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आठ गांवों के तालाबों में में स्वास्थ्य विभाग ने छोड़ी गम्बूजिया मछलियां
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स्वास्थ्य विभाग बड़ोपल की टीम गम्बुजिया मछलियों को तालाब में छोड़ते हुए।
- फोटो : Fatehabad
फतेहाबाद। मलेरिया व डेंगू के सीजन को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बड़ोपल की टीम द्वारा स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत आने वाले गांव बड़ोपल, धारणियां, चिंदड़, कुम्हारिया, ढांड़, खजूरी, चंद्रावल एवं धांगड़ गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव के तालाबों में गम्बूजिया मछलियां छोड़ी है।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्वास्थ्य केंद्र में बनाई गई फिश हैचरी में मछली पालन किया जाता है और प्रत्येक वर्ष बारिश के दिनों में गांव के तालाबों में छोड़ा जाता है ताकि मछली गांव के तालाबों में पैदा होने वाले मच्छरों के लारवा को खाकर नष्ट कर दें और मच्छरों को पैदा होने से रोका जा सके जिससे कि लोगों को मलेरिया व डेंगू से बचाया जा सके। स्वास्थ्य विभाग की टीम में कुलदीप सिंह एचआई, सुरेंद्र कुमार, नरेश कुमार के साथ गांव के पंचायत मेंबर, आशा वर्कर्स आदि शामिल रहे हैं।
जिले में मलेरिया को लेकर स्थिति
वर्ष केस मिले
2013 992
2014 368
2015 107
2016 59
2017 42
2018 2
2019 5
2020 0
2021 1
2022 0
ये हैं मलेरिया बीमारी फैलने के कारण
मलेरिया बुखार मादा एनाफिलिस नामक मच्छर के काटने से फैलता है। मलेरिया का मच्छर रुके हुए गंदे पानी में पनपता है और यह रात के समय काटता है।
मलेरिया बुखार के लक्षण
ठंड लगना, कंपकपी, सिर दर्द, उल्टी एवं चक्कर आना, तेज बुखार एवं अत्यधिक पसीने के साथ बुखार का कम होना, जी मचलाना आदि मलेरिया बुखार के लक्षण है। ये लक्षण दिखने पर जांच जरूर करवाएं।
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बीमारी से खुद को ऐसे बचाएं
रात को पूरी बाजू के कपड़े पहनकर सोना चाहिए।
रात के समय मच्छरदानी का प्रयोग करें।
अपने घरों के दरवाजे व खिड़कियों पर जाली लगवाएं।
पानी के सभी बर्तन, टंकी आदि को ढक कर रखें।
घर के आसपास पानी जमा न होने दें, पानी से भरे गड्ढों में मिट्टी भर दें।
टायरों को बिखरे पड़े न रहन दें, बिखरें टायरों में पानी जमा होने से मच्छर पनपते हैं।
कोट
मलेरिया और डेंगू से बचाव को लेकर लोगों का जागरूक होना जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने इसको लेकर अभियान भी चला रखा है। टीमें सर्वे करके लारवा को नष्ट कर रही है ताकि मच्छर को पनपने से रोका जा सके।
- डॉ. विष्णु मित्तल, जिला महामारी अधिकारी
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स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्वास्थ्य केंद्र में बनाई गई फिश हैचरी में मछली पालन किया जाता है और प्रत्येक वर्ष बारिश के दिनों में गांव के तालाबों में छोड़ा जाता है ताकि मछली गांव के तालाबों में पैदा होने वाले मच्छरों के लारवा को खाकर नष्ट कर दें और मच्छरों को पैदा होने से रोका जा सके जिससे कि लोगों को मलेरिया व डेंगू से बचाया जा सके। स्वास्थ्य विभाग की टीम में कुलदीप सिंह एचआई, सुरेंद्र कुमार, नरेश कुमार के साथ गांव के पंचायत मेंबर, आशा वर्कर्स आदि शामिल रहे हैं।
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जिले में मलेरिया को लेकर स्थिति
वर्ष केस मिले
2013 992
2014 368
2015 107
2016 59
2017 42
2018 2
2019 5
2020 0
2021 1
2022 0
ये हैं मलेरिया बीमारी फैलने के कारण
मलेरिया बुखार मादा एनाफिलिस नामक मच्छर के काटने से फैलता है। मलेरिया का मच्छर रुके हुए गंदे पानी में पनपता है और यह रात के समय काटता है।
मलेरिया बुखार के लक्षण
ठंड लगना, कंपकपी, सिर दर्द, उल्टी एवं चक्कर आना, तेज बुखार एवं अत्यधिक पसीने के साथ बुखार का कम होना, जी मचलाना आदि मलेरिया बुखार के लक्षण है। ये लक्षण दिखने पर जांच जरूर करवाएं।
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बीमारी से खुद को ऐसे बचाएं
रात को पूरी बाजू के कपड़े पहनकर सोना चाहिए।
रात के समय मच्छरदानी का प्रयोग करें।
अपने घरों के दरवाजे व खिड़कियों पर जाली लगवाएं।
पानी के सभी बर्तन, टंकी आदि को ढक कर रखें।
घर के आसपास पानी जमा न होने दें, पानी से भरे गड्ढों में मिट्टी भर दें।
टायरों को बिखरे पड़े न रहन दें, बिखरें टायरों में पानी जमा होने से मच्छर पनपते हैं।
कोट
मलेरिया और डेंगू से बचाव को लेकर लोगों का जागरूक होना जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने इसको लेकर अभियान भी चला रखा है। टीमें सर्वे करके लारवा को नष्ट कर रही है ताकि मच्छर को पनपने से रोका जा सके।
- डॉ. विष्णु मित्तल, जिला महामारी अधिकारी