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Fatehabad News: फतेहाबाद में 14 जनवरी रही अब तक की सबसे ठंडी रात
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कुलां में खेतों में जमा पाला।
- फोटो : Fatehabad
फतेहाबाद/कुलां। फतेहाबाद में 14 जनवरी की रात सीजन की सबसे ठंडी रात रही। रात का पारा 1.5 डिग्री तक पहुंच जाने के कारण लोग रात को रजाइयों व कंबलों में भी ठिठुरते रहे। वहीं खेतों में पाला जमने से फसलों को नुकसान की आशंका बन गई है। कृषि विभाग ने किसानों से खेतों में हल्की सिंचाई करते रहने व फसलों को धुआं देते रहने की बात कही है।
क्षेत्र में अचानक सर्दी बढ़ जाने से लोगों को ठिठुरने पर मजबूर कर दिया। शनिवार रात पाला पड़ने से फतेहाबाद के गांव धांगड़, बड़ोपल, कुम्हारिया, भट्टूकलां व कुुलां क्षेत्र के अनेक गांवों में खेतों में घास व फसलों पर बर्फ जम गई। सर्वाधिक पाले का शिकार भट्टूकलां व बड़ोपल क्षेेत्र हो रहा है, क्योंकि यह एरिया रेतीली जमीन में आता है। पाला पड़ने से जहां आलू, टमाटर, मिर्च, मटर आदि सब्जियों की खेती को नुकसान हो रहा है और अगर ऐसे ही पाला पड़ता रहा तो सरसों व गेहूं की फसल को भी नुकसान होगा। फतेहाबाद में शनिवार रात को न्यूनतम तापमान भी 1.5 डिग्री तक पहुंच गया, वहीं रविवार को दिन का तापमान 14 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
कृषि विभाग के अनुसार, बचाव के लिए किसान फसल की हल्की सिंचाई करें। जिन फसलों में सिंचाई नहीं होती है, उन फसलों के पास रात के समय धुआं कर सकते हैं। जिससे पाले के प्रभाव को फसल पर कम किया जा सके। पाला पड़ने से कुछ फसलें खत्म हो जाती हैं। पत्तियां काली पड़कर फसल बेकार हो जाती हैं। फसलों की बढ़वार रुक जाती है। पाले का सबसे ज्यादा प्रभाव आलू की फसल पर पड़ता है। गेहूं की फसल में गेरुई नामक रोग लग जाता है, जिसमें फसल की पत्तियां पीली पड़ जाती हैं और धीरे धीरे फसल बर्बाद होने लगती है। हालांकि यदि पाला न पड़े और धुंध हो तो गेहूं की फसल को बहुत फायदा भी होता है। इन दिनों में यदि फसलों की सही ढंग से देखरेख ना की जाएं तो पैदावार पर प्रभाव पड़ सकता है।
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कोट
इन दिनों रात का तापमान काफी बढ़ रहा है, जो सभी फसलों के लिए सही नहीं है। इससे सरसों व सब्जियों की फसल को अधिक नुकसान होता है। वहीं अगर पाला ऐसे ही पड़ता रहा तो गेहूं की फसल को भी नुकसान होगा। किसान खेतों में फसलों की हल्की सिंचाई करें और पाले से बचाव के लिए फसलों में धुआं करें।
-डॉ. राजेश सिहाग, डीडीए, फतेहाबाद।
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क्षेत्र में अचानक सर्दी बढ़ जाने से लोगों को ठिठुरने पर मजबूर कर दिया। शनिवार रात पाला पड़ने से फतेहाबाद के गांव धांगड़, बड़ोपल, कुम्हारिया, भट्टूकलां व कुुलां क्षेत्र के अनेक गांवों में खेतों में घास व फसलों पर बर्फ जम गई। सर्वाधिक पाले का शिकार भट्टूकलां व बड़ोपल क्षेेत्र हो रहा है, क्योंकि यह एरिया रेतीली जमीन में आता है। पाला पड़ने से जहां आलू, टमाटर, मिर्च, मटर आदि सब्जियों की खेती को नुकसान हो रहा है और अगर ऐसे ही पाला पड़ता रहा तो सरसों व गेहूं की फसल को भी नुकसान होगा। फतेहाबाद में शनिवार रात को न्यूनतम तापमान भी 1.5 डिग्री तक पहुंच गया, वहीं रविवार को दिन का तापमान 14 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
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कृषि विभाग के अनुसार, बचाव के लिए किसान फसल की हल्की सिंचाई करें। जिन फसलों में सिंचाई नहीं होती है, उन फसलों के पास रात के समय धुआं कर सकते हैं। जिससे पाले के प्रभाव को फसल पर कम किया जा सके। पाला पड़ने से कुछ फसलें खत्म हो जाती हैं। पत्तियां काली पड़कर फसल बेकार हो जाती हैं। फसलों की बढ़वार रुक जाती है। पाले का सबसे ज्यादा प्रभाव आलू की फसल पर पड़ता है। गेहूं की फसल में गेरुई नामक रोग लग जाता है, जिसमें फसल की पत्तियां पीली पड़ जाती हैं और धीरे धीरे फसल बर्बाद होने लगती है। हालांकि यदि पाला न पड़े और धुंध हो तो गेहूं की फसल को बहुत फायदा भी होता है। इन दिनों में यदि फसलों की सही ढंग से देखरेख ना की जाएं तो पैदावार पर प्रभाव पड़ सकता है।
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इन दिनों रात का तापमान काफी बढ़ रहा है, जो सभी फसलों के लिए सही नहीं है। इससे सरसों व सब्जियों की फसल को अधिक नुकसान होता है। वहीं अगर पाला ऐसे ही पड़ता रहा तो गेहूं की फसल को भी नुकसान होगा। किसान खेतों में फसलों की हल्की सिंचाई करें और पाले से बचाव के लिए फसलों में धुआं करें।
-डॉ. राजेश सिहाग, डीडीए, फतेहाबाद।