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उजाड़ जमीन पर दम तोड़ रही विकास की आस
fatehabad
Updated Fri, 20 Jun 2014 11:35 PM IST
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पुरानी कचहरी रोड पर सरकारी कार्यालयों के शिफ्ट होने के बाद खाली पड़ी 8 एकड़ जमीन तमाशा बनकर रह गई है। इस जमीन पर पार्क, स्कूल, धर्मशाला और गुरुद्वारा बनाने की मांग जोर पकड़ रही है, लेकिन प्रशासन 10 वर्ष में भी किसी प्रस्ताव को सिरे नहीं चढ़ा पाया है।
अब सीएम के 23 जून को प्रस्तावित दौरे पर यह मुद्दा उनके दरबार में गूंजेगा। कई सामाजिक संगठनों ने इसके लिए तैयारी शुरू कर दी है। फतेहाबाद में न्यायिक परिसर व तहसील बनने के बाद पुरानी कचहरी रोड से ये ऑफिस शिफ्ट कर दिए गए थे। तब से यह 8 एकड़ सरकारी जमीन खाली पड़ी है। यहां पर कुछ ऑफिस ही चल रहे हैं। खाली जमीन का सदुपयोग करने की सोचते हुए कई संगठन आगे आ गए।
15-20 कॉलोनियों की पार्क बनाने की मांग
पुराने बस स्टैंड के आसपास लगभग 15 से 20 कॉलोनियां लगती हैं जहां पर घूमने के लिए कोई पार्क नहीं है। पार्क की मांग को लेकर आसपास की कॉलोनी के लोगों ने प्रशासन से इस जमीन पर पार्क बनाने की मांग की थी। प्रशासन ने भी पार्क बनाने के लिए जमीन देने पर सकारात्मक रुख दिखाया था। विभिन्न संस्थाओं और समितियों से जुड़े एडवोकेट देवीलाल ने कहा कि पार्क और स्कूल को जमीन देने का मामला राजनीतिक कारणों से अटका पड़ा है। इसे सरकार चाहे तो जल्द मंजूर कर सकती है, लेकिन सरकार जनहित में कार्य न करके राजनीतिक रोटियां सेक रही है।
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तीन कमरों के स्कूल को आस
भट्ठा कालोनी में तीन कमरों में चल रहे प्राइमरी स्कूल की कमेटी को पता चली तो एसएमसी ने स्कूल बनाओ संघर्ष समिति गठित कर स्कूल के लिए जमीन देने की मांग की। समिति ने प्रशासन से मांग की थी कि भट्ठा कॉलोनी में साढे़ सात मरले में प्राइमरी स्कूल चल रही है जो बच्चों की संख्या ज्यादा होने के कारण छोटा है। इसलिए उन्हें स्कूल बनाने के लिए जगह दी जाए। इस पर प्रशासन ने स्कूल के लिए जमीन देने की मांग को भी मान लिया। यह प्रस्ताव मंत्रालय को भी भेज दिया गया, लेकिन उस पर अभी तक कोई फैसला नहीं हुआ।
धार्मिक संस्था ने की रेट कम करने की मांग
गुरुद्वारा सिंह सभा और ब्राह्मण सभा ने प्रशासन को ज्ञापन देकर गुरुद्वारा और धर्मशाला बनाने के लिए इस जमीन पर जगह की मांग की। इन धार्मिक संस्थाओं ने अपने-अपने राजनीतिक स्तर पर जोर लगाकर मुख्यमंत्री से जमीन के लिए हामी भरवा ली और आदेश भी यहां पहुंच गए, लेकिन जिस दामों पर सरकार संस्थाओं को जमीन देना चाह रही थी, संस्थाओं को यह रास नहीं आए। गुरुद्वारा सिंह सभा के प्रधान महेंद्र सिंह वधवा ने कहा कि जमीन के मार्केट रेट ज्यादा होने के कारण गुरुद्वारा सिंह सभा और ब्राह्मण सभा ने अभी तक जमीन अपने नाम ट्रांसफर नहीं करवाई है। इसको लेकर सभा ने मुख्यमंत्री से जमीन के रेट कम करने की मांग की थी।
किसके हिस्से में कितनी आई जमीन
आठ एकड़ जमीन में से पार्क के लिए लगभग 2 एकड़, स्कूल के लिए 1 एकड़ 9 कनाल, गुरुद्वारा सिंह सभा को 4 कनाल और ब्राह्मण सभा को 2 कनाल जगह देने के लिए चयनित की गई।
चंडीगढ़ में अटकी फाइल
मंत्रालय ने प्रशासन के प्रपोजल पर जवाब मांगा था कि यदि इस जमीन पर पार्क, स्कूल, गुरुद्वारा और धर्मशाला बनाई गई तो इसकी जगह किसको ट्रांसफर होगी और इसको संचालित कौन करेगा और मालिकाना हक किसका रहेगा। इसका जवाब कमिश्नर के द्वारा भेजा जाए। उधर, प्रशासन की लापरवाही के चलते पार्क व स्कूल को ट्रांसफर होने वाली जमीन की फाइल चंडीगढ़ में ही रुकी हुई है।
सीएम से करेंगे मांग
पार्षद ज्योति मेहता और स्कूल बनाओ संघर्ष समिति के प्रधान धर्मपाल ने बताया कि पार्क व स्कूल बनाने की कार्रवाई एक साल से ज्यादा समय से अधर में लटकी पड़ी है। इस मामले को लेकर 23 जून को एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मिलेगा और जल्द इस जगह को ट्रांसफर करने की मांग करेगा।
