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Fatehabad News: गांव लाली में दूध बिकता है न दही जमाई जाती है

Fri, 04 Sep 2026 10:30 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Fri, 04 Sep 2026 10:30 PM IST
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In the village of Lali, neither is milk sold nor is curd set
गांव लाली स्थित दादी गौरी मंदिर,स्त्रोत आयोजक
रतिया। गांव लाली में शुक्रवार से दादी गौरी धाम का वार्षिक कार्यक्रम शुरू हो गया है। इस अवसर पर अंधेरी नवमी की परंपराएं निभाई जा रही हैं। इनमें पूरे गांव के लोग एक साथ लंगर में प्रसाद ग्रहण करते हैं और घरों में चूल्हा नहीं जलाते।
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प्रधान देश राज कंबोज और जिला सलाहकार जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग फतेहाबाद के शर्मा चंद लाली ने बताया कि ये परंपराएं केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं हैं। इनमें गांव की एकता, भाईचारा, सेवा और सामाजिक समरसता की भावना भी जुड़ी है।
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अंधेरी नवमी के दिन लाली गांव में दूध नहीं बेचा जाता और न ही दही बनाई जाती है। ग्रामीण दूध का उपयोग खीर बनाने या मंदिर में अर्पित करने के लिए करते हैं। मेले के दिन गांव के किसी भी घर में खाना नहीं बनता। सभी ग्रामीण सामूहिक रूप से लंगर में भोजन करते हैं। यह परंपरा गांव की एकता और भाईचारे की मिसाल है।
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सेवा और समर्पण
मेले के दौरान गांव के अनेक लोग स्वयंसेवक के रूप में सेवा में जुट जाते हैं। वे भोजन तैयार करने, श्रद्धालुओं को बैठाने, प्रसाद परोसने और पानी की व्यवस्था संभालते हैं। ग्रामीण लंगर सेवा को दादी गौरी के प्रति श्रद्धा और समर्पण का माध्यम मानते हैं। उनका कहना है कि श्रद्धालु उनके लिए मेहमान नहीं, बल्कि दादी गौरी के परिवार का हिस्सा होते हैं।
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