन विधानसभा सीटों में से टोहाना से जजपा के ही विधायक देवेंद्र सिंह बबली हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि जिला परिषद चुनाव में जजपा सक्रियता से भागीदारी करते हुए चेयरमैन व वाइस चेयरमैन पद पर काबिज होने की कोशिश करेगी।
समर्थक कार्यकर्ताओं के सहारे कांग्रेस
कांग्रेस जिला परिषद के चुनाव पार्टी सिंबल पर लड़ने से इनकार कर चुकी है। ऐसे में कांग्रेस को समर्थक कार्यकर्ताओं के सहारे ही जमीन तलाशनी पड़ेगी। कांग्रेस के जिला स्तर के नेता अपने समर्थकों को वार्डों में प्रत्याशी बनाकर उनकी जीत के लिए प्रयास करेंगे।
पिछली बार के मुकाबले इस बार यह हैं बदले हुए समीकरण
दरअसल, पिछला चुनाव साल 2016 में हुआ था। उस समय हरियाणा में पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ भाजपा की सरकार बन चुकी थी। लोग लगातार भाजपा से जुड़ रहे थे। मगर अब किसान आंदोलन, बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई, डीएपी-यूरिया के दामों में वृद्धि जैसे मुद्दे सत्ताधारी पार्टी के नेताओं को झेलने पड़ेंगे।
जिला परिषद के चुनाव में राजनीतिक पार्टियों के वर्चस्व की जंग होती है। सरपंच व ब्लॉक समिति के चुनाव तो भाईचारे के मान लिए जाते हैं, लेकिन हर पार्टी अपने जिला पार्षद अधिक से अधिक बनवाना चाहेगी। बाद में इन्हीं पार्षदों के सहारे चेयरमैन व वाइस चेयरमैन पद हासिल किया जाएगा। इसलिए राजनीतिक दलों के लिए जिला परिषद का चुनाव बेहद महत्वपूर्ण है।
- हरदीप सिंह, राजनीतिक विश्लेषक