{"_id":"671911fd87eae506890c2a49","slug":"jambhani-harikatha-concludes-in-bishnoi-temple-fatehabad-news-c-127-1-ftb1003-124099-2024-10-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Fatehabad News: बिश्नोई मंदिर में जांभाणी हरिकथा का हुआ समापन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Fatehabad News: बिश्नोई मंदिर में जांभाणी हरिकथा का हुआ समापन
विज्ञापन
फतेहाबाद। शहर के सिरसा रोड पर स्थित बिश्नोई मंदिर में पिछले छह दिनों से रही जांभाणी हरिकथा का बुधवार को समापन हो गया। कथावाचक महंत स्वामी सच्चिदानंद आचार्य ने आए हुए भक्तजनों को प्रवचन किया। दोपहर 12 बजे जांभाणी हरिकथा का शुभारंभ किया गया।
मंदिर में काफी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेते हुए गुरु की महिमा सुनी। कथावाचक महंत स्वामी सच्चिदानंद आचार्य ने जांभाणी हरिकथा के समापन अवसर पर श्रद्धालुओं को कहा कि हर सच्चे बिश्नोई को नशे से दूर रहना चाहिए, नशे करने वाले व्यक्ति की समाज में कोई इज्जत नहीं होती है। आचार्य ने बिश्नोई धर्म की स्थापना के दौरान बनाए गए 29 नियमों की पालना करने के बारे में बताया, साथ उनके महत्व के बारे में भी बताया गया।
गुरु जंभेश्वर ने इस धरती पर अवतार लेकर जीव जंतुओं के साथ-साथ मानव जगत को भी कल्याणकारी मार्ग दिखाया है। वे ऐसे पहले युग प्रवर्तक थे, जिन्होंने पर्यावरण एवं जीव जंतु के संरक्षण के लिए सर्वाधिक उच्च मूल्यों वाली प्रेरणा दी। आज भी गुरु जंभेश्वर के मार्गदर्शन में चलते हुए बिश्नोई समाज के लोग पर्यावरण संरक्षण में अत्यंत सराहनीय भूमिका निभा रहे हैं। साथ ही जीव जंतुओं के संरक्षण में इस समाज का महत्वपूर्ण योगदान है। मानव कल्याण के लिए बिश्नोई धर्म के 29 नियम आज भी प्रांसगिक हैं। इसलिए इन नियमों का हर मनुष्य को पालन करना चाहिए।
विज्ञापन
आज होगा हवन
बिश्नोई धर्म के 540वें स्थापना दिवस पर सिरसा रोड स्थित बिश्नोई मंदिर में छह दिवसीय जांभाणी हरिकथा का बुधवार को समापन हो गया। फतेहाबाद बिश्नोई सभा के प्रधान भूपसिंह गोदारा ने बताया कि साल 1485 में कार्तिक माह की अष्टमी पर बिश्नोई धर्म की स्थापना की गई थी। इसके बाद से हर साल कार्तिक माह की अष्टमी पर बिश्नोई धर्म स्थापना दिवस मनाया जाता है। छह दिन चली जांभाणी हरिकथा का समापन हो गया है। वीरवार को सुबह हवन यज्ञ का आयोजन किया जाएगा। उसके बाद आगामी कार्यक्रम रहेंगे। इन कार्यक्रम में पूर्व विधायक दुड़ाराम, सिंचाई विभाग के अधीक्षक अभियंता ओपी बिश्नोई, डीएमसी संजय बिश्नोई मुख्यातिथि के तौर पर भाग लेंगे।
विज्ञापन
मंदिर में काफी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेते हुए गुरु की महिमा सुनी। कथावाचक महंत स्वामी सच्चिदानंद आचार्य ने जांभाणी हरिकथा के समापन अवसर पर श्रद्धालुओं को कहा कि हर सच्चे बिश्नोई को नशे से दूर रहना चाहिए, नशे करने वाले व्यक्ति की समाज में कोई इज्जत नहीं होती है। आचार्य ने बिश्नोई धर्म की स्थापना के दौरान बनाए गए 29 नियमों की पालना करने के बारे में बताया, साथ उनके महत्व के बारे में भी बताया गया।
विज्ञापन
गुरु जंभेश्वर ने इस धरती पर अवतार लेकर जीव जंतुओं के साथ-साथ मानव जगत को भी कल्याणकारी मार्ग दिखाया है। वे ऐसे पहले युग प्रवर्तक थे, जिन्होंने पर्यावरण एवं जीव जंतु के संरक्षण के लिए सर्वाधिक उच्च मूल्यों वाली प्रेरणा दी। आज भी गुरु जंभेश्वर के मार्गदर्शन में चलते हुए बिश्नोई समाज के लोग पर्यावरण संरक्षण में अत्यंत सराहनीय भूमिका निभा रहे हैं। साथ ही जीव जंतुओं के संरक्षण में इस समाज का महत्वपूर्ण योगदान है। मानव कल्याण के लिए बिश्नोई धर्म के 29 नियम आज भी प्रांसगिक हैं। इसलिए इन नियमों का हर मनुष्य को पालन करना चाहिए।
विज्ञापन
आज होगा हवन
बिश्नोई धर्म के 540वें स्थापना दिवस पर सिरसा रोड स्थित बिश्नोई मंदिर में छह दिवसीय जांभाणी हरिकथा का बुधवार को समापन हो गया। फतेहाबाद बिश्नोई सभा के प्रधान भूपसिंह गोदारा ने बताया कि साल 1485 में कार्तिक माह की अष्टमी पर बिश्नोई धर्म की स्थापना की गई थी। इसके बाद से हर साल कार्तिक माह की अष्टमी पर बिश्नोई धर्म स्थापना दिवस मनाया जाता है। छह दिन चली जांभाणी हरिकथा का समापन हो गया है। वीरवार को सुबह हवन यज्ञ का आयोजन किया जाएगा। उसके बाद आगामी कार्यक्रम रहेंगे। इन कार्यक्रम में पूर्व विधायक दुड़ाराम, सिंचाई विभाग के अधीक्षक अभियंता ओपी बिश्नोई, डीएमसी संजय बिश्नोई मुख्यातिथि के तौर पर भाग लेंगे।