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Fatehabad News: राज्यसभा में सुभाष बराला बोले- मेरी फसल-मेरा ब्योरा मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जाए
Fri, 13 Feb 2026 10:53 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Fri, 13 Feb 2026 10:53 PM IST
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फतेहाबाद। राज्यसभा में शुक्रवार को सदस्य सुभाष बराला ने हरियाणा में लागू एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली व ‘मेरी फसल-मेरा ब्योरा’ पोर्टल को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि यह डिजिटल पहल उर्वरक वितरण एवं सब्सिडी प्रबंधन में संरचनात्मक सुधार का प्रतीक है, जिससे वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित हुआ है और किसानों के हितों की भी रक्षा हुई है।
सांसद बराला ने सदन को बताया कि एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली और ‘मेरी फसल-मेरा ब्योरा’ पोर्टल के एकीकरण से किसान पंजीकरण, भूमि व फसल का डिजिटल सत्यापन, उर्वरक वितरण तथा सब्सिडी निगरानी की पूरी प्रक्रिया एक ही प्रमाणिक डिजिटल मंच से जुड़ गई है। अब यूरिया, डीएपी तथा अन्य सब्सिडी युक्त उर्वरक तभी वितरित किए जाते हैं, जब पीओएस मशीन पर पोर्टल में दर्ज भूमि एवं फसल विवरण का विधिवत मिलान हो जाता है।
उन्होंने कहा कि इस तकनीकी व्यवस्था से अनधिकृत खरीद, अतिरिक्त उपयोग तथा उर्वरक डायवर्जन जैसी अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ है। इसके परिणामस्वरूप सार्वजनिक धन की उल्लेखनीय बचत दर्ज की गई है। 8 अक्तूबर 2025 के बाद उर्वरकों की खपत में तार्किक कमी आने से भारत सरकार को लगभग 700 करोड़ रुपये की अनुमानित सब्सिडी बचत हुई है। बराला ने इस सफल मॉडल को पूरे देश में लागू करने की मांग करते हुए कहा कि इससे न केवल किसानों को सीधा लाभ मिलेगा, बल्कि उर्वरक सब्सिडी प्रणाली और अधिक पारदर्शी, कुशल व जवाबदेह बनेगी।
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सांसद बराला ने सदन को बताया कि एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली और ‘मेरी फसल-मेरा ब्योरा’ पोर्टल के एकीकरण से किसान पंजीकरण, भूमि व फसल का डिजिटल सत्यापन, उर्वरक वितरण तथा सब्सिडी निगरानी की पूरी प्रक्रिया एक ही प्रमाणिक डिजिटल मंच से जुड़ गई है। अब यूरिया, डीएपी तथा अन्य सब्सिडी युक्त उर्वरक तभी वितरित किए जाते हैं, जब पीओएस मशीन पर पोर्टल में दर्ज भूमि एवं फसल विवरण का विधिवत मिलान हो जाता है।
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उन्होंने कहा कि इस तकनीकी व्यवस्था से अनधिकृत खरीद, अतिरिक्त उपयोग तथा उर्वरक डायवर्जन जैसी अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ है। इसके परिणामस्वरूप सार्वजनिक धन की उल्लेखनीय बचत दर्ज की गई है। 8 अक्तूबर 2025 के बाद उर्वरकों की खपत में तार्किक कमी आने से भारत सरकार को लगभग 700 करोड़ रुपये की अनुमानित सब्सिडी बचत हुई है। बराला ने इस सफल मॉडल को पूरे देश में लागू करने की मांग करते हुए कहा कि इससे न केवल किसानों को सीधा लाभ मिलेगा, बल्कि उर्वरक सब्सिडी प्रणाली और अधिक पारदर्शी, कुशल व जवाबदेह बनेगी।
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