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30 दिन से सिविल सर्जन नहीं, अधिकारी और कर्मचारी बेपरवाह

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 20 Apr 2022 11:12 PM IST
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No civil surgeon since 30 days, officers and employees careless
फतेहाबाद में कोरोना से बचाव का टीका लगवाती पात्र। - फोटो : Fatehabad
फतेहाबाद। घर वाले घर नहीं और हमें किसी का डर नहीं, ये लाइन आजकल फतेहाबाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों पर बिल्कुल सटीक बैठ रही है। 30 दिन से सिविल सर्जन नहीं है और विभाग के अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक बेपरवाह हो रहे हैं। उप सिविल सर्जन डॉ. संगीता को सिविल सर्जन का कार्यभार दिया गया है लेकिन अधिकारी सिर्फ फाइलें समेटने तक सीमित रह गए हैं।
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बता दें कि जिले में कोरोना टीकाकरण और सैंपलिंग को लेकर प्लानिंग तक नहीं बन रही है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े खुद इसको लेकर हालात बया कर रहे हैं। जिले में करीब सवा दो लाख लोगों की कोरोना की दूसरी डोज ड्यू हो चुकी है, यहां तक कि बच्चों से लेकर किशोरों तक का टीकाकरण अभियान सिरे नहीं चढ़ा है। सिविल सर्जन कार्यालय के मौजूदा अधिकारी कोरोना टीकाकरण और सैंपलिंग बढ़ाने के लिए कोई कदम नहीं उठा रहे है। 12 से 14 आयु वर्ग का टीकाकरण सिर्फ पांच हजार बच्चों का ही हुआ है। 15 से 17 आयु वर्ग के किशोरों का टीकाकरण भी 40 हजार से नीचे आकर थम गया है। दूसरी डोज लगवाने के लिए किशोर भी नहीं आ रहे हैं। 12 हजार किशोरों को ही दूसरी डोज लगी है।
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कर्मचारियों की भर्ती चार माह से अटकी
सिविल सर्जन कार्यालय ने जनवरी माह में करीब 18 अलग-अलग पदों पर भर्तियां निकली थी। जिसमें मुख्य तौर पर आयुष मेडिकल ऑफिसर, डीपीएम, डीपीसी, स्टाफ नर्स, डीडीएम, फार्मासिस्ट, एलटी व एएनएम के पद शामिल है। इसको लेकर मार्च में लिखित परीक्षा होनी थी, चार मार्च को पत्र जारी परीक्षा को रद्द कर दिया गया। इसके बाद इसे सिरे नहीं चढ़ाया गया है। करीब 750 से 800 आवेदनकर्ता भर्ती का इंतजार कर रहे है।
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अस्पतालों की मॉनिटरिंग तक रुकी
जिले में नागरिक अस्पताल फतेहाबाद, टोहाना और रतिया शामिल है। इसके अलावा 5 सीएचसी, 18 पीएचसी और 131 सब सेंटर शामिल है। लेकिन हालात ये हैं कि अस्पतालों की मॉनिटरिंग तक नहीं हो रही है।
चार अप्रैल को ट्रांसफर के आदेश हुए थे जारी
तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. वीरेश भूषण लंबी छुट्टी पर चले गए थे लेकिन इसी बीच चार अप्रैल को ट्रांसफर के आदेश जारी हो गए। अब पिछले 15 दिनों से जिले में सिविल सर्जन का पद खाली है। 30 दिनों से कार्यभार उप सिविल सर्जन संभाल रहीं हैं।
कोविड कर्मचारी हटाए, नई प्लानिंग नहीं बनी, लैब 20 दिन से बंद
जिले में कोविड कर्मचारी 77 थे, जिनका कार्यकाल 31 मार्च के बाद आगे नहीं बढ़ाया गया। 20 दिन से आरटीपीसीआर लैब बंद है। जिले में आरटीपीसीआर सैंपल लेने के लिए किसी को ट्रेनिंग तक नहीं दी गई। हालात ये है कि इमरजेंसी में 25 से 30 रैपिड एंटीजन सैंपल ही लिए जा रहे है।
निजी अस्पताल ने बूस्टर के लिए नहीं मांगी डोज
18 आयु वर्ग के बूस्टर डोज लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने आदेश जारी किए थे कि निजी अस्पताल में लगवा सकते हैं। लेकिन हालात ये है कि जिले में एक भी निजी अस्पताल ने डिमांड नहीं की है।
वैक्सीन की मियाद खत्म होने का खतरा, मांगी रिपोर्ट
कोरोना टीकाकरण की रफ्तार कम होने से वैक्सीन का जिले में स्टॉक ज्यादा हो गया है। वैक्सीन की मियाद 6 माह की होती है। फिलहाल जो स्टॉक है उसके अनुसार एक से दो माह में वैक्सीन की मियाद खत्म होने वाली है। इसको लेकर जिला स्वास्थ्य विभाग ने सेंटरों से रिपोर्ट मांगी है।

जिले में अब तक हुआ कोरोना टीकाकरण
पात्र पहली डोज दूसरी डोज
स्वास्थ्यकर्मी 4793 4753
फ्रंटलाइन वर्कर्स 2411 2024
60 साल से ऊपर 84194 64327
45 से 59 साल 144042 119099
18 से 44 साल 402483 265863
15 से 17 साल 38284 12096
12 से 44 साल 5150 141
कोट
कोरोना टीकाकरण के लिए जितने लोग आ रहे है उन्हें लगाया जा रहा है। किसी के साथ धक्का तो नहीं किया जा सकता है। जहां तक भर्ती की बात है, सिविल सर्जन के आने बाद ही सिरे चढ़ाया जाएगा।
डॉ. संगीता अबरोल, कार्यकारी सिविल सर्जन
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