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भट्टू में कर्ण कोट टीले पर तेज बारिश से मिट्टी बही, प्राचीन दीवार निकली
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खुदाई के बाद निकले अवशेष।
- फोटो : Fatehabad
भूना। गांव भट्टू में कर्ण कोट टीले पर शुक्रवार को हुई तेज बारिश के कारण मिट्टी बह जाने से दिखी एक प्राचीन दीवार निकली। ईंटे से माना जा रहा यह गुप्त वंश के समय की है। हालांकि, इससे पूर्व भी कई बार कर्ण कोट टीले पर कसाण व गुप्तवंश की तीन हजार साल पुरानी चीजें मिल चुकी है। इनमें आटा चक्की, चांदी के सिक्के, तलवार के कुंडे, पिघला हुआ लोहा, दो चक्र, मुहर व मंदिर होने के निशान शामिल हैं। वहीं, एक काले रंग की मूर्ति भी मिली है। जहां से उक्त चीजें मिली हैं, उस जगह को प्रदेश सरकार ने कर्ण कोट टीले पर संग्रहालय बनाने के लिए मंजूरी दी हुई है। पुरातत्व विभाग की ओर से अधिग्रहण करने की प्रक्रिया चल रही है। पुरातत्व विभाग इस जगह को खरीद कर इस पर आगे का शोध शुरू करेगा। पुरातत्व विभाग की टीम यहां पर दौरा कर चुकी है।
सेफ्टी इंजीनियर ने शुरू किया था शोध
गांव के ही सेफ्टी इंजीनियर अजय कुमार ने बताया कि जब उसे गांव से कुछ दूरी पर खेतों में बिखरे हुए पत्थर और कंकाल के अंश मिले तो फिर उन्होंने खुद ही इस पर शोध करना शुरू कर दिया। इसके बाद उन्हें कई ऐसी चीजें मिली, जिसमें कुछ चीजें तीन हजार साल पुरानी थीं, जो कसाण वंश व गुप्तवंश काल की हैं। अजय ने पुरातत्व विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया तो डिप्टी डायरेक्टर बुनानी भट्टाचार्य अपनी टीम के साथ पांच माह पहले मौके पर आए थे। इसके बाद उन्होंने भी यह माना कि यह वस्तुएं तीन हजार साल पहले की हैं। इन चीजों को पुरातत्व विभाग की टीम को सौंप दिया। वहीं, अजय को जिम्मेदारी दी कि वह इस जगह की देखरेख करें और अन्य कुछ मिले तो उन्हें समय-समय पर जानकारियों से अवगत करवाते रहें।
पुराने अंश के आधार पर कर्ण कोट की मिला अस्तित्व
सेफ्टी इंजीनियर अजय कुमार ने बताया कि भट्टू में जमीन के नीचे जो पुराने समय के अंश मिले हैं। उस जगह का नाम कर्ण कोट बताया गया है, जो एक गांव था। इतिहास के मुताबिक यह गांव संघर्ष की कहानी बयां करता है। यहां कई कंकाल के अंश मिले हैं। एक वाटर चैनल काफी घेरे में बना हुआ है। एक कुंआ भी है, जो काफी वर्ष पुराना है। संगमरमर के लाल पत्थर के टुकड़े मिले थे, जो दिल्ली के लाल किले के निर्माण में प्रयोग हुआ है। कसाण समय का एक पत्थर ऐसा है, जो फर्श को चिकना बनाने के लिए प्रयोग होता है। वहीं, मौर्य काल, कसाण, गुप्तवंश तथा मुगल काल के अवशेष मिले हैं। अजय कुमार ने बताया कि महाजनपद कालीन पंच का मिलना इस बात का संकेत है कि यह महानगर वैदिक काल से यहां अस्तित्व में था, जो सरस्वती नदी के तट पर स्थापित था।
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गांव भट्टू में हजारों साल पहले के अंश मिले हैं। कर्ण कोट गांव का जमीन के नीचे दबा होना माना जा रहा है। जमीन को अधिग्रहण करने के लिए सरकार ने अधिसूचना जारी कर दी है। इसके बाद पुरातत्व टीम वहां खुदाई करेगी। अन्य कई महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाएगी, ताकि और पुराना सामान मिल सके।
डॉ. बुनानी भट्टाचार्य, डिप्टी डायरेक्टर, पुरातत्व विभाग
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सेफ्टी इंजीनियर ने शुरू किया था शोध
गांव के ही सेफ्टी इंजीनियर अजय कुमार ने बताया कि जब उसे गांव से कुछ दूरी पर खेतों में बिखरे हुए पत्थर और कंकाल के अंश मिले तो फिर उन्होंने खुद ही इस पर शोध करना शुरू कर दिया। इसके बाद उन्हें कई ऐसी चीजें मिली, जिसमें कुछ चीजें तीन हजार साल पुरानी थीं, जो कसाण वंश व गुप्तवंश काल की हैं। अजय ने पुरातत्व विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया तो डिप्टी डायरेक्टर बुनानी भट्टाचार्य अपनी टीम के साथ पांच माह पहले मौके पर आए थे। इसके बाद उन्होंने भी यह माना कि यह वस्तुएं तीन हजार साल पहले की हैं। इन चीजों को पुरातत्व विभाग की टीम को सौंप दिया। वहीं, अजय को जिम्मेदारी दी कि वह इस जगह की देखरेख करें और अन्य कुछ मिले तो उन्हें समय-समय पर जानकारियों से अवगत करवाते रहें।
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पुराने अंश के आधार पर कर्ण कोट की मिला अस्तित्व
सेफ्टी इंजीनियर अजय कुमार ने बताया कि भट्टू में जमीन के नीचे जो पुराने समय के अंश मिले हैं। उस जगह का नाम कर्ण कोट बताया गया है, जो एक गांव था। इतिहास के मुताबिक यह गांव संघर्ष की कहानी बयां करता है। यहां कई कंकाल के अंश मिले हैं। एक वाटर चैनल काफी घेरे में बना हुआ है। एक कुंआ भी है, जो काफी वर्ष पुराना है। संगमरमर के लाल पत्थर के टुकड़े मिले थे, जो दिल्ली के लाल किले के निर्माण में प्रयोग हुआ है। कसाण समय का एक पत्थर ऐसा है, जो फर्श को चिकना बनाने के लिए प्रयोग होता है। वहीं, मौर्य काल, कसाण, गुप्तवंश तथा मुगल काल के अवशेष मिले हैं। अजय कुमार ने बताया कि महाजनपद कालीन पंच का मिलना इस बात का संकेत है कि यह महानगर वैदिक काल से यहां अस्तित्व में था, जो सरस्वती नदी के तट पर स्थापित था।
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गांव भट्टू में हजारों साल पहले के अंश मिले हैं। कर्ण कोट गांव का जमीन के नीचे दबा होना माना जा रहा है। जमीन को अधिग्रहण करने के लिए सरकार ने अधिसूचना जारी कर दी है। इसके बाद पुरातत्व टीम वहां खुदाई करेगी। अन्य कई महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाएगी, ताकि और पुराना सामान मिल सके।
डॉ. बुनानी भट्टाचार्य, डिप्टी डायरेक्टर, पुरातत्व विभाग