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Fatehabad News: खामोश मैदान में सिसक रहीं उम्मीदें

Fri, 26 Jun 2026 10:58 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Fri, 26 Jun 2026 10:58 PM IST
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Hopes sobbing in the silent field
गांव गाजुवाला के खेल मैदान बने शौचालय का टूटा गेट। संवाद
समैन। गांव गाजुवाला का खेल स्टेडियम बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बदहाली की स्थिति में पहुंच गया है। खिलाड़ियों के लिए आवश्यक संसाधन न होने के कारण 80 से अधिक खिलाड़ी दूसरे गांवों में जाकर अभ्यास करने को मजबूर हैं। राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन का सपना देखने वाले खिलाड़ियों को रोजाना बिठमड़ा, हांसेवाला और नांगला जैसे गांवों में प्रशिक्षण के लिए जाना पड़ रहा है।
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खिलाड़ी सौरभ, चिराग, सुशील, मोती, चक्कर, आशीष, अंकुश, भान, विलक्षण, लविश, बीटू, मोहित, अमित कुमार, सुनील और दिलप्रीत आदि का कहना है कि वे बेहतर सुविधाओं न मिलने से सही अभ्यास नहीं कर पा रहे हैं लेकिन फिर भी अभ्यास जारी रखे हुए हैं। यहां स्थिति ऐसी बन चुकी है कि खेल स्टेडियम अब खेल गतिविधियों के बजाय आवारा पशुओं का शरणगाह बन चुका है।
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पशुओं की आवाजाही और गोबर के कारण पूरे परिसर में गंदगी फैली हुई है जिससे यहां पर अभ्यास करना कठिन हो गया है। खिलाड़ियों ने बताया कि स्टेडियम में न तो पीने के पानी की व्यवस्था है और न ही शौचालय की सुविधा उपलब्ध है। जो शौचालय बना है वह पूरी तरह जर्जर हो चुका है। उसकी दरवाजे और खिड़कियां तक टूट चुकी हैं।
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स्टेडियम में बिजली की व्यवस्था भी नहीं है जिससे शाम के समय अभ्यास प्रभावित होता है। व्यायामशाला की हालत भी बेहद खराब है और उपकरण अनुपयोगी हो चुके हैं। मैदान की चहारदीवारी जगह-जगह से टूट चुकी है, जिसके कारण बेसहारा पशु आसानी से अंदर प्रवेश कर जाते हैं।इसके अलावा यहां पर कोच की कोई व्यवस्था नहीं है जिससे उनको सही से प्रशिक्षण नहीं मिल पा रहा है। खिलाड़ियों ने सरकार और खेल विभाग से मांग की है कि स्टेडियम की स्थिति में सुधार किया जाए। पेयजल, शौचालय, बिजली, कोचिंग व्यवस्था और खेल उपकरण तुरंत उपलब्ध कराए जाएं ताकि वे सही से अभ्यास कर सकें।
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गांव के खेल स्टेडियम की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। यहां पेयजल, शौचालय व बिजली तक की सुविधा नहीं है। अभ्यास के लिए खेल का सामान तक नहीं है। इसी कारण खिलाड़ी साथ लगते गांव बिठमड़ा में जाकर खेलों का अभ्यास करने को मजबूर हैं।
- आशीष, कबड्डी खिलाड़ी।
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गांव के खिलाड़ियों के लिए सरकार की तरफ से कोई खेल सुविधा नहीं है। इस कारण वे अन्य गांवों में जाकर अभ्यास करते हैं। वे स्वयं भी क्रिकेट के अच्छे खिलाड़ी रहे हैं। उनकी सरकार से मांग है कि खिलाड़ियों के लिए यहां पर खेल सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएं।
- ओम प्रकाश बोलान, पूर्व खिलाड़ी।
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स्टेडियम की चहारदीवारी तक टूटी हुई है। शौचालय के दरवाजे टूटे हुए है। शाम होते ही यहां पर अंधेरा छा जाता है। इस कारण वे साथ लगते गांव बिठमड़ा में जाकर अभ्यास करते हैं। अगर यहां पर उनको सुविधा मिले तो उनको आने-जाने का समय बच सकता है।
-सौरभ, कबड्डी खिलाड़ी।
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गांव में चार एकड़ पंचायती जमीन में बने खेल स्टेडियम में फिलहाल खिलाड़ियों के लिए कोई सुविधा नहीं है। व्यायामशाला पूरी तरह से खराब हो चुकी है। चहारदीवारी टूटी हुई है। पेयजल व शौचालय की सुविधा नहीं है। उनकी सरकार से मांग है कि यहां के खिलाड़ियों के लिए सुविधाएं उपलब्ध करवाए ताकि वे खेलों में अच्छा प्रदर्शन कर गांव का नाम रोशन कर सकें।

- बिंद्र सिंह, सरपंच प्रतिनिधि गाजुवाला।
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गांव गाजुवाला में बने खेल स्टेडियम में सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए गांव के सरपंच प्रतिनिधि उनके पास आए थे। वे पहले भी इसका निरीक्षण कर चुके हैं। यह स्टेडियम खेल विभाग के अधीन आता है। इसके रखरखाव का जिम्मा खेल विभाग के पास है।
- बलजीत सिंह, बीडीपीओ जाखल।
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