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पक्का मकान मिलने की उम्मीद में कच्चा घर भी तोड़ बैठे

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 26 Nov 2021 11:30 PM IST
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In the hope of getting a pucca house, the kutcha house also broke down.
In the hope of getting a pucca house, the kutcha house also broke down.
भूना। ठंड बढ़ने के साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना के आवेदकों का दर्द बढ़ने लगा है। सरकारी सिस्टम की लेट लतीफी लोगों को अपने ही घर की चहारदीवारी में तंबू में सोने को विवश कर रही है। पक्का मकान मिलने की उम्मीद में लोग कच्चा घर भी तोड़ बैठे हैं। यही कारण है कि किसी को आंगनबाड़ी के खंडहर घर में शरण लेनी पड़ रही है तो कोई तंबू में रह रहा है।
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अधिकारिक तौर पर 50 से अधिक परिवारों को पिछले दो वर्षों में अलग-अलग समय में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान बनाने का स्वीकृत पत्र दिया जा चुका है। चयनित परिवारों ने कच्चे आशियाने तोड़कर पक्की नींव भर दी है, ताकि पहली किस्त जारी हो सके। मगर दो साल में किसी भी जरूरतमंद को किस्त जारी नहीं हुई है। भूना के वार्ड नंबर 13 निवासी अंगूरी देवी ने सर्दी से बचने के लिए पिछले कई महीने से आंगनबाड़ी के खंडहर भवन में शरण ली हुई है। अंगूरी देवी ने बताया कि अधिकारियों ने पुराना घर तोड़कर नींव भरने के लिए एक साल पहले कहा था। उन्होंने कच्चा घर तोड़ दिया और पक्की नींव भर दी। मगर आज तक कोई पैसा नहीं मिला। इसलिए परिवार खुले आसमान के नीचे रहने पर मजबूर हो गया। अब सर्दी से बचाव के लिए आंगनबाड़ी में डेरा डाले बैठे हैं।
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पहले बेशक कच्चा घर था, लेकिन सर्दी से तो बच जाते थे
वार्ड नंबर 13 की ही निवासी सुनीता देवी कहती हैं कि पुराने घर की जियो टैगिंग करके फोटो अपलोड की थी। मगर 11 महीने बीतने के बावजूद उनका मकान नहीं बन पाया है। नगरपालिका सचिव से लेकर डीसी तक गुहार लगा चुके हैं। आश्वासनों के सिवाय कुछ नहीं मिला। अब पॉलिथीन का तंबू बनाकर बच्चों के साथ खुले आसमान के नीचे सर्दी में रहने पर मजबूर हैं। सुनीता ने कहा कि अगर योजना का लाभ नहीं देना था तो उनका पुराना कच्चा घर क्यों तुड़वाया। पहले बेशक टूटा-फूटा घर था, लेकिन बच्चे तो सर्दी से बचे हुए थे।
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चहारदीवारी में ही तंबू लगाकर कर रहे इंतजार
वार्ड नंबर 13 की निवासी फूलपति ने बताया कि पिछले कई महीनों से घर टूटने के बाद पक्का बनवाने के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। अब प्लॉट की चहारदीवारी में ही तंबू लगाकर पक्के मकान के लिए किस्त मिलने का इंतजार कर रहे हैं। तेज आंधी और बारिश हो जाती है तो तंबू भी उखड़ जाता है।
आज भी पहली किस्त मिलने का इंतजार
हिसार रोड निवासी विधवा भागी देवी के साथ-साथ जोरा सिंह, रोशनी देवी, ढक्की मोहल्ला भूना निवासी रामरति व लाजवंती सहित कई परिवार हैं, जो लचर व्यवस्था के कारण खुले आसमान के नीचे रहने पर मजबूर हो गए हैं। ये भी बताते हैं कि जियो टैगिंग करने आए कर्मचारियों ने घरों की हालात अनुसार फोटो व दस्तावेज ऑनलाइन करके कच्चे एवं नकारा हो चुके मकान तुड़वा दिए थे। नींव भरने के बाद पहली किस्त देने का आश्वासन दिया था। मगर अब तक एक पैसा नहीं मिला है।
नगरपालिका को योजना का साढ़े तीन करोड़ से ज्यादा का बजट मिला
नगरपालिका भूना में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जरूरतमंद बीपीएल एवं एपीएल परिवारों से वर्ष 2017 में आवेदन मांगे गए थे। इसको लेकर 5400 लोगों ने फार्म जमा करवाए थे। ये फार्म एडीसी कार्यालय के माध्यम से जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद वर्ष 2018 में 1076 लोगों की सूची नगरपालिका भूना में भेजी गई थी तथा जियो टैगिंग करके योग्य पात्र लोगों को मकान बनाने के लिए पहली किस्त देने के निर्देश दिए गए थे। मगर जियो टैगिंग करने वाली एजेंसी के भ्रष्टाचार के कारण गरीबों को आशियाना नहीं मिल पाया। इसी साल नगरपालिका अधिकारियों ने पुन: सर्वे किया तो 1076 आवेदनकर्ताओं में से 213 लोग योजना के पात्र मिले थे। इनमें से कई लोगों को लेटर भी दिए हैं। कई परिवारों के पास जमीन की रजिस्ट्री है और कुछ लोगों के पास 50 वर्ष पहले पंचायत द्वारा अनुदान में दिए हुए तीन-तीन मरले के प्लॉट भी हैं। मगर नपा अधिकारी उन्हें राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज ना होने का हवाला देकर किस्त रोके हुए हैं।
नगरपालिका अधिकारी योजना के पैसे का ब्याज खा रहे : निवर्तमान पार्षद
नगरपालिका के निवर्तमान पार्षद सुदेश ग्रोवर ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत वर्ष 2018 में साढ़े तीन करोड़ की राशि नगरपालिका भूना को दी थी। उपरोक्त पैसे को प्राइवेट बैंकों में जमा किया हुआ है और अधिकारी उसका ब्याज कमा रहे हैं।

कोट
करीब चार महीने पहले मैंने ड्यूटी ज्वाइन की है। इसलिए पीछे क्या हुआ, उसके बारे में मुझे जानकारी नहीं है। मगर प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर जो बजट राशि भूना आई हुई थी, उसको कुछ महीने पहले मुख्यालय पर वापस ले लिया गया है। योजना में शामिल पात्र लोगों को दिसंबर माह तक घर बनाने के लिए किस्त जारी होगी। मौके का निरीक्षण कर पीड़ित परिवारों के हालात देखे हैं, बेहद चिंताजनक है।
संदीप भुक्कल, सचिव, नगरपालिका भूना

In the hope of getting a pucca house, the kutcha house also broke down.

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