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Fatehabad News: फतेहाबाद में गेहूं का आटा पहुंचा 33 रुपये किलो, एक माह में हुई आठ रुपये की बढ़ोतरी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 27 Jan 2023 11:27 PM IST
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NA
फतेहाबाद। गेहूं के दामों में हो रही लगातार बढ़ोतरी से आटे के दामों में उछाल आ गया है। फतेहाबाद में आटे के दाम रिकॉर्ड 33 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गए हैं। आटे के बढ़े दामों का सीधा असर आम आदमी की रसोई पर देखने को मिल रहा है। केंद्र सरकार गेहूं की कीमतों के नियंत्रण के लिए लगातार कदम उठा रही है, लेकिन उनका असर जमीनी स्तर पर नहीं दिख रहा है। इसका कारण यह है कि एफसीआई हर साल ऑनलाइन टेंडर करके व्यापारियों को गेहूं बेचती है, इस बार ऐसा नहीं हो पाया। वहीं बफर स्टॉक न होने के कारण ही गेहूं के दामों में बढ़ोतरी हुई है।
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दरअसल, गेहूं के दामों में बढ़ोतरी का सिलसिला पिछले एक माह से शुरू हुआ है। फतेहाबाद में पहले गेहूं 2100 से 2200 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा था। एक माह में ही इसके दामों में 800 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ोतरी हो गई है। इसका असर गेहूं के आटे पर भी पड़ा है। फतेहाबाद की आटा चक्कियों पर 10 किलोग्राम आटे की थैलियां इसी माह की शुरुआत में 250 रुपये में मिल रही थी। मौजूदा समय में इसके दाम 80 रुपये बढ़कर 330 रुपये प्रति 10 किलोग्राम तक पहुंच गए हैं। लोगों के सामने बड़ा संकट इसलिए भी है, क्योंकि तीन सप्ताह में ही गेहूं की कीमतों में तीसरी बार वृद्धि देखने को मिल रही है। 10 दिन पहले 10 किलोग्रााम आटे की थैली 300 रुपये में मिल रही थी। अब यह 30 रुपये बढ़कर 330 रुपये में मिल रही है। इसका एक बड़ा कारण स्टॉकिस्ट भी हैं, जो अब महंगे दामों में गेहूं मार्केट में दे रहे हैं। फतेहाबाद में कोई बड़ी फ्लोर मिल तो नहीं है, लेकिन करीब 50 आटा चक्कियां हैं। आटा चक्की मालिक अनाज मंडी में व्यापारियों से गेहूं खरीदते हैं, लेकिन महंगे दामों में गेहूं मिलने के कारण उनको भी अपने खर्चे के हिसाब से आटे के दाम बढ़ाने पड़ रहे हैं। जानकारों का कहना है कि गेहूं की नई पैदावार मार्केट में आने में तीन महीने से अधिक का वक्त लग सकता है। जब तक केंद्र सरकार मार्केट में नहीं उतारेगी, तबतक गेहूं और आटे की कीमतों में नरमी मुश्किल ही देखने को मिलेगी। इसके अलावा गेहूं से बनने वाले उत्पाद भी महंगाई की चपेट में आ सकते हैं। संवाद
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निम्न मध्यम व राशन कार्ड कटने वालों को होगी परेशानी
गेहूं के आटे में लगातार हो रही वृद्धि के कारण निम्न मध्यम वर्गीय व जिन लोगों के पीपीपी की वजह से राशन कार्ड कट गए हैं, उनको परेशानी हो सकती है। खासतौर पर उन लोगों को जो प्राइवेट नौकरी करते हैं और किराये के मकानों में रह रहे हैं। साथ ही उनके राशन कार्ड बीपीएल नहीं है। वहीं जिन पात्र परिवारों के राशन कार्ड बन गए हैं, उनको भी महंगाई में दिक्कत आएगी।
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कोट
मेरे पति का कई साल पहले देहांत हो चुका है। मेरे दो लड़के हैं, एक अलग रहता है। दूसरा मजदूरी करता है। मेरी विधवा पेंशन से ही मेरा गुजारा चलता है। अब बीपीएल राशन कार्ड भी कट गया। गेहूं के दाम 30 रुपये प्रति किलोग्राम हो गए हैं, ऐसे में गुजारा चलाना मुश्किल हो जाएगा।
-गुड्डी देवी, निवासी, वार्ड नंबर आठ, फतेहाबाद
मैं झुग्गी झोंपड़ी में रहता हूं। हमारा पहले बीपीएल राशन कार्ड बना हुआ था, लेकिन इस बार काट दिया गया। परिवार में एक माह में 50 किलोग्राम आटा लग जाता है। इस बार 33 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से आटा लाना पड़ा।
-नैब सिंह, निवासी, सिंगीकाट मोहल्ला फतेहाबाद
मेरी उम्र 60 साल से अधिक है। दिल का मरीज हूं, घर में मैं और मेरी बीवी ही रहते हैं। अभी तक बुढ़ापा पेंशन भी नहीं बनी थी कि बीपीएल राशन कार्ड भी काट दिया गया। दो दिन पुरानी रोटी खाकर गुजारा कर रहे हैं और अब गेहूं के रेट बढ़ जाने से तो भुखमरी के हालात हो जाएंगे।
-रामकुमार, निवासी, वार्ड नंबर नौ, फतेहाबाद
हम आटा पीसने के लिए अनाज मंडी से गेहूं खरीदते हैं। इस बार गेहूं के दामों में काफी तेजी आई है। यह अंतरराष्ट्रीय लेवल के चलते हुआ है, क्योंकि पाकिस्तान व श्रीलंका में आटा बहुत महंगा बिक रहा है। इसके अलावा यूक्रेन युद्ध का भी असर पड़ा है।
-दयानंद गर्ग, आटा चक्की मालिक
युक्रेन युद्ध के कारण गेहूं की डिमांड अधिक हो गई है। व्यापारी वहां पर गेहूं भेज रहे हैं, जिस कारण गेहूं की शॉर्टेज मार्केट में हो गई है। सरकार ने इस पर फिलहाल प्रतिबंध भी लगाया है। पिछले साल गेहूं का झाड़ कम हुआ था, जिस कारण उत्पादन भी कम रहा। यह भी एक मुख्य कारण है।

-जगदीश भादू, प्रधान, अनाज मंडी व्यापार मंडल, फतेहाबाद।
इस बार मार्केट में गेहूं कम है और डिमांड अधिक हो गई है। इसके अलावा एफसीआई हर साल ऑनलाइन टेंडर करके व्यापारियों को गेहूं बेचती है, इस बार ऐसा नहीं हो पाया। बफर स्टॉक न होने के कारण ही गेहूं के दामों में बढ़ोतरी हुई है।
-विनीत जैन, डीएफएससी, फतेहाबाद
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