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जिंदगी भर नहीं भूलेगा लॉकडाउन
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कोटा से श्रीराम सेवा समिति धर्मशाला में लाए जाने के बाद सैनिटाइज करने के लिए कमरों से बाहर रखा गय?
- फोटो : Fatehabad
दो माह पहले तक कोरोना का नाम तक नहीं सुना था लेकिन आज कोरोना जिंदगी भर न भूलने वाली याद बन गया है। नीट की तैयारियों में डूबे हुए थे और चिकित्सक बनने का जो सपना परिवार के साथ मिलकर देखा था। इस लॉकडाउन और कोरोना महामारी में चिकित्सकों के जज्बे ने एक लक्ष्य बना दिया है। अब डॉक्टर बनने की इच्छा और मजबूत हो गई है। ये अनुभव उन लड़कियों के हैं, जिन्हें कोटा से सकुशल फतेहाबाद लाया गया है और फिलहाल श्रीराम सेवा समिति धर्मशाला में क्वारंटीन किया गया है। क्वारंटीन किए जाने से कुछ पल पहले ही इन लड़कियों ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत कर अनुभव सांझा किए।
लॉकडाउन से कक्षाएं बंद थी, कमरे तक हुई सीमित
21 सितंबर से कोटा में थी। इन आठ महीनों में अपने घर जाखल भी नहीं आई। सोच लिया था कि नीट की तैयारी पर पूरा ध्यान दूंगी। फरवरी खत्म होते होते कोरोना का संकट शुरू हो गया।इसके बावजूद भी खुद को पढ़ाई में ही व्यस्त रखा। मार्च 15 के बाद कोटा में ही कोरोना के केस सामने आने लगे तो घबराहट होने लगी। फिर अचानक लॉकडाउन का ऐलान हो गया और इसके बाद अचानक जिंदगी बदल गई। खुद को मैने अपने कमरे तक ही सीमित कर लिया। क्लासेस बंद हो गई थी और सारा दिन एक ही कमरे में बंद होने से कई बार फ्रस्टेटेड सी होती थी लेकिन परिवार से नियमित बात होने से हिम्मत बंधती रही। फिर पता चला कि हमें लेने के लिए बस आ रही है तो दो दिन पैकिंग की एक्साइटमेंट में निकले। -खुशबू, निवासी जाखल।
आसपास के इलाकों में कोरोना के केस निकले तो लगता था डर
दीवाली की छुट्टियों में घरवालों से मिलकर कोटा में नीट की अपनी कक्षाएं लगाने कोटा चली गई थी। फोकस नीट की परीक्षा पर था लेकिन मार्च के अंतिम सप्ताह ने मानों सिस्टम को 360 डिग्री पर घुमा दिया। फिर सारा ध्यान इस बात पर फोकस हो गया कि किसी भी हालत में कोविड-19 से प्रभावित नहीं होना है। अपने स्तर पर पूरा प्रयास किया है। लेकिन आसपास के इलाकों में कोरोना के केस बढ़ते गए तो डर भी बढ़ता गया। काफी अजीब माहौल था सारा लेकिन सबसे अच्छी बात ये रही कि फोन पर परिवार से रेगुलर बात होती रही इससे हिम्मत बढ़ती रही। -प्रियंका, निवासी टोहाना।
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डर तो नहीं लगा, रूटीन जरूर अपसेट हुआ, सरकार का साथ देना चाहिए हमें
मैं न्यू कोटा साइड में रहती थी, वहां पर कोरोना के अधिक केस सामने नहीं आए थे। पुराने कोटा में ज्यादा दिक्कत थी। मैने अपने नॉर्मल रूटीन को ही फॉलो करने का प्रयास किया। कुछ रूटीन अपसेट जरूर हुआ लेकिन डर नहीं लगा। फिर लॉकडाउन का ऐलान हो गया तो कमरे में ही बंद रहना था तो भी बुरा नहीं लगा। आखिर सरकार ये सब हमारे लिए ही कर रही थी। हमें भी सरकार के हर कदम का समर्थन करते हुए उसका पालन करना चाहिए। -नैंसी, निवासी भूना।
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लॉकडाउन से कक्षाएं बंद थी, कमरे तक हुई सीमित
21 सितंबर से कोटा में थी। इन आठ महीनों में अपने घर जाखल भी नहीं आई। सोच लिया था कि नीट की तैयारी पर पूरा ध्यान दूंगी। फरवरी खत्म होते होते कोरोना का संकट शुरू हो गया।इसके बावजूद भी खुद को पढ़ाई में ही व्यस्त रखा। मार्च 15 के बाद कोटा में ही कोरोना के केस सामने आने लगे तो घबराहट होने लगी। फिर अचानक लॉकडाउन का ऐलान हो गया और इसके बाद अचानक जिंदगी बदल गई। खुद को मैने अपने कमरे तक ही सीमित कर लिया। क्लासेस बंद हो गई थी और सारा दिन एक ही कमरे में बंद होने से कई बार फ्रस्टेटेड सी होती थी लेकिन परिवार से नियमित बात होने से हिम्मत बंधती रही। फिर पता चला कि हमें लेने के लिए बस आ रही है तो दो दिन पैकिंग की एक्साइटमेंट में निकले। -खुशबू, निवासी जाखल।
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आसपास के इलाकों में कोरोना के केस निकले तो लगता था डर
दीवाली की छुट्टियों में घरवालों से मिलकर कोटा में नीट की अपनी कक्षाएं लगाने कोटा चली गई थी। फोकस नीट की परीक्षा पर था लेकिन मार्च के अंतिम सप्ताह ने मानों सिस्टम को 360 डिग्री पर घुमा दिया। फिर सारा ध्यान इस बात पर फोकस हो गया कि किसी भी हालत में कोविड-19 से प्रभावित नहीं होना है। अपने स्तर पर पूरा प्रयास किया है। लेकिन आसपास के इलाकों में कोरोना के केस बढ़ते गए तो डर भी बढ़ता गया। काफी अजीब माहौल था सारा लेकिन सबसे अच्छी बात ये रही कि फोन पर परिवार से रेगुलर बात होती रही इससे हिम्मत बढ़ती रही। -प्रियंका, निवासी टोहाना।
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डर तो नहीं लगा, रूटीन जरूर अपसेट हुआ, सरकार का साथ देना चाहिए हमें
मैं न्यू कोटा साइड में रहती थी, वहां पर कोरोना के अधिक केस सामने नहीं आए थे। पुराने कोटा में ज्यादा दिक्कत थी। मैने अपने नॉर्मल रूटीन को ही फॉलो करने का प्रयास किया। कुछ रूटीन अपसेट जरूर हुआ लेकिन डर नहीं लगा। फिर लॉकडाउन का ऐलान हो गया तो कमरे में ही बंद रहना था तो भी बुरा नहीं लगा। आखिर सरकार ये सब हमारे लिए ही कर रही थी। हमें भी सरकार के हर कदम का समर्थन करते हुए उसका पालन करना चाहिए। -नैंसी, निवासी भूना।