{"_id":"63d40f85b462f271e427496d","slug":"na-fatehabad-news-c-21-1-40400-2023-01-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Fatehabad News: अनचाहे शिशु को अस्पताल के पालने में छोड़ सकेंगे, विभाग करेगा पालन-पोषण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Fatehabad News: अनचाहे शिशु को अस्पताल के पालने में छोड़ सकेंगे, विभाग करेगा पालन-पोषण
विज्ञापन
नागरिक अस्पताल में शिशु पालना का शुभारंभ करते उपायुक्त जगदीश शर्मा।
फतेहाबाद। अनचाहे नवजात शिशु को अब फेंकने के बजाय अस्पताल के ही पालने में छोड़ा जा सकेगा। प्रशासन शिशु का पालन-पोषण करेगा और उसे गोद देने की प्रक्रिया शुरू करेगा। जिले में अब तक 6 शिशुओं को गोद दिया जा चुका है। इसमें तीन बच्चे ऐसे हैं, जिन्हें सरेंडर किया गया था।
शिशु के संरक्षण और उसे जीवित रखने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग के तत्वावधान में संचालित जिला बाल संरक्षण इकाई ने यह शुरुआत की है। बच्चे के पालन-पोषण और उसे गोद देने की प्रक्रिया जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा की जाएगी। अनचाहे नवजात बच्चे को संरक्षण देने के लिए नागरिक अस्पताल में शिशु पालना लगाया गया है। डीसी जगदीश शर्मा ने इसका शुभारंभ किया। रतिया और टोहाना के अस्पताल में भी शिशु पालना की शुरूआत की गई है।
उपायुक्त ने कहा कि अनचाहे और विकट परिस्थितियों में पैदा हुए नवजात बच्चे को फेंक देने की घटनाएं घटित होती रहती है। नवजात बच्चे को फेंकना कानूनी अपराध है। जीने का अधिकार हर किसी को है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने ऐसे नवजात बच्चों के संरक्षण का बीड़ा उठाया है और शिशु पालना स्थापित किया है। इस शिशु पालना में कोई भी अनजान नवजात बच्चे को पालने में डालकर उसको जीवनदान दे सकते हैं। उनकी पहचान गुप्त रखी जाएगी और कोई भी कार्रवाई नहीं होगी।
विज्ञापन
स्टेट अडॉप्शन एजेंसी को भेजा जाएगा बच्चा
शिशु पालना में कोई बच्चा मिलेगा तो उस बच्चे को जिला बाल संरक्षण इकाई व स्वास्थ्य विभाग द्वारा रेस्क्यू करते हुए खाने-पीने की जरूरतों, बीमारियों से बचाव के उपाय किए जाएंगे। जिला बाल कल्याण समिति को भी सूचना दी जाएगी ताकि बच्चे को स्टेट अडॉप्शन एजेंसियों व शिशु गृह में भेजा जा सके और उनकी मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके। जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. दर्शना सिंह व जिला बाल संरक्षण अधिकारी सुरजीत बाजिया ने बताया कि विभाग के निर्देशानुसार सभी स्वास्थ्य केंद्रों में शिशु पालना स्थापित किया गया है।
जिले से 6 बच्चे स्टेट अडॉप्शन एजेंसी को भेजे गए
जिले से पिछले पांच साल में करीब 6 बच्चे स्टेट अडॉप्शन एजेंसी को भेजे गए है। यहां से इन बच्चों को गोद लिया गया है। पिछले साल गांव बरसीन के पास एक नवजात बच्ची सड़क किनारे मिली थी। हालांकि बाद में बच्ची के परिवार का पता चल गया था लेकिन बाद में उसे गोद के लिए भेजा गया था। वर्ष 2020 में रेलवे स्टेशन पर तीन साल की लड़की मिली थी। फतेहाबाद के बस स्टैंड पर वर्ष 2019 में एक साढ़े तीन साल की लड़की मिली थी। इसके अलावा दो लड़के और एक लड़की को सरेंडर किया जा चुका है। जिन्हें गोद की प्रक्रिया के लिए स्टेट अडॉप्शन एजेंसी को भेजा गया था।
विज्ञापन
शिशु के संरक्षण और उसे जीवित रखने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग के तत्वावधान में संचालित जिला बाल संरक्षण इकाई ने यह शुरुआत की है। बच्चे के पालन-पोषण और उसे गोद देने की प्रक्रिया जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा की जाएगी। अनचाहे नवजात बच्चे को संरक्षण देने के लिए नागरिक अस्पताल में शिशु पालना लगाया गया है। डीसी जगदीश शर्मा ने इसका शुभारंभ किया। रतिया और टोहाना के अस्पताल में भी शिशु पालना की शुरूआत की गई है।
विज्ञापन
उपायुक्त ने कहा कि अनचाहे और विकट परिस्थितियों में पैदा हुए नवजात बच्चे को फेंक देने की घटनाएं घटित होती रहती है। नवजात बच्चे को फेंकना कानूनी अपराध है। जीने का अधिकार हर किसी को है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने ऐसे नवजात बच्चों के संरक्षण का बीड़ा उठाया है और शिशु पालना स्थापित किया है। इस शिशु पालना में कोई भी अनजान नवजात बच्चे को पालने में डालकर उसको जीवनदान दे सकते हैं। उनकी पहचान गुप्त रखी जाएगी और कोई भी कार्रवाई नहीं होगी।
विज्ञापन
स्टेट अडॉप्शन एजेंसी को भेजा जाएगा बच्चा
शिशु पालना में कोई बच्चा मिलेगा तो उस बच्चे को जिला बाल संरक्षण इकाई व स्वास्थ्य विभाग द्वारा रेस्क्यू करते हुए खाने-पीने की जरूरतों, बीमारियों से बचाव के उपाय किए जाएंगे। जिला बाल कल्याण समिति को भी सूचना दी जाएगी ताकि बच्चे को स्टेट अडॉप्शन एजेंसियों व शिशु गृह में भेजा जा सके और उनकी मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके। जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. दर्शना सिंह व जिला बाल संरक्षण अधिकारी सुरजीत बाजिया ने बताया कि विभाग के निर्देशानुसार सभी स्वास्थ्य केंद्रों में शिशु पालना स्थापित किया गया है।
जिले से 6 बच्चे स्टेट अडॉप्शन एजेंसी को भेजे गए
जिले से पिछले पांच साल में करीब 6 बच्चे स्टेट अडॉप्शन एजेंसी को भेजे गए है। यहां से इन बच्चों को गोद लिया गया है। पिछले साल गांव बरसीन के पास एक नवजात बच्ची सड़क किनारे मिली थी। हालांकि बाद में बच्ची के परिवार का पता चल गया था लेकिन बाद में उसे गोद के लिए भेजा गया था। वर्ष 2020 में रेलवे स्टेशन पर तीन साल की लड़की मिली थी। फतेहाबाद के बस स्टैंड पर वर्ष 2019 में एक साढ़े तीन साल की लड़की मिली थी। इसके अलावा दो लड़के और एक लड़की को सरेंडर किया जा चुका है। जिन्हें गोद की प्रक्रिया के लिए स्टेट अडॉप्शन एजेंसी को भेजा गया था।