पुरानी कचहरी रोड वाली जगह की फाइल मैं चैक कर रहा हूं। जगह का क्या स्टेटस है। यह देखने के बाद ही कोई निर्णय लिया जा सकता है। लोगों व समितियों की क्या मांग है उसके मद्देनजर ही फैसला लिया जाएगा।
- डीके बेहरा, उपायुक्त, फतेहाबाद
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अब सीएम के 23 जून को प्रस्तावित दौरे पर यह मुद्दा उनके दरबार में गूंजेगा। कई सामाजिक संगठनों ने इसके लिए तैयारी शुरू कर दी है। फतेहाबाद में न्यायिक परिसर व तहसील बनने के बाद पुरानी कचहरी रोड से ये ऑफिस शिफ्ट कर दिए गए थे। तब से यह 8 एकड़ सरकारी जमीन खाली पड़ी है। यहां पर कुछ ऑफिस ही चल रहे हैं। खाली जमीन का सदुपयोग करने की सोचते हुए कई संगठन आगे आ गए।
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15-20 कॉलोनियों की पार्क बनाने की मांग
पुराने बस स्टैंड के आसपास लगभग 15 से 20 कॉलोनियां लगती हैं जहां पर घूमने के लिए कोई पार्क नहीं है। पार्क की मांग को लेकर आसपास की कॉलोनी के लोगों ने प्रशासन से इस जमीन पर पार्क बनाने की मांग की थी। प्रशासन ने भी पार्क बनाने के लिए जमीन देने पर सकारात्मक रुख दिखाया था। विभिन्न संस्थाओं और समितियों से जुड़े एडवोकेट देवीलाल ने कहा कि पार्क और स्कूल को जमीन देने का मामला राजनीतिक कारणों से अटका पड़ा है। इसे सरकार चाहे तो जल्द मंजूर कर सकती है, लेकिन सरकार जनहित में कार्य न करके राजनीतिक रोटियां सेक रही है।
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तीन कमरों के स्कूल को आस
भट्ठा कालोनी में तीन कमरों में चल रहे प्राइमरी स्कूल की कमेटी को पता चली तो एसएमसी ने स्कूल बनाओ संघर्ष समिति गठित कर स्कूल के लिए जमीन देने की मांग की। समिति ने प्रशासन से मांग की थी कि भट्ठा कॉलोनी में साढे़ सात मरले में प्राइमरी स्कूल चल रही है जो बच्चों की संख्या ज्यादा होने के कारण छोटा है। इसलिए उन्हें स्कूल बनाने के लिए जगह दी जाए। इस पर प्रशासन ने स्कूल के लिए जमीन देने की मांग को भी मान लिया। यह प्रस्ताव मंत्रालय को भी भेज दिया गया, लेकिन उस पर अभी तक कोई फैसला नहीं हुआ।
धार्मिक संस्था ने की रेट कम करने की मांग
गुरुद्वारा सिंह सभा और ब्राह्मण सभा ने प्रशासन को ज्ञापन देकर गुरुद्वारा और धर्मशाला बनाने के लिए इस जमीन पर जगह की मांग की। इन धार्मिक संस्थाओं ने अपने-अपने राजनीतिक स्तर पर जोर लगाकर मुख्यमंत्री से जमीन के लिए हामी भरवा ली और आदेश भी यहां पहुंच गए, लेकिन जिस दामों पर सरकार संस्थाओं को जमीन देना चाह रही थी, संस्थाओं को यह रास नहीं आए। गुरुद्वारा सिंह सभा के प्रधान महेंद्र सिंह वधवा ने कहा कि जमीन के मार्केट रेट ज्यादा होने के कारण गुरुद्वारा सिंह सभा और ब्राह्मण सभा ने अभी तक जमीन अपने नाम ट्रांसफर नहीं करवाई है। इसको लेकर सभा ने मुख्यमंत्री से जमीन के रेट कम करने की मांग की थी।
किसके हिस्से में कितनी आई जमीन
आठ एकड़ जमीन में से पार्क के लिए लगभग 2 एकड़, स्कूल के लिए 1 एकड़ 9 कनाल, गुरुद्वारा सिंह सभा को 4 कनाल और ब्राह्मण सभा को 2 कनाल जगह देने के लिए चयनित की गई।
चंडीगढ़ में अटकी फाइल
मंत्रालय ने प्रशासन के प्रपोजल पर जवाब मांगा था कि यदि इस जमीन पर पार्क, स्कूल, गुरुद्वारा और धर्मशाला बनाई गई तो इसकी जगह किसको ट्रांसफर होगी और इसको संचालित कौन करेगा और मालिकाना हक किसका रहेगा। इसका जवाब कमिश्नर के द्वारा भेजा जाए। उधर, प्रशासन की लापरवाही के चलते पार्क व स्कूल को ट्रांसफर होने वाली जमीन की फाइल चंडीगढ़ में ही रुकी हुई है।
सीएम से करेंगे मांग
पार्षद ज्योति मेहता और स्कूल बनाओ संघर्ष समिति के प्रधान धर्मपाल ने बताया कि पार्क व स्कूल बनाने की कार्रवाई एक साल से ज्यादा समय से अधर में लटकी पड़ी है। इस मामले को लेकर 23 जून को एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मिलेगा और जल्द इस जगह को ट्रांसफर करने की मांग करेगा।
पुरानी कचहरी रोड वाली जगह की फाइल मैं चैक कर रहा हूं। जगह का क्या स्टेटस है। यह देखने के बाद ही कोई निर्णय लिया जा सकता है। लोगों व समितियों की क्या मांग है उसके मद्देनजर ही फैसला लिया जाएगा।
- डीके बेहरा, उपायुक्त, फतेहाबाद