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मॉडल संस्कृति स्कूल अब हिंदी और अंग्रेजी दोनों माध्यम से होगी पढ़ाई
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फतेहाबाद में दाखिले को लेकर प्रक्रिया पूरी करते शिक्षक।
- फोटो : Fatehabad
फतेहाबाद। राजकीय मॉडल संस्कृति यानी इंग्लिश मीडियम बन चुके स्कूलों में अब हिंदी माध्यम से पढ़ने वाले छात्र को दाखिले से स्कूल मना नहीं कर पाएंगे। स्कूल में अंग्रेजी और हिंदी माध्यम के अलग-अलग सेक्शन होंगे। अगर कोई विद्यार्थी अंग्रेजी माध्यम नहीं लेना चाहता है तो उसे हिंदी माध्यम में दाखिला देना होगा। जिले में पिछले साल 87 प्राइमरी और 6 वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों को मॉडल संस्कृति बनाया गया था। अब नए सत्र में मॉडल संस्कृति स्कूल के शिक्षक हिंदी माध्यम लेने वाले छात्रों को दाखिले से मना कर रहे थे। इसको लेकर फतेहाबाद में विवाद भी हो चुका है।
बता दें कि वीरवार को शिक्षा विभाग निदेशालय ने स्पष्ट कर दिया है कि राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक और प्राथमिक विद्यालय में जिनके नजदीक कोई अन्य राजकीय विद्यालय नहीं है ऐसे सभी में हिंदी और अंग्रेजी माध्यम दोनों सेक्शन जारी होंगे। राजकीय प्राइमरी स्कूलों में पढ़ रहे विद्यार्थियों से पहले फीस नहीं ली जा रही थी। लेकिन अब जारी हुए पत्र के मुताबिक मॉडल संस्कृति स्कूल में हिंदी माध्यम लेकर पढ़ने वाले विद्यार्थी को फीस देनी होगी। विकास निधि के रूप में 500 रुपये दाखिला और 200 रुपये प्रति माह फीस देनी होगी।
जिले में राजकीय मॉडल संस्कृति प्राइमरी स्कूल : 87
जिले में राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल : 6
1.80 लाख से आय वाले परिवारों के बच्चों को मिलेगी मासिक अंशदान में छूट
मॉडल संस्कृति स्कूल जहां पनर हिंदी और अंग्रेजी सेक्शन है। वहां के विद्यार्थियों से विद्यालय विकास निधि ली जाएगी और ऐसे विद्यार्थी जिनके अभिभावकों की आय 1.80 लाख रुपये वार्षिक से कम है उन्हें विद्यालय निधि के तहत लिए जाने वाले मासिक अंशदान से छूट मिलेगी।
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सीबीएसई से मिली है मॉडल संस्कृति विद्यालयों को मान्यता
राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों को सीबीएसई से मान्यता मिली है। कक्षा छठी से बारहवीं के विद्यार्थी यहां पर अंग्रेजी माध्यम से पढ़ेंगे और सीबीएसई बोर्ड की परीक्षा लेगा।
दो सेक्शन, जगह और शिक्षक वो ही, पढ़ाएंगे कैसे
शिक्षा विभाग ने 87 प्राइमरी और 6 वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों को मॉडल संस्कृति बनाया है। अब शिक्षा विभाग ने यहां पर अंग्रेजी और हिंदी अलग-अलग माध्यम शुरू करने के आदेश दिए हैं। अब स्कूलों में संकट खड़ा हो गया है, हालात ये है कि दो सेक्शन को पढ़ाने के लिए जगह जगह भी चाहिए और शिक्षक भी। लेकिन स्कूलों के पास शिक्षक भी उतने है और जगह भी उतनी है। ऐसे में अंग्रेजी और हिंदी माध्यम दोनों को चलाने पर संकट खड़ा हो जाएगा।
कोट
वैज्ञानीकरण इस वक्त सबसे जरूरी कार्य है, सरकार को शिक्षक-छात्र अनुपात 1:25 करना चाहिए। सरकार इसमें देरी कर रही है। स्कूलों में शिक्षक जरूरी है। मॉडल संस्कृति स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर किया जाए तभी दोनों माध्यम से पढ़ाई करवाई जा सकेगी। प्राइमरी स्कूलों में विकास शुल्क लेना निशुल्क बाल शिक्षा अधिनियम का उल्लंघन है।
-देवेंद्र सिंह दहिया, राज्य चेयरमैन, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ
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बता दें कि वीरवार को शिक्षा विभाग निदेशालय ने स्पष्ट कर दिया है कि राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक और प्राथमिक विद्यालय में जिनके नजदीक कोई अन्य राजकीय विद्यालय नहीं है ऐसे सभी में हिंदी और अंग्रेजी माध्यम दोनों सेक्शन जारी होंगे। राजकीय प्राइमरी स्कूलों में पढ़ रहे विद्यार्थियों से पहले फीस नहीं ली जा रही थी। लेकिन अब जारी हुए पत्र के मुताबिक मॉडल संस्कृति स्कूल में हिंदी माध्यम लेकर पढ़ने वाले विद्यार्थी को फीस देनी होगी। विकास निधि के रूप में 500 रुपये दाखिला और 200 रुपये प्रति माह फीस देनी होगी।
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जिले में राजकीय मॉडल संस्कृति प्राइमरी स्कूल : 87
जिले में राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल : 6
1.80 लाख से आय वाले परिवारों के बच्चों को मिलेगी मासिक अंशदान में छूट
मॉडल संस्कृति स्कूल जहां पनर हिंदी और अंग्रेजी सेक्शन है। वहां के विद्यार्थियों से विद्यालय विकास निधि ली जाएगी और ऐसे विद्यार्थी जिनके अभिभावकों की आय 1.80 लाख रुपये वार्षिक से कम है उन्हें विद्यालय निधि के तहत लिए जाने वाले मासिक अंशदान से छूट मिलेगी।
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सीबीएसई से मिली है मॉडल संस्कृति विद्यालयों को मान्यता
राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों को सीबीएसई से मान्यता मिली है। कक्षा छठी से बारहवीं के विद्यार्थी यहां पर अंग्रेजी माध्यम से पढ़ेंगे और सीबीएसई बोर्ड की परीक्षा लेगा।
दो सेक्शन, जगह और शिक्षक वो ही, पढ़ाएंगे कैसे
शिक्षा विभाग ने 87 प्राइमरी और 6 वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों को मॉडल संस्कृति बनाया है। अब शिक्षा विभाग ने यहां पर अंग्रेजी और हिंदी अलग-अलग माध्यम शुरू करने के आदेश दिए हैं। अब स्कूलों में संकट खड़ा हो गया है, हालात ये है कि दो सेक्शन को पढ़ाने के लिए जगह जगह भी चाहिए और शिक्षक भी। लेकिन स्कूलों के पास शिक्षक भी उतने है और जगह भी उतनी है। ऐसे में अंग्रेजी और हिंदी माध्यम दोनों को चलाने पर संकट खड़ा हो जाएगा।
कोट
वैज्ञानीकरण इस वक्त सबसे जरूरी कार्य है, सरकार को शिक्षक-छात्र अनुपात 1:25 करना चाहिए। सरकार इसमें देरी कर रही है। स्कूलों में शिक्षक जरूरी है। मॉडल संस्कृति स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर किया जाए तभी दोनों माध्यम से पढ़ाई करवाई जा सकेगी। प्राइमरी स्कूलों में विकास शुल्क लेना निशुल्क बाल शिक्षा अधिनियम का उल्लंघन है।
-देवेंद्र सिंह दहिया, राज्य चेयरमैन, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