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Fatehabad News: निजीकरण व स्मार्ट मीटर योजना के विरोध में विधायक को सौंपा मांगपत्र

Mon, 31 Aug 2026 12:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Mon, 31 Aug 2026 12:34 AM IST
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Memorandum submitted to MLA opposing privatization and the smart meter scheme.
फतेहाबाद। प्रदर्शन कर विधायक को ज्ञापन सौंपते बिजली कर्मचारीस्त्रोत संघ
फतेहाबाद। लंबित मांगाें के लिए रविवार को बिजली विभाग के कर्मचारियों ने शहर में प्रदर्शन किया। इस दौरान कर्मचारियों ने अलग कृषि वितरण व्यवस्था लागू करने, गुरुग्राम और नूंह जिलों में निजी कंपनियों को समानांतर बिजली वितरण अधिकार देने पर रोष जताया। साथ ही स्मार्ट मीटर योजना तथा बिजली विभाग के निजीकरण के विरोध में आवाज उठाई।
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प्रदर्शन के बाद हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं अभियंता संयुक्त संघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधियों ने विधायक बलवान सिंह को मांग पत्र सौंपकर इन जनहित से जुड़े मुद्दों को राज्य विधानसभा के चालू मानसून सत्र में प्रमुखता से उठाने का आग्रह किया।
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मांगपत्र खुर्शीद, इकाई अध्यक्ष, हरियाणा राज्य बिजली बोर्ड यूनियन, अमित शर्मा, इकाई अध्यक्ष, ऑल हरियाणा पावर कॉर्पोरेशन वर्कर यूनियन, आत्मा राम, इकाई अध्यक्ष, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कर्मचारी यूनियन तथा अभियंता अशोक कुमार, अध्यक्ष, अभियंता संघ की संयुक्त अध्यक्षता में विधायक को सौंपा गया।
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प्रतिनिधियों ने विधायक से मांग की कि वह विधानसभा में इस निर्णय को रद्द करवाने के लिए आवाज उठाने, विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक करने तथा सभी पक्षों को सुनवाई का अवसर देने की मांग उठाई। इस अवसर पर रामनिवास शर्मा, प्रेम वर्मा, रामनिवास बिश्नोई, हनुमान सिंह, देवेंद्र जाखड़ सहित अनेक कर्मचारी नेता व अभियंता उपस्थित रहे।

निजी कंपनी की क्षमता पर उठाए सवाल :

मोर्चा के वरिष्ठ प्रतिनिधियों फकीर चंद सैनी और भूप सिंह भड़ोलांवाली ने बताया कि राज्य विद्युत विनियामक आयोग के समक्ष इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड नामक निजी कंपनी ने समानांतर बिजली वितरण का अधिकार मांगा है। उन्होंने सवाल उठाया कि मात्र एक वर्ष पुरानी और केवल एक करोड़ रुपये की चुकता पूंजी वाली बिना अनुभव की कंपनी को लगभग 4,717 करोड़ रुपये के पूंजी निवेश का ठेका देने की सिफारिश की जा रही है।


सरकार पर एकतरफा निर्णय लेने का आरोप:

कर्मचारी नेताओं ने कहा कि पूर्व में राज्य सरकार ने कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के साथ हुई वार्ता में आश्वासन दिया था कि नूंह और गुरुग्राम में किसी निजी कंपनी को जिम्मेदारी देने से पहले सभी हितधारकों और कर्मचारी संगठनों से परामर्श किया जाएगा। इसके बावजूद सरकार बिना विचार-विमर्श के एकतरफा निर्णय ले रही है।
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