फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Fatehabad News ›   In 2022, Fatehabad remained industrially backward, apart from the cotton industry, mustard and sunflower oil mills were deserted.

Fatehabad News: साल 2022 में भी औद्योगिक रूप से पिछड़ा रहा फतेहाबाद, कॉटन इंडस्ट्री के अलावा सरसों व सूरजमुखी के तेल मिल सुनसान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 26 Dec 2022 11:17 PM IST
विज्ञापन
In 2022, Fatehabad remained industrially backward, apart from the cotton industry, mustard and sunflower oil mills were deserted.
फतेहाबाद। कभी कॉटन इंडस्ट्री के नाम से मशहूर फतेहाबाद बड़ी औद्योगिक यूनिट के लिए तरस रहा है। एक समय था, जब जिले में कॉटन इंडस्ट्री के अलावा सरसों व सूरजमुखी के तेल की मिलें थी, लेकिन अब यह सुनसान पड़ी हैं। जिले में राइस शेलरों की संख्या तो अच्छी खासी है, लेकिन इसके अलावा कोई बड़ा उद्योग आज तक नहीं पनपा है। इस कारण औद्योगिक रूप से फतेहाबाद काफी पिछड़ता जा रहा है। यहां छोटे-मोटे कारोबार तो हैं, लेकिन बड़ा उद्योग या कोई प्लांट न लगने के कारण युवाओं को भी रोजगार नहीं मिल रहा है।
विज्ञापन

फतेहाबाद शहर का सिरसा रोड कभी कॉटन जीनिंग मिल व सरसों के तेल तथा खल की बड़ी-बड़ी मिलों के लिए पूरे प्रदेश में मशहूर रहा है। एक समय था, जब सिरसा रोड पर कॉटन की 10 और सरसों के तेल की पांच फैक्टरियां थी। कॉटन मिलों से नरमा व कपास से रूई निकाली जाती थी, वहीं बिनौलों की खल बनती थी। इसी प्रकार सरसों मिल में सरसों का तेल व खल का उत्पादन किया जाता था। उस समय सरसों मिलों में कोल्हू चलाकर सरसों का तेल निकाला जाता था और इसी से खल भी निकलती रहती थी। इन मिलों में हजारों की संख्या में प्रवासी मजदूर काम करने आते थे और उनके लिए बड़ी-बड़ी कॉलोनियां भी बनी हुई थी। लेकिन अब यह अरबों रुपये की मिलें सुनसान पड़ी हैं। इसके बाद शहर या इसके आसपास के क्षेत्रों में ऐसी कोई इंडस्ट्री नहीं लगी, जिससे कि सैकड़ों या हजारों की संख्या में लोगों को एक साथ रोजगार मिल सके। संवाद
विज्ञापन

औद्योगिक इकाइयों के नाम पर मात्र राइस शेलर
जिले में औद्योगिक इकाइयों के मामले में अगर कुछ रह गया है तो वह केवल मात्र राइस शेलर। इस समय पूरे जिले में करीब 240 राइस शेलर खुले हुए हैं। यह राइस शेलर धान उत्पादक क्षेत्रों रतिया, टोहाना, जाखल व कुलां में खुले हैं। फतेहाबाद व भूना में भी इनकी संख्या नाममात्र है। इसके अलावा लघु उद्योग जैसे फुटवियर फैक्टरियां, बिस्कुट व टॉफी फैक्टरियां, लोहे व लकड़ी की अल्मारियों सहित गांवों में छोटे-मोटे लघु उद्योग हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

फूड प्रोसेसिंग प्लांट का मसला अटका
फतेहाबाद के भूना में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार के दौरान फूड प्रोसेसिंग प्लांट लगाने का मुद्दा था। उल्लेखनीय है कि फतेहाबाद जिले में किन्नू व अमरूद की सर्वाधिक खेती होती है और किसानों को बाग मालिकों को इन फसलों को बेचने के लिए दूसरी मंडियों का रुख करना पड़ता है। ऐसे में फूड प्रोसेसिंग प्लांट बनने से यहां पर जूस कंपनियों को लाभ हो सकता है, लेकिन यह योजना भी आज तक सिरे नहीं चढ़ पाई है।
उद्योग
कुल पंजीकृत उद्योग : 1800
लघु उद्योगों की संख्या : 1477
घरेलू पंजीकृत औद्योगिक इकाइयां : 20
वर्जन
फतेहाबाद जैसे शहर में बड़ी औद्योगिक इकाइयों की सख्त जरूरत है। अगर औद्योगिक इकाइयां आएंगी तो शहर के विकास के साथ-साथ युवाओं को रोजगार भी मिलेगा। बाहर से लोग आएंगे तो इसका फायदा मार्केट को भी होगा।

-जगदीश भादू, प्रधान, अनाज मंडी व्यापार मंडल
2005 से पहले तक सिरसा रोड पर कॉटन व तेल की कई मिलें थी, जो अब अस्तित्व में नहीं है। फिलहाल फतेहाबाद में किन्नू व अमरूद की अच्छी खेती होती है, ऐसे में यहां पर फूड प्रोसेसिंग प्लांट लगाया जा सकता है।
-ललित मेहता, व्यवसायी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed