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Fatehabad News: फसल अवशेष प्रबंधन पर प्रोत्साहन राशि के लिए पंजीकरण करने की अंतिम तिथि 30 नवंबर
Mon, 25 Nov 2024 11:43 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Mon, 25 Nov 2024 11:43 PM IST
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फतेहाबाद। फसल अवशेष प्रबंधन स्कीम के तहत राज्य सरकार द्वारा स्ट्रॉ बेलर द्वारा गांठ बनाने, खेत में ही मशीनों की सहायता से धान अवशेष को मिट्टी में मिलाने पर 1000 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने के लिए जिले के किसान 30 नवंबर तक कृषि विभाग के पोर्टल पर अपने आवेदन कर सकते हैं।
उपायुक्त मनदीप कौर ने बताया कि जहां किसान को पराली की गांठ बेचकर अतिरिक्त आमदनी होगी, वहीं किसान द्वारा धान अवशेषों को मिट्टी में मिलाने से भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी। किसान धान अवशेषों को मिट्टी में मिलाने के लिए हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, रिवर्सिबल एमबी प्लाऊ, जीरो ड्रिल, रोटावेटर एवं हैरो की सहायता से मिलाकर प्रोत्साहन राशि हेतु आवेदन कर सकते हैं।
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जीपीएस लोकेशन सहित देनी होगी रंगीन फोटो
उपायुक्त ने बताया कि जो किसान मशीनों द्वारा पराली अवशेषों को मिट्टी में मिलाने का कार्य करेंगे, वे किसान प्रत्येक एकड़ में पराली का प्रबंधन करते हुए जीपीएस लोकेशन वाली रंगीन तस्वीरों का रिकॉर्ड अपने पास रखेंगे। सरकार द्वारा दोनों प्रकार के अवशेष प्रबंधन पर 1000 रुपये प्रति एकड़ दिए जा रहे हैं। इसके लिए किसान को विभागीय पोर्टल agriharyana.gov.in पर 30 नवंबर तक पंजीकरण करवाना अनिवार्य है। इसके बाद विभागीय पोर्टल बंद हो जाएगा। पंजीकरण के लिए किसान का मेरी फसल मेरा ब्योरा होना चाहिए। किसान के लिए प्रोत्साहन राशि के लिए अधिकतम क्षेत्रफल की कोई सीमा नहीं है। अधिक जानकारी के लिए जिले के कृषि विभाग के कृषि अधिकारियों या सहायक कृषि अभियंता, फतेहाबाद के कार्यालय में किसी कार्य दिवस को सुबह 9 बजे से सायं 5 बजे तक संपर्क कर सकते हैं।
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उपायुक्त मनदीप कौर ने बताया कि जहां किसान को पराली की गांठ बेचकर अतिरिक्त आमदनी होगी, वहीं किसान द्वारा धान अवशेषों को मिट्टी में मिलाने से भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी। किसान धान अवशेषों को मिट्टी में मिलाने के लिए हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, रिवर्सिबल एमबी प्लाऊ, जीरो ड्रिल, रोटावेटर एवं हैरो की सहायता से मिलाकर प्रोत्साहन राशि हेतु आवेदन कर सकते हैं।
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जीपीएस लोकेशन सहित देनी होगी रंगीन फोटो
उपायुक्त ने बताया कि जो किसान मशीनों द्वारा पराली अवशेषों को मिट्टी में मिलाने का कार्य करेंगे, वे किसान प्रत्येक एकड़ में पराली का प्रबंधन करते हुए जीपीएस लोकेशन वाली रंगीन तस्वीरों का रिकॉर्ड अपने पास रखेंगे। सरकार द्वारा दोनों प्रकार के अवशेष प्रबंधन पर 1000 रुपये प्रति एकड़ दिए जा रहे हैं। इसके लिए किसान को विभागीय पोर्टल agriharyana.gov.in पर 30 नवंबर तक पंजीकरण करवाना अनिवार्य है। इसके बाद विभागीय पोर्टल बंद हो जाएगा। पंजीकरण के लिए किसान का मेरी फसल मेरा ब्योरा होना चाहिए। किसान के लिए प्रोत्साहन राशि के लिए अधिकतम क्षेत्रफल की कोई सीमा नहीं है। अधिक जानकारी के लिए जिले के कृषि विभाग के कृषि अधिकारियों या सहायक कृषि अभियंता, फतेहाबाद के कार्यालय में किसी कार्य दिवस को सुबह 9 बजे से सायं 5 बजे तक संपर्क कर सकते हैं।
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