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Fatehabad News: नसीहत सिर्फ औरों के लिए...
Sat, 09 May 2026 11:35 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sat, 09 May 2026 11:35 PM IST
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लघु सचिवालय के प्रथम खंड की छत पर प्रशासन की अनदेखी से उगा पीपल। संवाद
फतेहाबाद। प्रदेश सरकार और प्रशासनिक अधिकारी स्वच्छ भारत अभियान के तहत लोगों को सफाई के प्रति जागरूक करने के लिए लाखों रुपये खर्च कर रहे हैं। दूसरी तरफ जिला प्रशासन के लघु सचिवालय के प्रथम खंड की कार्यालय की छत पर गंदगी, मलबा और झाड़ियां और पेयजल की टंकियां गंदगी से अटी हुई हैं। इससे बड़ी विडंबना क्या होगी की छत पर रखी पेयजल टंकियों तक की देखभाल नहीं होती।
संवाद के संवाददाता ने जब लघु सचिवालय में इस बारे में पड़ताल की तो सामने आया कि लघु सचिवालय के प्रथम खंड की छत की पिछले काफी समय से सफाई न होने के कारण मलबा जमा हो चुका है। देखरेख के अभाव में छत पर जगह-जगह पेड़ और झाड़ियां उग आई हैं। पेड़ों की जड़ें धीरे-धीरे भवन की छत को नुकसान पहुंचा रही हैं। जिससे छत में सीलन और दरारों आने की आशंका बढ़ गई है।
जिले के प्रशासनिक अधिकारी फील्ड में जाकर सफाई का जायजा ले रहे हैं लेकिन जहां बैठ कर वे शहर के लिए योजनाएं बनाते हैं वहीं की छत पर उन्हें अव्यवस्थाएं नजर नहीं आ रही है। छत पर पेयजल के लिए रखीं टंकियों के ढक्कन तक नहीं है। सफाई नहीं होने से उनमें मिट्टी जमी हुई है। इस बारे में जब सीटीएम गौरव गुप्ता से पक्ष जानना चाहा तो उनसे संपर्क नहीं हो पाया। संवाद
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पेयजल की टंकियों की नहीं है सफाई, गायब है ढक्कन
लघु सचिवालय में पेयजल की टंकियों की सफाई नहीं होने से उनमें गाद जमा हो गई है। सभी कार्यालयों की छतों पर रखी पेयजल की टंकियाें के निरीक्षण के दौरान पाया गया कि 10 में से 4 के ढक्कन गायब हैं। ढक्कन न होने के कारण इनमें पक्षियों की मल-मूत्र, धूल-मिट्टी और अन्य गंदगी सीधी गिर रही है। यह किसी भी अधिकारी के संज्ञान में नहीं है।
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अधिकारी पी रहे कैंपर का पानी, जनता के हिस्से अशुद्ध जल
लघु सचिवालय में विभागों के अधिकतर अधिकारी और कर्मचारी अपने कार्यालयों में पीने के लिए बाहर से कैंपर मंगवाते हैं लेकिन सचिवालय में अपने काम के लिए आने वाले हजारों लोगों को इसी अशुद्ध और बदबूदार पानी को पीने को मजबूर होना पड़ता हैं। लघु सचिवालय व सार्वजनिक स्थानों पर नियमानुसार इन टंकियों की हर महीने सफाई होनी चाहिए लेकिन हकीकत में इनकी सफाई साल में एक या दो बार हो रही है। पेयजल के लिए फिल्टर व आरओ लगे हुए हैं जो कि खराब हैं और वाटर कूलरों में ठंडा पेयजल नहीं है।
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संवाद के संवाददाता ने जब लघु सचिवालय में इस बारे में पड़ताल की तो सामने आया कि लघु सचिवालय के प्रथम खंड की छत की पिछले काफी समय से सफाई न होने के कारण मलबा जमा हो चुका है। देखरेख के अभाव में छत पर जगह-जगह पेड़ और झाड़ियां उग आई हैं। पेड़ों की जड़ें धीरे-धीरे भवन की छत को नुकसान पहुंचा रही हैं। जिससे छत में सीलन और दरारों आने की आशंका बढ़ गई है।
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जिले के प्रशासनिक अधिकारी फील्ड में जाकर सफाई का जायजा ले रहे हैं लेकिन जहां बैठ कर वे शहर के लिए योजनाएं बनाते हैं वहीं की छत पर उन्हें अव्यवस्थाएं नजर नहीं आ रही है। छत पर पेयजल के लिए रखीं टंकियों के ढक्कन तक नहीं है। सफाई नहीं होने से उनमें मिट्टी जमी हुई है। इस बारे में जब सीटीएम गौरव गुप्ता से पक्ष जानना चाहा तो उनसे संपर्क नहीं हो पाया। संवाद
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पेयजल की टंकियों की नहीं है सफाई, गायब है ढक्कन
लघु सचिवालय में पेयजल की टंकियों की सफाई नहीं होने से उनमें गाद जमा हो गई है। सभी कार्यालयों की छतों पर रखी पेयजल की टंकियाें के निरीक्षण के दौरान पाया गया कि 10 में से 4 के ढक्कन गायब हैं। ढक्कन न होने के कारण इनमें पक्षियों की मल-मूत्र, धूल-मिट्टी और अन्य गंदगी सीधी गिर रही है। यह किसी भी अधिकारी के संज्ञान में नहीं है।
अधिकारी पी रहे कैंपर का पानी, जनता के हिस्से अशुद्ध जल
लघु सचिवालय में विभागों के अधिकतर अधिकारी और कर्मचारी अपने कार्यालयों में पीने के लिए बाहर से कैंपर मंगवाते हैं लेकिन सचिवालय में अपने काम के लिए आने वाले हजारों लोगों को इसी अशुद्ध और बदबूदार पानी को पीने को मजबूर होना पड़ता हैं। लघु सचिवालय व सार्वजनिक स्थानों पर नियमानुसार इन टंकियों की हर महीने सफाई होनी चाहिए लेकिन हकीकत में इनकी सफाई साल में एक या दो बार हो रही है। पेयजल के लिए फिल्टर व आरओ लगे हुए हैं जो कि खराब हैं और वाटर कूलरों में ठंडा पेयजल नहीं है।