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Fatehabad News: देश में अपनी पहचान बना रहा है कर्ण कोट टीला

Mon, 17 Apr 2023 11:17 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Mon, 17 Apr 2023 11:17 PM IST
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Karna Kot Tila is making its mark in the country
भूना के गांव भट्टू में ऐतिहासिक कर्ण कोट टीले की जमीन।
फतेहाबाद। फतेहाबाद जिले के खंड भूना के गांव भट्टू का ऐतिहासिक कर्ण कोट टीला हमारी विरासत को अपने गर्भ में छिपाए हुए हैं। जब भी बारिश का मौसम आता है तो यह टीला अपने गर्भ से हमारे इतिहास के उन पन्नों को बाहर निकालता है, जिसकी जानकारी हमें आज तक नहीं थी। इस टीले से प्राचीन काल के वास्तु कला की अद्भुत अवशेष तो मिले ही हैं और अब पुरातत्व विभाग इस टीले को अपने संरक्षण में लेने की तैयारी कर रहा है। साथ ही यहां पर खोदाई भी की जा सकती है। संवाद
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सात साल पहले हुई थी खोज
इस टीले के शोधार्थी सेफ्टी इंजीनियर अजय कुमार का दावा है कि जब उन्हें गांव से कुछ दूरी पर खेतों में बिखरे हुए पत्थर और कंकाल के अंश मिले तो फिर उन्होंने खुद ही इस पर शोध करना शुरू कर दिया था। इसके बाद कई चीजें मिलीं। इनमें कुछ चीजें तीन हजार साल पुरानी थीं, जो कुषाण वंश व गुप्तवंश काल की थी। अजय ने पुरातत्व विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया तो पुरातत्व विभाग की डिप्टी डायरेक्टर डॉ. बुनानी भट्टाचार्य अपनी टीम के साथ आठ माह पहले मौके पर आई। इसके बाद उन्होंने भी यह माना कि यह वस्तुएं तीन हजार साल पहले की हैं।
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माना जाता है कि यहां पर करनाल के राजा कर्ण का किला था, जिस कारण इसको कर्ण कोट टीले के नाम से जाना जाता है। अजय ने बताया कि यहां पर मिली पुरातत्व महत्व की चीजों को पुरातत्व विभाग की टीम को सौंप दिया है। वहीं, विभाग की टीम ने अजय को जिम्मेदारी दी है कि वह इस जगह की देखरेख करें और अन्य कोई चीज मिले तो उन्हें अवगत करवाते रहें। उन्होंने बताया कि इस टीले से प्राचीन मनके, एक सींग वाले हिरण की टेराकोटा मूर्ति, प्राचीन काल के किलों की मीनारों के अवशेष, हड़प्पा संस्कृति के दौरान प्रयोग होने वाली मणि, जिस पर रोशनी डालने पर वह चमकने लगती है, आंग्लो-सिख युद्ध के दौरान प्रयोग होने वाले लोहे के गोले भी मिल चुके हैं।
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उपनिदेशक बोले
गांव भट्टू का कर्ण कोट टीला अपने आप में महत्वपूर्ण है। यहां पर पौराणिक महत्व के अवशेष अक्सर मिलते रहते हैं। इस साइट को जल्द ही पुरातत्व विभाग अपने संरक्षण में लेगा। यहां पर जो अवशेष मिले हैं, वह पांच हजार साल पहले तक के हैं। इसकी खोदाई का कार्य भी जल्द ही किया जाएगा।
-डॉ. बुनानी भट्टाचार्य, उपनिदेशक, पुरातत्व विभाग, हरियाणा
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