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मानसून सिर पर, नहीं टूटी अधिकारियों की नींद
fatehabad
Updated Wed, 18 Jun 2014 11:20 PM IST
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मानसून सिर पर है, लेकिन बरसात में जलभराव को रोकने के लिए जनस्वास्थ्य विभाग के पास अभी तक कोई योजना नहीं है। आम दिनों में जब शहर की सीवरेज व्यवस्था बदहाल रहती है। लगातार सीवरेज ओवरफ्लो और पानी मिक्ंिसग की शिकायतें आ रही हैं तो बरसाती दिनों में शहर का क्या हाल होगा, यह सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
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फतेहाबाद शहर की ठाकर बस्ती, कबीर बस्ती, अशोक नगर और हंस मार्केट सहित अन्य कई मोहल्ले में सीवरेज की व्यवस्था बदहाल पड़ी है। जगह-जगह सीवरेज से निकलने वाली गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। सीवरेज के मेन हॉल ओवरफ्लो हो रहे हैं। वार्डवासी अपनी शिकायतें पार्षद से लेकर उपायुक्त तक कर चुके हैं, लेकिन सीवरेज की समस्या अभी तक जस की तस बनी हुई है। हंस मार्केट के दुकानदार सुनील नारंग, रामप्रसाद चावला, देवेंद्र बिश्नोई और मुकेश कुमार आदि ने बताया कि उनकी दुकान के सामने सारा दिन सीवरेज का पानी जमा रहता है। ऐसे में यदि बारिश शुरू हो जाती है तो लोगों की मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।
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टूटे पड़े हैं सीवरेज के ढक्कन
शहर के ज्यादातर सीवरेज के ढक्कन टूटे पड़े हैं। कई सीवरेज के मेन हॉल के ढक्कन कहां हैं, किसी को नहीं पता, बरसात के दिनों में शहर के ज्यादातर सीवरेज ओवरफ्लो होने शुरू हो जाते हैं। खासकर वह सीवर जिसमें या तो ढक्कन टूटा हो या फिर ढक्कन है ही नहीं। बरसाती दिनों में सड़काें पर कई-कई फुट तक पानी भर जाता है ऐसे में राहगीराें व वाहन चालकों को नहीं पता होता कि कहां सीवरेज है और कहां ढक्कन नहीं है। ऐसे में बरसात में कोई भी बड़ा हादसा हो सकता है।
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कम नहीं हुईं पेयजल में मिक्ंिसग की शिकायतें
दूसरी ओर शहरवासियों और ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी पेयजल में सीवरेज के पानी की मिक्ंिसग की शिकायतें आ रही हैं। किसी न किसी गांव में पेयजल की समस्या सामने आती ही है। हालांकि जनस्वास्थ्य विभाग दावा कर चुका है कि सीवरेज की सफाई करवा दी गई है जगह-जगह टूटी पेयजल पाइपों को भी सही करवा दिया गया है। अब लोगों को स्वच्छ पानी मिल रहा है। पिछले दिनों स्वास्थ्य विभाग द्वारा लिए गए पानी के सैंपल का फेल आना जनस्वास्थ्य विभाग के दावों की पोल खोलता है।
विभाग के पास नहीं है कोई विशेष प्लानिंग
जनस्वास्थ्य विभाग ने मानसून के दिनों में बिगड़ने वाले हालातों से निपटने के लिए अभी तक कोई प्लानिंग नहीं की है। ऐसे में इस बात का साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि मानसून में शहर का क्या हाल होने वाला है।
21 सीवरमैन के कंधों पर है जिम्मेदारी
शहर की सीवरेज सफाई व्यवस्था को सुचारु रूप से बनाए रखने के लिए विभाग के पास मात्र 21 सीवरमैन हैं। शहर की सफाई व्यवस्था के लिए यह संख्या बहुत कम है। विभाग का कहना है कि बहुत अधिक जरूरत पड़ने पर कुछ अन्य कर्मी ठेके पर ले लिए जाते हैं।
एस्टीमेंट नहीं हुआ पास : अधिकारी
जनस्वास्थ्य विभाग के कार्यकारी अभियंता विक्रम ने कहा कि रेजलेंस का एस्टीमेट बनाकर हेड ऑफिस भेजा गया था, लेकिन एस्टीमेट पास नहीं हो पाया। फिलहाल जो भी काम चल रहा है उसे रुटीन के हिसाब से ही चलाया जाएगा। अभी तक कोई विशेष प्लानिंग नहीं है विभाग अपने स्तर पर ही काम करेगा। जहां से जो भी शिकायत आएंगी, उसका समाधान किया जाएगा। टूटे पड़े व बिना ढक्कन के सीवर पर जल्द ही नए ढक्कन लगवा दिए जाएंगे।