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Fatehabad News: मोबाइल फोन से आंखों पर बढ़ा बोझ, कमजोर हो रही नजर
Tue, 31 Mar 2026 11:02 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Tue, 31 Mar 2026 11:02 PM IST
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फतेहाबाद में अस्पताल में मरीजों की आंखों की जांच करते हुए डॉ.विनोद शर्मा
फतेहाबाद। आधुनिक जीवनशैली में मोबाइल फोन, कंप्यूटर और टीवी का बढ़ता उपयोग आंखों की सेहत पर भारी पड़ने लगा है। खासकर बच्चों और युवाओं में कम उम्र में ही नजर कमजोर होने के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार नेत्र रोगों के प्रति जागरूकता की कमी और स्क्रीन का अधिक इस्तेमाल इसके प्रमुख कारण हैं।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. विनोद शर्मा का कहना है कि आंखों की रोशनी कम होने के पीछे कई गलत आदतें जिम्मेदार हैं। इनमें लेटकर पढ़ना, अंधेरे में पढ़ाई करना और लंबे समय तक लगातार मोबाइल फोन या कंप्यूटर स्क्रीन पर नजर टिकाए रखना आंखों के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है। विशेष रूप से अंधेरे में स्क्रीन देखने से आंखों पर अधिक दबाव पड़ता है। इससे नसों में सूजन की समस्या भी उत्पन्न हो सकती है।
लंबे समय तक मोबाइल फोन और कंप्यूटर के उपयोग से शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन का स्तर प्रभावित होता है। इसके कारण आंखों में सूखापन (ड्राई आई) की समस्या तेजी से बढ़ रही है। आंखें ड्राई (शुष्क) होने से जलन, चुभन, खुजली, और किरकिरापन महसूस होता है। इससे दृष्टि धुंधली हो सकती है, आंखें जल्दी थक सकती हैं और रोशनी के प्रति संवेदनशीलता (फोटो फोबिया) बढ़ सकती है। गंभीर मामलों में यह कॉर्निया को नुकसान, संक्रमण और दीर्घकालिक दृष्टि समस्याओं का कारण बन सकता है।
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पलकों को झपकना जरूरी
डॉ. विनोद शर्मा का कहना है कि आंखों की सुरक्षा के लिए पलक झपकना भी बेहद जरूरी है। सामान्य रूप से एक व्यक्ति को एक मिनट में 10 से 15 बार पलकें झपकानी चाहिए। इससे आंखों की सतह पर नमी बनी रहती है लेकिन स्क्रीन पर काम करते समय लोग पलकें कम झपकाते हैं जिससे आंखों में तरलता घट जाती है और जलन व सूखापन बढ़ता है।
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नागरिक अस्पताल के नेत्र रोग डॉ. राकेश कस्वां का कहना है कि आंखों को स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त आराम के लिए रोजाना कम से कम आठ घंटे की नींद लें। मोबाइल फोन, टीवी या कंप्यूटर का उपयोग करते समय उचित दूरी बनाए रखें। दिन में तीन से चार बार आंखों को ठंडे पानी से धोना लाभकारी होता है। धूप या धूल-मिट्टी वाले स्थानों पर जाने से पहले सनग्लास का उपयोग करें।
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नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. विनोद शर्मा का कहना है कि आंखों की रोशनी कम होने के पीछे कई गलत आदतें जिम्मेदार हैं। इनमें लेटकर पढ़ना, अंधेरे में पढ़ाई करना और लंबे समय तक लगातार मोबाइल फोन या कंप्यूटर स्क्रीन पर नजर टिकाए रखना आंखों के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है। विशेष रूप से अंधेरे में स्क्रीन देखने से आंखों पर अधिक दबाव पड़ता है। इससे नसों में सूजन की समस्या भी उत्पन्न हो सकती है।
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लंबे समय तक मोबाइल फोन और कंप्यूटर के उपयोग से शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन का स्तर प्रभावित होता है। इसके कारण आंखों में सूखापन (ड्राई आई) की समस्या तेजी से बढ़ रही है। आंखें ड्राई (शुष्क) होने से जलन, चुभन, खुजली, और किरकिरापन महसूस होता है। इससे दृष्टि धुंधली हो सकती है, आंखें जल्दी थक सकती हैं और रोशनी के प्रति संवेदनशीलता (फोटो फोबिया) बढ़ सकती है। गंभीर मामलों में यह कॉर्निया को नुकसान, संक्रमण और दीर्घकालिक दृष्टि समस्याओं का कारण बन सकता है।
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पलकों को झपकना जरूरी
डॉ. विनोद शर्मा का कहना है कि आंखों की सुरक्षा के लिए पलक झपकना भी बेहद जरूरी है। सामान्य रूप से एक व्यक्ति को एक मिनट में 10 से 15 बार पलकें झपकानी चाहिए। इससे आंखों की सतह पर नमी बनी रहती है लेकिन स्क्रीन पर काम करते समय लोग पलकें कम झपकाते हैं जिससे आंखों में तरलता घट जाती है और जलन व सूखापन बढ़ता है।
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नागरिक अस्पताल के नेत्र रोग डॉ. राकेश कस्वां का कहना है कि आंखों को स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त आराम के लिए रोजाना कम से कम आठ घंटे की नींद लें। मोबाइल फोन, टीवी या कंप्यूटर का उपयोग करते समय उचित दूरी बनाए रखें। दिन में तीन से चार बार आंखों को ठंडे पानी से धोना लाभकारी होता है। धूप या धूल-मिट्टी वाले स्थानों पर जाने से पहले सनग्लास का उपयोग करें।