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नौनिहालों के भविष्य में बाधा बनेगी सुविधाओं की कमी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 05 Oct 2021 11:36 PM IST
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Lack of facilities will be a hindrance in the future of young people
माजरा रोड स्थित आंगनबाड़ी में उपस्थित बच्चे व महिलाएं। - फोटो : Fatehabad
फतेहाबाद। जिले के 38 हजार 499 नौनिहालों के बेहतर भविष्य में बुनियादी सुविधाओं का अभाव बाधा बनेगी। जिले के 1096 आंगनबाड़ी केंद्रों में से 441 ही भवन ठीकठाक स्थिति में हैं। बाकी केंद्रों के पास तो भवन तक नहीं है, कई जर्जर हालत में हैं। कोई आंगनबाड़ी केंद्र गुरुद्वारा तो कोई राजीव गांधी सेवा सदन में चल रही हैं। पंचायतों की ओर से भी आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए जगह देने से इंकार कर दिया गया है।
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बता दें कि महिला एवं बाल विकास विभाग ने केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति के तहत प्री-स्कूल या प्ले-स्कूल बनाने के लिए 1096 में से मात्र 237 आंगनबाड़ी केंद्रों को ही चुना है। निजी प्री-स्कूलों के मुकाबले के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों को तैयार करने का सपना भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में साकार होता नहीं दिख रहा है। हालांकि, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को नई शिक्षा नीति के तहत प्री-स्कूल व प्ले-स्कूल के अनुसार ट्रेनिंग देने का काम जरूर पूरा कर लिया गया है। इसके लिए जिले की 1096 आंगनबाड़ी केंद्रों में से मात्र 237 वर्कर्स को इसलिए चुना है कि वे 12वीं या इससे ज्यादा पढ़ी-लिखी हैं।
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रतिया-टोहाना में 500 रुपये तो भूना में 200 रुपये मिलता है किराया
महंगाई आसमान छूने को है, लेकिन आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए सरकार ने किराया नाममात्र निर्धारित किया हुआ है। जिले में भी किराये की राशि एक समान नहीं है। टोहाना व रतिया में आंगनबाड़ी केंद्र के किराये के लिए मासिक 500 रुपये मिलते हैं जबकि भूना की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को 200 रुपये ही दिए जाते हैं। यह किराया राशि भी कई महीनों में जारी होती है।
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तीन से छह साल के बच्चों को मिलना है लाभ
नई शिक्षा नीति के तहत प्री-स्कूल या प्ले-स्कूल के रूप में तैयार होने वाली आंगनबाड़ी में तीन से छह साल तक के बच्चों को लाभ दिया जाना है। जिले में तीन से छह साल के बच्चों की संख्या 38 हजार 499 हैं।
यह जिले में स्थिति
कुल आंगनबाड़ी केंद्र : 1096
कुल आंगनबाड़ी कार्यकर्ता : 1050
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के खाली पद : 46
प्री-स्कूल व प्ले-स्कूल के लिए चयनित : 237
कोट
आंगनबाड़ी का प्री-स्कूल या प्ले-स्कूल बनाने में हमें कोई ऐतराज नहीं है। मगर सरकार की मंशा आंगनबाड़ी केंद्रों को बंद करने की अधिक लगती है क्योंकि सिर्फ प्रदेश में 4 हजार ही आंगनबाड़ी को चुना गया है। आंगनबाड़ी केंद्रों में सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं है। किराया भी कहीं 200 तो कहीं 500 रुपये मिलता है। सरकार पहले सुविधाएं बढ़ाएं, फिर परिवर्तन करें।
सुनीता झलनियां, जिला उपप्रधान, आंगनबाड़ी वर्कर-हेल्पर यूनियन।
कोट
जिले में 237 आंगनबाड़ी केंद्रों को नई शिक्षा नीति के तहत प्री-स्कूल बनाने के लिए चुना गया है। मगर ट्रेनिंग सभी आंगनबाड़ी केंद्रों की कार्यकर्ताओं को दी गई है। पूरी उम्मीद है कि इसके अच्छे परिणाम सामने आएंगे।
राजबाला, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग।
किसी केंद्र के पास अपना भवन वहीं तो कहीं बच्चे नहीं
केस नंबर एक
गांव सनियाना में सात आंगनबाड़ी केंद्र बनाए हुए हैं। मगर इनमें से चार के पास अपना कोई भवन नहीं है। तीन आंगनबाड़ी केंद्र तो गांव के राजीव गांधी सेवा सदन में चल रहे हैं। इस कारण आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से लेकर बच्चों व गर्भवती महिलाओं तक कोई परेशानी झेलनी पड़ती है। प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र में 12 से 15 की संख्या में बच्चों का पंजीकरण है।
केस नंबर दो
फतेहाबाद शहर के गुरुनानकपुरा मोहल्ला का आंगनबाड़ी केंद्र करीब 10 गुना 10 की दुकान में चल रहा है। पीने के लिए पानी गुरुद्वारा से लेकर आते हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मजबूरी में दुकान में ही केंद्र चला रहे हैं। सरकार से भवन की मांग करके थक चुके हैं, लेकिन कोई नहीं सुनवाई नहीं हुई है।

केस नंबर तीन
रतिया क्षेत्र के गांव रायपुर के आंगनबाड़ी केंद्र की हालत भी जर्जर हो चुकी है। छत व साइड की दीवारों में दरारें आ चुकी है। बारिश के दिनों में छत टपकने लगती है। आंगनबाड़ी केंद्र में आने वाले बच्चों व उनके अभिभावकों को भी डर लगता है।
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