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Fatehabad News: अफसरों के दावे अर्श पर...स्कूलों में सुविधाएं फर्श पर

Sun, 20 Apr 2025 11:21 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Sun, 20 Apr 2025 11:21 PM IST
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How can we compete with private schools, students forced to sit on mats
गांव अकांवाली के राजकीय प्राइमरी स्कूल में पुराने बोर्ड पर पढ़ाते हुए ​शिक्षकसंवाद
फतेहाबाद। शिक्षा विभाग भले ही सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों के समकक्ष सुविधाएं देने का दावा करता हो, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। जिले के अधिकांश सरकारी स्कूलों में विद्यार्थी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। जिले के 200 से अधिक स्कूलों में छात्र टाट-पट्टी पर बैठने को मजबूर हैं।
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शिक्षा विभाग ने दो साल पहले 4,500 ड्यूल डेस्क खरीदे थे। इनको जिले के मॉडल संस्कृति स्कूलों में भेजा गया था। अन्य सरकारी स्कूलों में ड्यूल डेस्क उपलब्ध नहीं हैं। राजकीय हाई स्कूल लोहाखेड़ा में निरीक्षण के दौरान विद्यार्थी जमीन पर टाट-पट्टी पर बैठे मिले थे। कारण पूछने पर शिक्षकों ने बताया कि विभाग की ओर से अब तक स्कूल में डेस्क नहीं भेजे गए हैं।
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नेटवर्क के अभाव में बेकार पड़े स्मार्ट बोर्ड : ग्रामीण क्षेत्रों में लगे स्मार्ट बोर्ड नेटवर्क सुविधा न होने से चल नहीं पा रहे हैं। यही नहीं जहां पर पांच बोर्ड की जरूरत है वहां पर दो से तीन ही स्मार्ट बोर्ड भेजे गए हैं। ऐसे में विद्यार्थी पुराने तरीके से ही पढ़ाई कर रहे हैं।
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छह खंडों में कुल 620 स्कूल, सुविधाएं सीमित



खंड प्राइमरी मिडिल हाई सीनियर सेकेंडरी कुल

फतेहाबाद 104 20 16 25 165

भूना 52 4 6 21 83

भट्टूकलां 38 6 5 17 66

टोहाना 67 18 4 20 109

रतिया 92 26 3 24 145

जाखल 33 8 2 9 52

कुल 386 82 36 116 620

इसमें से अधिकतर स्कूलों में स्मार्ट बोर्ड और ड्यूल डेस्क जैसी सुविधाएं अभी तक नहीं पहुंची हैं।

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बीईओ कार्यालय के पास के स्कूल में पेयजल की समस्या

जिला मुख्यालय के पास बने राजकीय मॉडल संस्कृति प्राथमिक स्कूल खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय के समीप स्थित है। इस स्कूल में भी पीने के लिए ठंडे पानी की व्यवस्था नहीं है। गेट के पास लगी टंकी का पानी गर्म है, जिससे बच्चे मजबूरी में प्यास बुझा रहे हैं। कुछ बच्चे तो नलों से बहते पानी को पीते हुए नजर आए। शिक्षिका ने बताया कि पानी ताजा आ रहा है, इसलिए बच्चे वहीं पी लेते हैं।

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स्मार्ट बोर्ड भी केवल दिखावे तक सीमित

विभाग ने मॉडल संस्कृति स्कूलों में तीन साल पहले स्मार्ट बोर्ड भेजे थे, लेकिन उनकी देखरेख के लिए कोई बजट तय नहीं किया गया। कई स्मार्ट बोर्ड खराब हो चुके हैं और नेटवर्क सुविधा के अभाव में काम नहीं कर रहे हैं। राजकीय मॉडल संस्कृति प्राथमिक पाठशाला, अहरवां में स्मार्ट बोर्ड खराब हैं और मरम्मत का कोई प्रबंध नहीं है। वहीं, राजकीय प्राइमरी स्कूल अकांवाली में स्मार्ट बोर्ड अब तक नहीं भेजे गए हैं। यहां अभी भी पारंपरिक ब्लैक बोर्ड के माध्यम से पढ़ाई हो रही है।


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शिक्षा विभाग मुकाबला निजी स्कूलों से करना चाहता है लेकिन सुविधाएं पूरी नहीं है। स्कूलों में स्मार्ट बोर्ड जरूर दिए गए हैं लेकिन आधे-अधूरे हैं। इन्हें ठीक करवाने के लिए बजट नहीं है। यहां तक मॉडल संस्कृति के अलावा अन्य स्कूलों में पुराने ड्यूल डेस्क है जो कि टूट चुके हैं। विभाग को मूलभूत सुविधाओं की तरफ ध्यान देना चाहिए।

- देवेंद्र सिंह दहिया, राज्य चेयरमैन, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ ।
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