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अब चेन पुलिंग के बाद रेलगाड़ी के चलने का नहीं करना होगा लंबा इंतजार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 15 May 2022 10:48 PM IST
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Now after chain pulling, there will be no long wait for the train to run
टोहाना के जमालपुर शेखां के रेलवे स्टेशन। फाइल फोटो - फोटो : Fatehabad
फतेहाबाद। रेलगाड़ियों में अक्सर चेन पुलिंग होने के कारण यात्रियों को दोबारा रेलगाड़ी चलने का इंतजार करना पड़ता रहा है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा, चेन पुलिंग की वजह से रेलगाड़ियां अब बीच रास्ते में ट्रैक पर खड़ी नहीं रहेंगी। यात्रियों की परेशानी और ट्रेन की लेटलतीफी दूर करने के लिए रेलवे ने एक्शन प्लान तैयार किया है। ट्रेनों में ड्राइवर और गार्ड के अतिरिक्त रेलवे अब टीटीई (टिकट जांच दल कर्मचारियों) को भी अलार्म चेन पुलिंग (एसीपी) रिसेंटिग चाबी देने जा रहा है।
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दरअसल, चेन पुलिंग कर ट्रेनों को रोकने के बढ़ते मामले रेलवे के लिए बड़ा सिरदर्द बनते जा रहे हैं। इससे रेलवे के राजस्व का नुकसान तो होता ही था साथ में ट्रेन लेट होने के कारण समय पालन और सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे थे। इसका समाधान अब रेलवे ने निकाल लिया है। जिसके तहत जिन ट्रेनों में टीटीई जाते हैं, उनको रिसेटिंग चाबी दी जाएगी। रेलवे अब एलबीएच कोच वाली ट्रेेनें चला रहा है, इस कोच में एक बार चेन पुलिंग से 15 से 20 मिनट तक ट्रेन लेट होती है। दोबारा एयर प्रेशर बनाने में समय के साथ खर्च बढ़ता है। इसमें यह भी खासियत है कि जिस कोच की चेन पुलिंग होती है, उसी में चाबी लगाने पर ही पुलिंग खत्म होगी। इसके बाद ट्रेन चल सकेंगी। संवाद
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समय रहते चलने लगेंगी ट्रेन
अभी तक चेन पुलिंग होने पर ड्राइवर या गार्ड में किसी को चेन पुलिंग वाले कोच तक पहुंचकर चाबी का इस्तेमाल कर एयर प्रेशर लीकेज बंद करना होता था। फिर दोबारा एयर प्रेशर बनता था तो ट्रेन आगे बढ़ती थी। ऐेसे में इंजन या सबसे पिछले वाले कोच से ड्राइवर या गार्ड को पहुंचने में समय लगता था। इसी समस्या का मद्देनजर रखते हुए रेलवे ने टीटीई को रिसेंटिग चाबी देने की नीति बनाई है। कई ट्रेनों के टीटीई को तो रिसेटिंग चाबी दे दी गई हैं। टीटीई तुरंत अपने पास मौजूद चाबी का इस्तेमाल कर एयर प्रेशर लीकेज रोक सकेंगे। वहीं ट्रेनें भी समय रहते चलने लगेंगी।
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एक मिनट ट्रेन के रुकने पर 20 हजार से अधिक का फटका
एक डीजल से चलने वाली पैसेंजर ट्रेन एक मिनट रुकती है तो उससे 20,401 रुपये का नुकसान होता है। वहीं इलेक्ट्रिक ट्रेन को 20,459 रुपये का नुकसान होता है। इसी तरह डीजल से चलने वाली गुड्स ट्रेन को एक मिनट रुकने पर 13,344 रुपये और गुड्स इलेक्ट्रिक ट्रेन को 13,392 रुपये का नुकसान होता है।
ट्रेन अनेक चाबी बस एक
सबसे ज्यादा चेन पुलिंग के मामले रात की ट्रेनों में होते हैं। चेन पुलिंग के बाद रिसेटिंग वाली यह एल चाबी हर ट्रेन में इस्तेमाल हो सकती है। यही वजह है कि सूची बनाकर चाबी ड्राइवर, टीटीई, गार्ड और अन्य को दी जाएगी। ऐसे में ट्रेनें कोई भी हो चाबी एक ही काम आ जाएगी।

कोट
रेलवे ने ट्रेनों में चेन पुलिंग रोकने ट्रेनों में टीटीई को भी चाबी देने जा रहा है। चेन पुलिंग होने पर टीटीई तुरंत जाकर चाबी लगाकर पुलिंग बंद कर सकता है। इससे ट्रेनों के खड़ी होने के समय में कमी आएगी। इससे रेलवे के संचालन में ट्रेनों का अनावश्यक समय बचेगा।
-डिंपी गर्ग, डीआरएम, दिल्ली
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