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पोर्टल पर आवेदन की सिलिंडर लेना कठिन, सप्लायर वसूल रहे मनमाने दाम

Wed, 19 May 2021 11:07 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 19 May 2021 11:07 PM IST
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It is difficult to take cylinders of applications on the portal, suppliers are charging arbitrary prices
ऑक्सीजन की कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार ने पोर्टल पर पंजीकरण की सुविधा शुरू की है ताकि घरों तक सिलिंडर मुहैया करवा जा सके। मगर इस पोर्टल से ऑक्सीजन की कालाबाजारी पर खास असर नहीं पड़ा। हालांकि प्रशासन दावा करता है कि अब तक जिले 225 से ज्यादा जरूरतमंदों को ऑक्सीजन सिलिंडर मुहैया करवाए गए हैं। मगर रोगियों की संख्या के हिसाब से यह बहुत कम है। इसकी वजह ये है कि जरूरतमंदों की संख्या ज्यादा है।
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पोर्टल पर पंजीकरण की प्रक्रिया बेदह पेचीदा व लंबी है। यदि अचानक किसी की हालत बिगड़ जाए तो पोर्टल कारगर नहीं है। इसकी वजह ये है कि ऑक्सीजन की कमी नहीं है, लेकिन सिलिंडरों का टोटा है। खाली सिलिंडर की कीमत इतनी ज्यादा है कि आम आदमी खरीद नहीं सकता। खरीद भी ले तो बाद में उसके काम नहीं आता। आमतौर पर 18 किलोग्राम व 5 किलोग्राम के ऑक्सीजन सिलिंडर होते हैं। फतेहाबाद में रिफिलिंग की सुविधा नहीं है। इसलिए सिलिंडर हिसार से रिफिल होते हैं। वहां रिफिलिंग पर 18 किलो के सिलिंडर पर 450 रुपये व 5 किलो पर 180 रुपये लागत आती है। मगर फतेहाबाद में पहुंचते ही इन सिलिंडरों की कीमत बेकाबू हो जाती है। यहां सिलिंडर की कीमत इस बात पर निर्भर करती है कि ग्राहक मजबूर कितना है और उसकी आर्थिक हैसियत कैसी है। यदि ग्राहक गरीब है तो भी 2500-3000 रुपये से कम में सिलिंडर नहीं मिल सकता।
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गैस से ज्यादा सिलिंडरों की किल्लत
आपदा के इस दौर में ऑक्सीजन की नहीं, बल्कि सिलिंडरों की ज्यादा किल्लत है। एक खाली सिलिंडर की कीमत करीब 8000 रुपये है। कोरोना काल से पहले अस्पतालों को बहुत ज्यादा जरूरत नहीं पड़ती थी, इसलिए अस्पतालों के पास एक सीमित संख्या में ही सिलिंडर हैं। कोरोना से पहले ऑक्सीजन दुर्घटना में घायल, गंभीर रोगी या जहर के कारण तड़प रहे मरीजों को दी जाती थी। जिले के तमाम अस्पतालों में फिलहाल 800 से ज्यादा सिलिंडर नहीं हैं।
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वेल्डिंग की दुकानों से उठा रहे सिलिंडर
कोरोना काल में सिलिंडरों की किल्लत बढ़ी है। इसलिए लोगों ने मदद के लिए वेल्डिंग के दुकानदारों तक से सिलिंडर ले रखे हैं। प्रशासन ने भी उद्योगों से मदद के तौर पर सिलिंडर मंगवा रखे हैं।
कोट
सरकार द्वारा बनाए गए पोर्टल से सिलिंडर लेने की कठिन प्रक्रिया है। उस पर डॉक्टर की पर्ची व मरीज के फोटोग्राफ अपलोड करने पड़ते हैं। कई कॉलम भरने पड़ते हैं। फिर भी गारंटी नहीं कि सिलिंडर तत्काल मिल जाएगा। जबकि मरीज के लिए एक-एक सेकेंड कीमती होता है।

-विजय सहारण, अध्यक्ष, बाबा श्याम वेलफेयर सोसायटी।
कोट
जिला रेडक्रॉस सोसायटी अब ऑक्सीजन सिलिंडर घरों तक मुहैया करवा रही है। विभागीय पोर्टल पर अप्लाई करने पर मरीजों को ऑक्सीजन सिलिंडर दिए जा रहे हैं। इसके लिए ऑक्सीजनएचआरवाईडॉटइन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करके रिक्वेस्ट डालना जरूरी है।
-नरेश झांझड़ा, सचिव, रेडक्रॉस सोसायटी।
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