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जिला टॉपर बेटी के साथ शिक्षा विभाग का भद्दा मजाक, प्रथम स्थान पर दूसरे को सम्मानित करवाने की तैयारी

Sun, 14 Aug 2016 11:59 PM IST
fatehabad
fatehabad Updated Sun, 14 Aug 2016 11:59 PM IST
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ignorence of district topper, indipendence day, fatehabad
दसवीं में जिले में प्रथम स्थान पर रही सरस्वती स्कूल ढांड की कंचन व उसकी मार्कलिस्ट। - फोटो : amar ujala
जिलास्तरीय स्वतंत्रता दिवस पर जिले की टॉपर छात्रा के साथ शिक्षा विभाग ने एक भद्दा मजाक कर दिया है। ढांड की रहने वाली कंचन दसवीं की परीक्षा में 487 अंक लेकर जिले में टॉप पर रही थी। उसे महज इस वजह से स्वतंत्रता दिवस समारोह में सम्मानित करने से इंकार कर दिया गया है क्योंकि कंचन एक निजी स्कूल सरस्वती स्कूल ढांड की छात्रा है। बकौल भट्टू बीईओ भागीरथ पंवार, स्वतंत्रता दिवस समारोह में सिर्फ उन्हीं बच्चों को सम्मानित किया जाता है, जो सरकारी स्कूल का विद्यार्थी हो, प्राइवेट स्कूलों से आवेदन ही नहीं लिए जाते।
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अब अगर ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का नारा देने वाले प्रशासन के अधिकारी अगर जिले की मेधावी बेटियों के साथ ऐसा भेदभाव करेंगे तो कौन मां-बाप अपनी बच्चियों को स्कूलों में पढ़ने भेजेगा। हालांकि ‘अमर उजाला’ द्वारा सीटीएम सुरेंद्र पाल के संज्ञान में लाने के बाद सीटीएम ने खुद इस मामले को देखने की बात कही है।
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टॉपर बेटी को दरकिनार कर द्वितीय को दिखा दिया प्रथम
शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने सरकारी स्कूलों की चौधर जताने के लिए जिले की टॉपर बेटी को ही दरकिनार कर दिया। इतना ही नहीं, अधिकारियों ने इससे एक कदम आगे जाते टॉपर बेटी कंचन का सम्मान जिले में द्वितीय स्थान हासिल करने वाले दूसरे विद्यार्थी को दे दिया। अब जिला प्रशासन द्वारा जारी की गई सूची में दसवीं में जिले में पहले नंबर पर रहने वाली कंचन के नाम की जगह रवींद्र को पहले स्थान पर दिखा उसको सम्मानित करने का एलान कर दिया।
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सम्मानित होने वालों की सूची पहले ही विवादों के घेरे में
समारोह में जिन लोगों को सम्मानित किया जाना है। वो सूची पहले ही विवादों के घेरे में आ गई है। 50 लोगों की इस सूची में 9 जिलास्तरीय अधिकारी हैं। तकरीबन 25 सरकारी कर्मचारी हैं। ऐसे में 50 में 34-35 कर्मचारी सरकारी विभागों से संबंधित हैं। दूसरी ओर कई ऐसे लोगों को सम्मानित होने का मौका नहीं दिया गया, जिन्होंने वास्तव में अपने अपने क्षेत्रों में बेहतरीन काम किया है।

‘प्राइवेट स्कूलों के विद्यार्थियों को सम्मानित करने के लिए हम क्यों कहें। अगर उनको लगता है कि उनके बच्चे सम्मानित हों तो खुद डीसी दफ्तर में आवेदन देते। हमारे पास सिर्फ सरकारी स्कूलों के बच्चों के नाम भेजने का पत्र उच्चाधिकारियों से आया था। उसी अनुसार नाम भेज दिए गए।’

भागीरथ पंवार, खंड शिक्षा अधिकारी, भट्टू।

‘विभाग का ये नजरिया मेधावी बच्चों का दिल तोडने वाला है। विभाग के अधिकारी ऐसा कैसे कर सकते हैं कि जो बच्ची जिले में टॉपर आई है, उसे नजरअंदाज कर द्वितीय स्थान वाले बच्चे को प्रथम घोषित कर दें।’
महेंद्र कुलडिय़ा, संचालक सरस्वती हाई स्कूल, ढांड।

‘अगर ऐसा है तो उक्त छात्रा और उनके स्कूल संचालकों को तुरंत कागजों के साथ मुझे मिलें और जो भी संभव होगा, उस तरह से उनकी मदद की जाएगी।’
सुरेंद्रपाल, सीटीएम, फतेहाबाद ।
 
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